
गुरुजी पहुंचे ड्यूटी देने स्कूल, बच्चे कब आएंगे यह पता नहीं
भरतपुर. कोरोना महामारी के कारण लॉकडाउन लगने के बाद ड्यूटी निभा रहे शिक्षक अब बुधवार को स्कूल खुलने के बाद पहुंचे, लेकिन अभी एक जुलाई से बच्चों के स्कूल आने को लेकर कोई निर्णय नहीं हो सका है। शिविरा पंचांग के अनुसार शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने अध्यापकों को 24 जून से फिर स्कूल आने के लिए कह दिया था। इसी के तहत बच्चों को भी एक जुलाई से स्कूल जाना है, लेकिन इसे लेकर अधिकारी अभी असमंजस में है। कारण यह है कि कोरोना का कहर थम नहीं रहा है और 10 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को अभी भी घर से बाहर नहीं निकलने की एडवाइजरी भी चल रही है। शिक्षकों को विद्यालय पहुंचने के बाद सबसे पहले भवन को व्यवस्थित करना होगा। जो स्कूल भवन पिछले तीन माह से बंद है। वहां धूल की परतें जम गई है। कक्षा-कक्षों में फर्नीचर भी जमवाना होगा। डीईओ माध्यमिक मुख्यालय प्रेमसिंह कुंतल की ओर से जारी आदेश में कहा है कि निदेशक माध्यमिक शिक्षा बीकानेर के अनुसार कक्षा क्रमोन्नति प्रावधानों में सत्र 2019-20 के लिए शिथिलन प्रदान करते हुए कक्षा एक से नौ व 11 में अध्ययनरत समस्त विद्यार्थियों को आगामी कक्षाओं के लिए क्रमोन्नत किया जा चुका है। सभी संस्था प्रधान शाला दर्पण पोर्टल पर उपलब्ध क्रमोन्नति प्रमाण पत्र डाउनलोड कर विद्यालय स्तर पर निर्मित अंकतालिका तैयार कराएं। सभी शिक्षकों की भी प्रतिदिन उपस्थिति दी जाएगी। इधर, शिक्षक नेताओं ने कहा कि बिना बच्चों के शिक्षकों को स्कूल बुलाना वर्तमान हालात में उचित नहीं है। ऐसे में शिक्षकों और बच्चों को स्कूल बुलाने के निर्णय पर सरकार को पुन: सोचना चाहिए। वहीं दूसरी ओर निजी स्कूल संचालकों का भी कहना है कि सरकार को गाइडलाइन तय स्कूलों को खोलना चाहिए।
माध्यमिक व उच्च माध्यमिक स्कूलों में परेशानी कम
माध्यमिक व उच्च माध्यमिक स्कूल यूं तो लॉकडाउन में बंद थी, लेकिन बोर्ड परीक्षा के कारण इन स्कूलों में 16 जून से व्यवस्थाओं को दुरुस्त कर लिया गया था। ऐसे में अब सत्र शुरू करने पर इन स्कूलों में सफाई आदि की समस्या नहीं है। जबकि प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों में अभी सफाई की दरकार है। शिक्षकों को मुख्य रूप से स्कूलों में विद्यार्थियों का परिणाम तैयार कर वितरण करना, स्कूल के रिकॉर्ड को पूरा करने, बच्चों को पढ़ाने के लिए नया टाइम टेबल बनाना, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए बच्चों की बैठक व्यवस्था करना, स्कूल में बच्चों के बार-बार हाथ धुलवाने व सेनेटाइज कराने की व्यवस्था करना, पाठ्यपुस्तकें पीईईओ से अपने स्कूल लाने के कार्य करने होंगे।
-कोरोना संक्रमण के मामले में हमारा जिला प्रदेश में विशेष चल रहा है। इसलिए ऐसे जिलों के लिए विशेष गाइडलाइन बनानी चाहिए। शिक्षकों ने तो कोरोना में भी ड्यूटी दी है। इसलिए बच्चों को स्कूल बुलाने के मामले में निर्णय सुरक्षा के आधार पर लिया जाना चाहिए।
पवन शर्मा
प्रदेश संयुक्त मंत्री
राजस्थान शिक्षक संघ शेखावत
-सुरक्षा को लेकर एडवाइजरी जारी करनी चाहिए। निजी स्कूल संचालकों को भी सरकारी स्तर पर मदद करनी चाहिए। सुविधाएं मुहैया कराई जाएं, जो कि सरकारी स्कूलों में कराएं वो ही निजी स्कूलों को भी उपलब्ध कराएं। बच्चों की सुरक्षा के हिसाब शर्तों को लागू किया जाए।
हरभान सिंह कुंतल
प्राइवेट स्कूल वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष
Published on:
24 Jun 2020 06:44 pm
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