
विदेशी तकनीक अपनाने में भरतपुर नहीं पीछे, ड्रेगन फ्रूट में आजमा रहे हाथ
भरतपुर. विदेशी तकनीक को अपनाने में भरतपुर जिले के किसान भी पीछे नहीं है। इजराइली के बाद ड्रेगन फ्रूट खेती की ओर भी अब किसान आगे बढ़ रहे हैं। जिले में इजराइली की खेती तो अनेक किसान करते हैं, लेकिन दो प्रगतिशील किसानों ने ड्रेगन फ्रूट की खेती शुरू की है। स्वास्थ्य की दृष्टि से भी ड्रेगन फ्रूट फायदेमंद रहता है। यह फल मधुमेह के असर को कम करता है और कैंसर के सेलों को मारते है और पाचन क्रिया को सही बनाने में सहयोग करता है।
डीग के सामई खेड़ा निवासी किसान नत्थीसिंह ने एक हैक्येटर में ड्रेगन फ्रूट की खेती की है। इसी तरह बयाना के पास नंदीगांव में भी एक किसान ने ड्रेगन फ्रूट की खेती की है। यह खेती ज्यादातर चीन व ऑस्ट्रेलिया में होती है। भारत में भी विशेषकर बेंगलुरु साइड में ज्यादा होती है, क्योंकि वहां का तापमान इस खेती के अनुकूल है।
भरतपुर संभाग उद्यान विभाग के संयुक्त निदेशक योगेश कुमार शर्मा के अनुसार उद्यान विभाग भी ऐसे प्रगतिशील किसानों को जागरुक करने में सहयोग करता है। विभाग के अधिकारी स्थल कर दौरा कर राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ दिलाने का प्रयास करते हैं। ड्रेगन फल की खेती में बूंद-बूंद सिंचाई योजना के तहत सरकार की ओर से 75 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती है। किसान नत्थीसिंह कर्नाल एवं तेंलगाना से पौध लाए और एक हैक्टेयर में ड्रेगन फ्रूट की है। प्रमाणिक नर्सरियों ने पौध खरीदने पर सरकार बिल पर 75 प्रतिशत सब्सिडी भी देती है।
ऐसे होती है ड्रेगन फ्रूट की खेती
इसकी पौध जनवरी-फरवरी को लगती है और सितम्बर-अक्टूबर में फल तैयार हो जाता है। डंडातूर खेती के नाम से प्रसिद्ध इस फल को लगाने के लिए सीमेंट खंभे के सहारे पौध को ऊपर चढ़ाया जाता है। इसके लिए तापमान 27 से 30 डिग्री सेल्सियस तक रहना चाहिए। इसके एक फल का वजन एक किलो तक रहता है। यह फल महंगा होता है। ऐसे में कम फसल में भी किसानों को अधिक मुनाफा होता है।
इनका कहना
यूं तो चीन में ज्यादा होती है, लेकिन अब भारत में भी कम मात्रा में ही सही लेकिन होने लगी है। भरतपुर में भी दो जगह ड्रेगन फ्रूट की खेती हो रही है। शोध के अनुसार ड्रेगन फ्रूट कैंसर व मधुमेह को कम करने में और पाचन क्रिया को बनाए रखने में उपयोगी साबित होता है। इस खेती की ओर बढ़ रहे किसानों को विभाग की ओर पूरा मार्गदर्शन दिया जाता है और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जाती है। फिलहाल जिले में दो किसानों ने इसकी खेती करना शुरू किया गया है।
-जनक राज मीणा, उपनिदेशक, उद्यान विभाग, भरतपुर।
Published on:
25 Feb 2023 11:50 am
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