सुनिए शहरी सरकार...गलत डिजाइन से बने स्पीड ब्रेकर हर माह ले रहे चालकों की जान

-शहर में 100 से भी अधिक स्थानों ऐसे खतरनाक स्पीड ब्रेकर
-प्लास्टिक के स्पीड ब्रेकरों की कील तक बाहर निकल रही
-नगर निगम व नगर सुधार न्यास ने स्पीड ब्रेकर लगाकर की इतिश्री

By: Meghshyam Parashar

Published: 17 Apr 2021, 09:31 PM IST

भरतपुर. वाहनों की स्पीड कम करने सड़कों पर बनाए गए ब्रेकर उलटे दुर्घटना का कारण बन रहे हैं। इसकी एकमात्र वजह है इंडियन रोड कांग्रेस की गाइडलाइन के मुताबिक इसका नहीं बनना। शहर की सड़कों पर बने ज्यादातर स्पीड ब्रेकर बेडौल हैं। इसकी वजह से कई लोगों की जान चली गई है। ऐसे स्थानों पर दुपहिया वाहन चालकों को रोज संतुलन खोकर गिरते- संभलते देखा जा सकता है। बावजूद नगर निगम, पीडब्ल्यूडी के अफसरों की नींद तक नहीं टूटी है। बेडौल ब्रेकर के कारण बैक बोन, गर्दन सहित अन्य बीमारियां भी लोगों को हो रही है। शहर के बेडौल ब्रेकर, किसी की जान ले रहे तो किसी को कर रहे बीमार, कैसे बनाना चाहिए यह इंजीनियरों को ही मालूम नहीं है।

जानिए यह है नियम

इंडियन रोड कांग्रेस की गाइडलाइन के अनुसार 17 मीटर रेडियस के राउंडेड हंप के शेप में स्पीड ब्रेकर बनाना चाहिए। इसकी चौड़ाई 3.7 मीटर और ऊंचाई 10 सेंटीमीटर होना चाहिए। गाइडलाइन में साफ लिखा है कि इन ब्रेकरों का निर्माण करने से वाहन डैमेज नहीं होना चाहिए। इनसे गुजरते समय वाहन चालक या उसमें बैठने वाले लोगों को असुविधा या अन्य प्रकार का नुकसान नहीं होना चाहिए। ब्रेकर का निर्माण करने वाली एजेंसियों, ठेकेदार और सरकारी विभागों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए। इसकी मॉनिटरिंग भी लोगों और जनप्रतिनिधियों की ओर से समुचित की जानी चाहिए।

सड़कों पर नहीं नियमों का पालन

शहर के विभिन्न इलाकों में मनमर्जी से स्पीड ब्रेकर बनाए जा रहे हैं। इन स्पीड ब्रेकरों में नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। इन पर प्रशासनिक कार्रवाई की आवश्यकता है लेकिन मामलों में प्रशासन उदासीन रवैया अपना है। सड़कोंपर बने स्पीड ब्रेकर कई बार हादसे का कारण बन रहे हैं। इन स्पीड ब्रेकरों पर न कलर किए गए है न ही को कई जगह संकेतक लगाए गए हैं। ऐसे में इनसे हादसे की आशंका बनी रहती है।

लग्जरी वाहनों की बॉडी होती है क्षतिग्रस्त

मोटे व ऊंचे स्पीड ब्रेकर पर लग्जरी कार भी आसानी से नहीं गुजर पाती है। यहां पर लग्जरी वाहनों की बॉडी भी स्पीड ब्रेकर से टकरा जाती है। ऐसे में वाहनों की बॉडी क्षतिग्रस्त हो जाती है। इसके अलावा माल से लदे भारी वाहनों के एक्सल भी टूट जाते हंै। मुख्य सडक़ों पर बने स्पीड ब्रेकर्स पर जेबरा क्रॉस भी नहीं है। ऐसे में वाहन चालकों को स्पीड ब्रेकर का पता भी लग पाता है।

यह हो रहा नुकसान

-स्पीड ब्रेकर से गिरे या झटका लगा तो स्वास्थ्य को नुकसान पक्का
-गिरने पर सबसे पहले हाथ में, कोहनी, कंधे पर चोट आती है और फ्रेक्चर तक हो सकता है।
-बाइक से गिरने पर यदि रेलिंग, पत्थर से टक्कर लगती है तो सिर में चोट लग सकती है।
-एकाएक ब्रेक लगते ही जो झटका लगता है उससे कमर दर्द रहता है और यह बढ़ भी सकता है।
-चारपहिया वाहन में सवार उम्रदराज लोगों के लिए अचानक स्पीड ब्रेकर पर झटका लगने से मुश्किलें बढ़ जाती हैं

हादसा...स्पीड ब्रेकर इतना ऊंचा कि गिरने से महिला का सिर फटा

किला परिसर में चौबुर्जा पुलिस चौकी के पास शनिवार दोपहर दो बजे रीना खंडेलवाल पत्नी महेश खंडेलवाल निवासी नदिया मोहल्ला अपने बेटे के साथ बाइक पर जा रही थी। स्पीड ब्रेकर पर चढ़ते ही महिला उछलकर सड़क पर जा गिरी। इससे सिर फट गया। लहुलुहान अवस्था में महिला को अस्पताल में भर्ती कराया गया। बताते हैं कि इससे पहले भी तीन लोग हादसे का शिकार हो चुके हैं।

परेशानी: पब्लिक डिमांड पर बनते हैं ब्रेकर

पीडब्लूडीऔर नगर निगम के अफसरों का कहना है कि वाहनों की तेज रफ्तार को कंट्रोल करने पब्लिक की डिमांड पर स्पीड ब्रेकर बनाए जाते हैं। कई बार रोड निर्माण के दौरान लोग कंस्ट्रक्शन करने वाले राजमिस्त्री या लेबरों से ब्रेकर बनवा लेते हैं। अफसरों को इसका पता बाद में चलता है। एक-दो स्थानों पर सीमेंट रोड पर लोगों ने खुद कांक्रीट मिक्चर तैयार करवाया और लेबरों से स्पीड ब्रेकर बनवा लिया।

यहां है मनमाने स्पीड ब्रेकरों से बुरा हाल

शहर के किला परिसर, सरकूलर रोड, केंद्रीय विद्यालय के पास, आरबीएम अस्पताल के पास, हीरादास बस स्टैंड, केतन गेट के पास, न्यू आदर्श नगर कॉलोनी, जघीना गेट के पास, मोरी चार बाग के पास, काली की बगीची के पास, सूरजपोल चौराहेे के आसपास, चांदपोल गेट समेत 100 से भी अधिक स्थानों पर ऐसी ही स्थिति बनी हुई है।

नॉलेज: कोर्ट में दायर कर सकते हैं रिट

जिला उपभोक्ता आयोग के सदस्य दीपक मुदगल ने बताया कि अगर हमें अपनी कॉलोनी में या किसी भी और जगह ब्रेकर ज्यादा या फिर नियम से नहीं बने होने की शिकायत हो तो जिला कलक्टर से शिकायत कर सकते हैं। नहीं सुनें तो संबंधित निकाय के सचिव या आयुक्त तक बात पहुंचा सकते हैं। वहां भी निराकरण हो तो कोर्ट में रिट दायर कर सकते हैं। मनमाने तरीके से बने स्पीड ब्रेकर को लेकर हादसा होने पर संबंधित जिम्मेदार निकाय के खिलाफ दावा भी कर सकते हैं।

Meghshyam Parashar Bureau Incharge
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