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कागजों में करोड़ों से विकास का दावा, खुद स्पीड ब्रेकर बनाने में फेल

-शहरी सरकार का काला कारनामा, शहर में मनमर्जी के स्पीड ब्रेकरों को लेकर फिर साधी चुप्पी, न्यायालय में जा सकता है मामला

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कागजों में करोड़ों से विकास का दावा, खुद स्पीड ब्रेकर बनाने में फेल

कागजों में करोड़ों से विकास का दावा, खुद स्पीड ब्रेकर बनाने में फेल

भरतपुर. शहरी सरकारी का करीब छह महीने के अंदर एक बार दरबार लगता है, इसमें साधारण सभा की बैठक के नाम पर 65 चुने व पांच मनोनीत पार्षद समेत तमाम अफसर आकर विकास पर चर्चा करते हैं। कुछ घंटों की बैठक में करोड़ों रुपए से विकास का दावा कर दिया जाता है। साथ ही कुछ पार्षद कुछ मुद्दों पर हल्ला कर सुर्खियां बटोर जाते हैं, लेकिन इन सबके बाद भी स्पीड ब्रेकर का मुद्दा इन तमाम जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों के लिए मायने नहीं रखता है। क्योंकि हर दिन कोई न कोई वाहन चालक मनमर्जी के स्पीड ब्रेकरों के कारण घायल हो रहा है। जबकि नगर निगम में कार्यरत इंजीनियरों की इंजीनियरिंग स्पीड ब्रेकरों को देखकर फेल नजर आती है। उल्लेखनीय है कि राजस्थान पत्रिका ने 18 अप्रेल के अंक में सुनिए शहरी सरकार...गलत डिजाइन से बने स्पीड ब्रेकर हर माह ले रहे चालकों की जान, ये कैसा विकास है शीर्षक से समाचार प्रकाशित कर मामले का खुलासा किया था। इसके बाद लगातार आमजन की इस समस्या को उजागर किया जा रहा है।
हकीकत यह है कि स्पीड ब्रेकरों को लेकर शहर में नगर निगम हो या सार्वजनिक निर्माण विभाग, किसी की भी कोई सही योजनानहीं है। जहां सबसे ज्यादा जरुरत है, वहां इनका निर्माण नहीं किया गया। जहां भी बने हैं, वहां ऊंचाई इतनी ज्यादा है कि अगर ध्यान नहीं दिया गया तो दुर्घटना की पूरी आशंका रहती है। दो पहिया वाहन चालक रात को इन स्पीड ब्रेकर पर असंतुलित होकर गिर रहे हैं, वहीं चार पहिया वाहन की भी स्पीड तेज हो तो नीचे से टकरा जाते हैं। इन पर बनी जेबरा लाइन भी रात को दिखाई नहीं दे रही हैं। पत्रिका ने जब नगर निगम के एक्सईएन विनोद चौहान ने बताया कि ठेकेदार को निर्देशित कर दिया है। श्रमिक काम पर नहीं आ रहे हैं। जल्द निराकरण कराया जाएगा।

जिस अभियंता का एरिया, उसके खिलाफ हो कार्रवाई

नियम यह है कि स्पीड ब्रेकर का निर्माण स्वीकृति लेकर ही कराया जाता है। अगर यह सही है तो जितने भी स्पीड ब्रेकर बने हुए हैं उनमें नगर निगम ने राशि व्यय की है। इनकी देखरेख का जिम्मा भी ठेकेदार व नगर निगम के एईएन, जेईएन, एक्सईएन का था। अगर मानक के अनुसार स्पीड ब्रेकर नहीं बने हैं और उनके कारण हादसे हो रहे हैं तो खुद जिला कलक्टर, संभागीय आयुक्त को भी चाहिए कि निरीक्षण कर जिम्मेदार अभियंता के खिलाफ कार्रवाई करें। साथ ही उसका व्यय भी उनसे वसूल किया जाए।

अगर निराकरण नहीं हुआ तो कोर्ट में जाएंगे

वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीनाथ शर्मा ने बताया कि पिछले लंबे समय से शहर के मुद्दों को लेकर न्यायालय के माध्यम से लड़ रहे हैं, लेकिन स्थानीय निकाय व प्रशासन हमेशा पंगु बना नजर आता है। स्वयं के हितों के लिए आमजन की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया जाता है। अगर जल्द ही नगर निगम ने स्पीड ब्रेकरों की समस्या को लेकर ध्यान नहीं दिया तो प्रकरण में न्यायालय में रखा जाएगा।

आमजन कहिन....

