भरतपुर. शहर के जवाहर नगर स्थित कब्रिस्तान की भूमि को लेकर उपजा विवाद गुरुवार को प्रशासन के लिए सिरदर्द बन गया। अचानक बड़ी संख्या में एक समुदाय के लोग जुलूस के रूप में सीएम के कार्यक्रम स्थल के लिए रवाना हुए तो प्रशासन में हडक़ंप मच गया। समाज ने लोगों ने विरोध व्यक्त करते हुए नाराजगी जताई। साथ ही प्रशासन व जनप्रतिनिधियों पर भूमाफियाओं का सहयोग करने का आरोप भी लगाया। इसके बाद पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर ज्ञापन दिया।
ज्ञापन में कहा है कि कब्रिस्तान की भूमि रियासतकालीन है। इसमें सम्पूर्ण चारदीवारी नगर विकास न्यास, नगर निगम एवं सांसद निधि से करीब 20-21 वर्ष पूर्व कराई गई थी। इस भूमि के अन्दर कुआं, बावड़ी आदि को समाप्त कर कब्रिस्तान स्थित कब्रों को भूमाफिया ने तोड़ दिया है। जिन भूमाफियाओं की ओर से कब्रिस्तान की भूमि को क्रय किया गया है उस भूमि की किस्म को सम्वत् 2072 -2075 से पूर्व कब्रिस्तन के स्थान पर बंजर एंव बागणी किस्म राजस्व रिकार्ड में इन्द्राज कर दिया। ताकि कब्रिस्तान के मूल स्वरूप को बदला जा सके। जो कि कानून संगत नहीं है। इस भूमि को हड़पने के खेल में शामिल भूमाफियाओं के खिलाफ जांच की जानी चाहिए। ताकि उन सभी भूमाफियाओं के नाम सामने आ सकें। साथ ही इन्हें मदद करने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। ज्ञापन में कब्रिस्तान की भूमि को सुरक्षित करने की मांग की गई है।
सरकारी जमीनों पर भी है भूमाफियाओं की नजर
हकीकत यह है कि कब्रिस्तान की जमीन को लेकर विवाद कोई नया नहीं है। भले ही दस्तावेजों में बदलाव के बाद इस जमीन का बेचान किया गया है, लेकिन शहर में तमाम सरकारी जमीनों को भी पिछले कुछ सालों के अंदर खुर्द-बुर्द कर दिया गया है। शहर में एक जमीन पर तो पट्टे भी जारी कर दिए गए। अब वहां उस कॉलोनी का ही नाम बदलने की तैयारी की जा रही है। ताकि आवंटित पट्टों को सही ठहराया जा सके। फर्जी पट्टा प्रकरण में सरकारी जमीनों को खुर्द-बुर्द करने की कोशिश की गई, हालांकि यह बात अलग है कि रसूख के दबाव में जांच सही तरीके से न कर एक ही आरोपी को सभी केसों में गिरफ्तार कर करोड़ों रुपए के घोटाले को दबा दिया गया।