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पहले मौसम, अब लॉक डाउन से करोड़ों की फसल चौपट

जिले के बयाना व वैर इलाके में पान की फसल करने वाले किसान इन दिनों मायूस हैं।

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पहले मौसम, अब लॉक डाउन से करोड़ों की फसल चौपट

पहले मौसम, अब लॉक डाउन से करोड़ों की फसल चौपट

भरतपुर. जिले के बयाना व वैर इलाके में पान की फसल करने वाले किसान इन दिनों मायूस हैं। पहले बरसात ने उनकी फसल को खासा नुकसान पहुंचाया और अब लॉक डाउन की वजह से मण्डियां बंद होने से फसल नहीं बिक पा रही है। इससे किसानों को मोटा नुकसान उठाना पड़ सकता है। इस इलाका का पान मशहूर हैं और वह उत्तरप्रदेश, दिल्ली, हरियाणा समेत सरहद पार पाकिस्तान व बांग्लादेश तक निर्यात होता है। लगातार दो बार से फसल के हो रहे नुकसान से किसानों को संकट में डाल दिया है। गर्मी की वजह से इन दिनों फसल को बचाना किसानों के लिए ढेड़ी खीर साबित हो रहा है। उनका कहना है कि फसल जल्द मण्डी में नहीं पहुंची तो इलाके के काश्तकारों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। आपको बता दें बयाना व वैर क्षेत्र के 400 किसान यह फसल करते हैं और एक सीजन में करीब 10 से 12 करोड़ से अधिक का मुनाफा होता है।


पहले पाले व बरसात ने बिगाड़ दी थी फसल

बयाना इलाके में दिसम्ब व जनवरी माह में बरसात और पाले ने पानी की फसल को खासा नुकसान पहुंचाया था। गांव बागरैन के किसानों ने बताया कि बीते साल दिसम्बर और इस साल की शुरुआत जनवरी माह में सर्दी में भारी कोहरे व पाले से फसल बिगड़ गई थी। इससे इलाके में खरेरी, उमरै और खरबेरा में 350-400 किसानों की पान की फसल पूरी तरह से चौपट हो गई थी। उस समय किसानों को करीब 10 से 12 करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ा था। उसकी भरपाई किसान इस बार फसल से होने की उम्मीद जता रहे थे लेकिन इस बार लॉक डाउन ने उनका गणित बिगाड़ दिया। फसल के लिए किसान इस बार मध्य प्रदेश के मंदसौर से 500 रुपए के हिसाब से पान के पौधे लगाए थे, उनकी भी कीमत नहीं निकल पा रही है।


बयाना और वैर के पान की पहचान

बयाना व वैर के पान की पहचान देश ही नहीं विदेशों तक है। इस इलाके का पान उत्तरप्रदेश, दिल्ली, हरियाणा के अलावा पाकिस्तान, बांग्लादेश समेत खाड़ी देशों तक सप्लाई होता है। स्थानीय पानी देसी होने से अलग ही स्वाद और तीखापान की वजह से यह काफी लोकप्रिय है। इसी बदौलत इलाके का पान विदेशों में भी अपनी रंगत जमाए हुए हैं।


मंडियां खुले तो कुछ बंधे उम्मीद

किसानों का कहना है कि मण्डी खुले तो वह फसल की सप्लाई पहुंचा सके। लेकिन दिल्ली, आगरा, मथुरा और अलीगढ़ की पान की मंडियां कोरोना संक्रमण की रोकथाम के चलते इन दिनों बंद पड़ी हैं। मण्डियों नहीं खुलने से फसल को नुकसान पहुंच रहा है। ज्यादा दिन फसल को इस मौसम में सुरक्षित रखना मुश्किल है। किसानों का कहना है कि बीते तीन माह से फसल मण्डियों तक नहीं पहुंच पा रही है। इससे अब पान के पत्ते को नुकसान पहुंच रहा है। अगर कुछ दिन ऐसा ही रहा तो करोड़ों का नुकसान उठाना पड़ सकता है।

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