-मुख्य सड़क पर स्पीड ब्रेकर लगा दिए हैं लेकिन उन पर रंग नहीं किया गया है। एप्रोच रोड पर ब्रेकर की जरुरत है लेकिन वहां लगाया नहीं गया है। ब्रेकर मानक के अनुसार नहीं है।

सुनील मितल, पाई बाग


-अंधेरे में दिखते नहीं है लोग डर जाते हैं फिर इसके बाद गिरते है। पिछले कुछ दिन के अंदर ऐसे दर्जनों हादसे हो चुके हैं, जबकि नगर निगम के अफसर नींद में हैं।

हर्ष मुदगल, मोरी चारबाग

-स्पीड ब्रेकर गलत लगाए हैं रास्ते में चलते हुए दिखते नहीं है जहां जरुरत है वहां नहीं लगाए गए हैं। नेहरू पार्क के समीप होना चाहिए था बीच में लगा दिया है।

सुशांत गुप्ता, जामा मस्जिद

-स्पीड ब्रेकर सड़क पर गलत लगाए गए हैं। कहीं-कहीं तो इतने ऊंचे हैं कि कलर ही नहीं है, दिखते नहीं है। गिरते-गिरते कई बार बचा हूं।

राजेश कुमार सिंघल, आर्य समाज रोड

-स्पीड ब्रेकर उचित नहीं लगाए गए हैं। इन पर कोई हाईलाइटर नहीं लगा है। इस बार लाइट वाले स्पीड ब्रेकर के स्थान पर छोटे-छोटे लाइट वाले स्पीड ब्रेकर लगाने चाहिए। रात्रि में चमकने के कारण कोई हादसा नहीं होगा।

डॉ. कुलदीप शर्मा, गोपालगढ़ मोहल्ला

-स्पीड ब्रेकर पर कलर होना चाहिए। सड़क के लेवल में रहते हैं दिखते नहीं है। लगता है कि नगर निगम की ओर से खानापूर्ति करने के लिए स्पीड ब्रेकर बनवाए गए हैं।

रजनीश लता, संजय नगर

-कुछ दिन पूर्व मेरी बच्ची आरबीएम चिकित्सालय के समीप सरकूलर रोड पर अपनी मां के साथ जा रही थी उसी दौरान गिरकर घायल हो गई। दो दिन पहले ही सेक्टर तीन में दुर्घटना में एक बुजुर्ग घायल हो गया था। रात्रि को स्पीड ब्रेकर दिखते नहीं है उन पर रंग होना चाहिए।

डॉ. सुशील गोस्वामी, वासन गेट

-मेरी सहेली किला स्थित स्पीड ब्रेकर से गिरकर कुछ दिन पूर्व घायल हो गई थी, जो कि काफी दिन तक घायल रही। शहर में तमाम स्थानों पर ऐसे स्पीड ब्रेकर बने हुए हैं।

ईशा राज, मुखर्जी नगर

-स्पीड ब्रेकर एक गली में तीन लगा दिए हैं लेकिन किसी पर भी रंग नहीं किया गया है। आए दिन दुर्घटनाएं हो रही है। खैर इन्हें देखना वाला भी कोई अफसर नहीं है।

अमृत तनेजा, कृष्णा नगर कॉलोनी

-राजस्थान पत्रिका की ओर से स्पीड ब्रेकरों को लेकर अभियान चलाया जा रहा है। यह सराहनीय है। इसके लिए नगर निगम आयुक्त, सार्वजनिक निर्माण विभाग व नगर सुधार न्यास के अधिकारियों से बात कर समाधान का प्रयास किया जाएगा। साथ ही राज्यमंत्री डॉ. सुभाष गर्ग के स्वस्थ होते ही उन्हें भी अवगत कराया जाएगा।

संतोष फौजदार
जिलाध्यक्ष, राष्ट्रीय लोकदल