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छह वर्ष पहले अपनों से बिछड़े, फिर असहायों को ही बनाया परिवार

-अब लुपिन भी अम्बू ज्योति आश्रम से जुड़कर देशभर में चलाएगी असहायों को अपनो से मिलाने का अभियान

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छह वर्ष पहले अपनों से बिछड़े, फिर असहायों को ही बनाया परिवार

छह वर्ष पहले अपनों से बिछड़े, फिर असहायों को ही बनाया परिवार

भरतपुर. छह साल पहले जो व्यवसाई अपनो बिछडऩे के बाद दो महीने तक स्टेशन पर पड़ा रहा, उसे खुद के बारे में कुछ पता नहीं था। क्योंकि वह सबकुछ भूल चुका था। जिस संस्था ने उसे असहाय मानकर आसरा दिया। उसने फिर उसी संस्था को अपना परिवार बना लिया। अब वह अपने परिवार के पासही नहीं जाना चाहते हैं। यह कहानी है अम्बू ज्योति आश्रम से जुड़े टैक्सटाइल व्यवसाई गुजरात के रहने वाले 56 वर्षीय विमल की।
उन्होंने बताया कि वह खुद आज से छह वर्ष पूर्व अपने परिजनों से बिछड़कर वल्लीपुरम स्टेशन पहुंचकर ट्रेन नहीं मिलने के कारण स्टेशन के प्लेटफार्म पर ही सो गए थे। जब वहां उनकी नींद खुली तो उन्हें कुछ भी याद नहीं आ रहा था और न उनके हाथ-पांव कार्य कर रहे थे। करीब दो माह तक वह स्टेशन पर ही पड़े रहे। उसके बाद किसी ने उनकी सूचना अम्बू ज्योति आश्रम को दी जहां से आश्रम के निदेशक जुबिन ने उन्हें अपने आश्रम में रखा और पूरी देखभाल की। तब वह चल-फिर भी नहीं सकता था लेकिन आश्रम के माहौल और वहां की लोगों के प्यार एवं सेवा भावना की बदौलत वह स्वस्थ हुए और तब से इसी आश्रम में रहकर उनके प्रेरणा लेकर असहाय लोगों की सेवा में जुटा हुए हैं। वह कहते हैं कि आश्रम के लोगों को ही अपना परिवार समझता हूं और अपने घर वापस नहीं जाना चाहता। जिसके भी परिजन इस दुनिया में जीवित हैं उन्हें उनके बिछड़े हुए परिजनों से मिलाना चाहिए। अम्बू ज्योति आश्रम के निदेशक जुबिन ने आश्रम की ओर से किए जा रहे कार्यों की जानकारी देते हुए बताया कि आश्रम का यह 30 सदस्यीय दल अपने साथ 127 लोगों को लेकर आया जो कि हिन्दी भाषी राज्यों के रहने वाले हैं। इनमें से 70 लोगों के घरों व परिजनों का पता लगा लिया है। शेष के प्रयास जारी हैं। इस आश्रम में हिन्दू व मुस्लिम, ईसाई संप्रदाय के लोग भी सेवाभाव कार्य में लगे हुए हैं और इस दल में भी छह मुस्लिम, तीन ईसाई, दो बौद्ध धर्म एवं 19 लोग हिन्दू धर्म से संबंध रखते हैं। यह सभी लोग धर्म व जाति से ऊपर उठकर मानवता के इस कार्य में जुटे हुए हैं जो कि एक साम्प्रदायिक सौहार्द की मिसाल है।

लुपिन व मंजरी फाउंडेशन ने किया दल का स्वागत

तमिलनाडू से बिछड़े लोगों को परिजनों से मिलन कराने आए 30 सदस्यीय दल का भरतपुर की धरा पर लुपिन फाउण्डेशन एवं मंजरी फाउण्डेशन ने अभिनन्दन किया। सेवर स्थित सरसों अनुसंधान निदेशालय के सभागार कक्ष में अभिनन्दन कार्यक्रम निदेशालय के निदेशक डॉ. पीके राय के मुख्य आतिथ्य एवं लुपिन के अधिशाषी निदेशक सीताराम गुप्ता की अध्यक्षता में हुआ, जबकि विशिष्ठ अतिथि मंजरी फाउण्डेशन के अधिशाषी निदेशक संजय शर्मा व तमिलनाडू के अम्बू ज्योति आश्रम वल्लीपुरम के निदेशक जुबिन रहे। लुपिन के अधिशाषी निदेशक सीताराम गुप्ता ने कहा कि मानव सेवा ही विश्व की सबसे बड़ी सेवा है। ये सेवा महायज्ञों में होने वाली पूर्ण आहूति की तरह है। उन्होंने कहा कि बेसहारों को सहारा देना परमात्मा की सच्ची सेवा है। लुपिन फाउण्डेशन, मंजरी फाउण्डेशन और अम्बू ज्योति आश्रम मिलकर असहाय, दिव्यांग और जरुरतमंदों के लिए पूरे देश में कार्य करेंगे। कार्यक्रम में आश्रम के 30 सदस्यीय दलों का लुपिन व मंजरी फाउण्डेशन ने माला, श्रीफल, शॉल एवं स्मृति चिन्ह व कोविड बचाव सामग्री देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर लुपिन के कार्यक्रम प्रबंधक भीमसिंह ने आभार व्यक्त किया तथा मंच का संचालन कुम्हेर के सीडीपीओ महेन्द्र अवस्थी ने किया।