
सरकारी सहारा, अब संवरेगा हमारे साहित्य का खजाना
भरतपुर . भरतपुर की विरासत में शुमार हमारे साहित्य और ज्ञान के खजाने को अब संजीवनी मिलेगी। श्री हिन्दी साहित्य समिति को अब सरकारी सहारा मिला है। इतिहास को अपने में समेटे हिन्दी साहित्य समिति के दिन अब बहुरने वाले हैं। कर्मचारियों की तनख्वाह का भुगतान नहीं होने से यह समिति नीलामी के कगार पर पहुंच गई थी। पत्रिका की पहल पर मुख्यमंत्री ने इस 'ज्ञान के भंडार को सहेजने के लिए 5 करोड़ रुपए का बजट दिया है।
राज्य सरकार की ओर से बुधवार को पेश किए गए बजट में समिति को खासी तवज्जो दी गई। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बजट पेश करते हुए कहा कि भरतपुर स्थित श्री हिन्दी साहित्य समिति का पुस्तकालय अपने आप में अनूठा है। वर्तमान परिस्थति में इसका संरक्षण एवं संवद्र्धन आवश्यक हो गया है। मैंने वर्ष 2013-14 के बजट में 50 लाख रुपए का अनुदान इस संस्था के लिए स्वीकृत किया था। अब मैं इस पुस्कालय को सरकारी संरक्षण में लेते हुए संवद्र्धन के साथ-साथ आधुनिकीकरण के लिए 5 करोड़ रुपए अनुदान दिया जाना प्रस्तावित करता हूं। उल्लेखनीय है कि समिति की दुर्दशा को लेकर पत्रिका ने 7 जनवरी के अंक में '4 मंत्रियों को नहीं भान, नीलामी के कगार पर ज्ञानÓ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। खबर में बताया था कि बरसों-बरस से ज्ञान से लोगों को लाभान्वित करने वाली समिति अब सिसकती नजर आ रही है। इसकी वजह यह है कि पहले समिति को राज्य सरकार की ओर से शिक्षा विभाग के तहत करीब 80 प्रतिशत अनुदान मिलता था, जो वर्ष 2003 में बंद कर दिया गया। इसके बाद समिति भाषा एवं पुस्तकालय विभाग में मर्ज हो गई और यहां काम करने वाले कर्मचारियों का वर्ष 2010 में समायोजन कर दिया गया, लेकिन यहां कार्यरत लाइब्रेरियन दाऊदयाल शर्मा एवं क्लर्क त्रिलोकीनाथ शर्मा का समायोजन नहीं हो सका। ऐसे में सरकारी कार्मिक के लिहाज से इनके वेतन एवं भत्ते बढ़ते गए और अगस्त 2019 तक इनका वेतन करीब 1 करोड़ 11 लाख 73 हजार 13 रुपए बकाया रह गया, जो अब डेढ़ करोड़ रुपए से ज्यादा हो गया है। इन दोनों कार्मिकों के न्यायालय की शरण लेने के बाद कोर्ट ने इनका बकाया दिलाने के लिए हिन्दी साहित्य समिति भवन की नीलामी का नोटिस जारी कर दिया। इसके बाद समिति की नीलाम को बचाने के लिए लोगों ने गुहार लगाई। पत्रिका की पहल पर लोगों ने इस संबंध में सीएम को पत्र भी लिखे।
पत्रिका की पहल पर शुरू हुई कवायद
पत्रिका में जनवरी माह में खबर प्रकाशित होने के बाद इस ज्ञान के भंडार को बचाने की कवायद तेज हुई है। खास तौर से जिले के दो मंत्री इसे बचाने की मुहिम में आगे आए। बजट में पांच करोड़ रुपए मिलने के बाद अब उम्मीद है कि कर्मचारियों के पैसे का भुगतान हो जाएगा। इससे नीलामी की लटक रही तलवार का संकट भी टल जाएगा। अब यह समिति फिर से लोगों को ज्ञान बांटने का काम कर सकेगी।
कलक्टर ने भी भेजी रिपोर्ट
पत्रिका में प्रकाशित खबर और लोगों की ओर से दिए ज्ञापन के बाद कुछ दिन पूर्व जिला कलक्टर आलोक रंजन ने समिति का दौरा किया था। उन्होंने सभी तथ्यों को बारीकी से समझा। कलक्टर ने यहां दुर्लभ पुस्तकों को भी सराहा। राज्य सरकार की ओर से मांगी गई रिपोर्ट को जिला कलक्टर की ओर से भेजा गया। इसके बाद बजट में समिति को पैसा मिला है।
अब डिजिटल होगा हमारा खजाना
कर्मचारियों का पैसा देने के लिए न्यायालय की ओर से नोटिस जारी करने के बाद समिति पर नीलामी की तलवार लटकी थी, लेकिन न्यायालय सिर्फ भवन की नीलामी करेगा। ऐसे में इस ज्ञान के खजाने का क्या होगा। इसको लेकर भी मंथन हुआ। सीएम ने अब समिति का आधुनिकीकरण करने की बात कही है। इसमें साहित्य अब डिजिटल रूप से संवरने की उम्मीद जगी है।
तो यूं हो सकती है बचत
अनुदान बंद होने के बाद समिति आर्थिक तंगी से जूझ रही है। आमदनी का कोई स्रोत नहीं होने के कारण इसकी नौबत यहां तक पहुंची है। यदि बिजली के लिए यहां सौर ऊर्जा का प्लांट लगा दिया जाए तो समिति पर आर्थिक भार नहीं पड़ेगा। यदि यहां बिजली का अतिरिक्त उत्पादन हुआ तो समिति को इससे अन्यत्र लाभ भी हो सकता है।
Published on:
24 Feb 2022 04:05 pm
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