भरतपुर. राइट टू हेल्थ बिल के विरोध में बुधवार कोसरकारी चिकित्सकों का सामूहिक अवकाश रहा तो मरीज तिलमिला गए। हालांकि चिकित्सालय में इमरजेंसी व्यवस्थाएं सुचारू रूप से चलती दिखीं। वहीं हड़ताल की पूर्व सूचना के कारण बुधवार को मंगलवार की तुलना में काफी कम संख्या में आरबीएम चिकित्सालय पहुंचे।
राइट टू हेल्थ बिल का विरोध मरीजों की मुश्किल बड़ा रहा है। निजी अस्पताल अस्पताल के समर्थन में आरबीएम चिकित्सालय के चिकित्सकों की हड़ताल का खमियाजा मरीजों को भुगतना पड़ा। हड़ताल की सूचना पर हांलाकि मरीज कम ही आए लेकिन भटकते ही नजर आए। आरबीएम चिकित्सालय में आउटडोर में चिकित्सक 12 बजे तक नहीं आने से दूरदराज से आए मरीजों को इंतजार करना पड़ा। वहीं आउटडोर में एक -एक चिकित्सक ने राहत के छीटे दिए । आउटडोर में फिजीशियन में मरीज बारह बजे तक भटकते रहे। कई मरीज ग्यारह बजे तक हड़ताल समझकर इंतजार करते रहे। आरबीएम चिकित्सालय में इमरजेंसी सेवायें सुचारू रूप से चलती रहीं। लगभग यही हाल जनाना अस्पताल में था। चिकित्सालय में इमरजेंसी में भी मरीजों को देखा जा रहा था। आउटोर भी एक चिकित्सक के सहारे चल रहा था। बिल के विरोध मेें निजी चिकित्सालय में 19 मार्च से हड़ताल पर है। निजी डॉक्टरों की हड़ताल के कारण मरीजों को परेशानी हो रही है। निजी अस्पताल से मरीज मायूस लौट कर आरबीएम चिकित्सालय में अपना इलाज करा रहे हैं। इसमें सरकारी चिकित्सक भी निजी चिकित्साकों का समर्थन कर रहे हैं। इसमें कई सरकारी चिकित्सक भी निजी अस्पताल से जुड़े होना बताया जा रहा है।
स्ट्रेचर पर इंतजार
जनाना अस्पताल में आरबीएम चिकित्सालय के आउटडोर में नदबई से दिखाने आए मरीज 90 वर्षीय परमा ने बताया कि वह हाथ-पैर सुन्न होने पर समीप ही रखे स्ट्रेचर पर लेट कर इंतजार करता रहा। उसका कहना था कोई देखने वाला नहीं है और ना ही जबाव देने वाला है । चौबे के नगला से वर्षा अपनी मां गायत्री के सीने में दर्द होने को लेकर दिखाने आई लेकिन चिकित्सक नहीं होने से तीन घंटा इंतजार करना पड़ा।