सेहत की रखवाली को आयुर्वेद के सहारे सरकार

-घर-घर औषधि योजना के तहत बांटे जाएंगे पौधे, इस वर्ष बांटे जाएंगे 65 हजार पौधे

By: Meghshyam Parashar

Published: 27 Jun 2021, 09:01 AM IST

भरतपुर . कोरोना काल में मौत से जूझती जिंदगियों की तड़प देख चुकी सरकार अब सेहत की रखवाली के लिए आयुर्वेद के पुराने नुस्खे अपनाने की राह पर है। इसके लिए वन विभाग की ओर से घर-घर औषधि योजना शुरू कर औषधीय पौधों की पौधशालाएं खोलकर तुलसी, गिलोय, अश्वगंधा व कालमेघ आदि के पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे लोग इनकी महत्ता जानकार अपनी सेहत को तंदरुस्त रख सकें।
राज्य सरकार ने इस योजना के लिए कुल 210 करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत किया है। वर्ष 2021-22 के लिए 31.40 करोड़ का वित्तीय बजट आवंटित किया है। योजना के क्रियान्वयन के लिए वन विभाग नोडल विभाग होगा। यह योजना वर्ष 2021-22 से 2025-26 के लिए लागू की जा रही है। इन पांच वर्षों में करीब 1 करोड़ 26 लाख परिवारों को लाभान्वित किया जाना तय किया है। प्रत्येक परिवार को चार प्रकार की औषधीय प्रजातियों तुलसी, गिलोय, अश्वगंधा एवं कालमेघ के दो-दो पौधे अर्थात कुल 8 पौधे थैलियों में इस वर्ष सहित कुल पांच वर्षों में तीन बार वन विभाग की पौधशालाओं से निशुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे।


लोगों के स्वास्थ्य पर फोकस

सरकार इस योजना को लागू करने के पीछे लोगों का स्वास्थ्य बेहतर करने की मंशा बता रही है। वन विभाग के अनुसार राजस्थान के वनों एवं वनों के बाहर हरियाली वाले क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार की औषधीय प्रजातियों की उपलब्धता रही है, जिनका प्रयोग आदिकाल से आयुर्वेद तथा परंपरागत ज्ञान के अनुरूप स्वास्थ्य रक्षण एवं चिकित्सा के लिए होता आया है। वर्तमान परिस्थतियों में जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण एवं जीवनशैली में परिवर्तन जैसे कारणों से स्थानीय लोग अनेक प्रकार के रोगों से ग्रसित रहते हैं। आयुर्वेद तथा परंपरागत ज्ञान व वनों में उपलब्ध औषधियों को लोगों के घरों, खेतों और निजी जमीनों के समीप उगाने के लिए सहायता करने से स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य में सुधार करना इसका मुख्य ध्येय है।

योजना के उद्देश्य

- औषधीय पौधों को उगाने के इच्छुक परिवारों को स्वास्थ्य रक्षण के लिए बहुउपयोगी औषधीय पौधे वन विभाग की पौधशालाओं में उपलब्ध कराया जाना।

- मानव स्वास्थ्य रक्षण और व्याधिक्षमत्व (इम्युनिटी) बढ़ाने तथा चिकित्सा के लिए बहुउपयोगी औषधीय पौधों की उपयोगिता के बारे में व्यापक प्रचार-प्रसार करते हुए जन चेतना का विस्तार करने।

- औषधीय पौधों के प्राथमिक उपयोग तथा संरक्षण-संवद्र्धन के लिए आयुर्वेद एवं भारतीय चिकित्सा विभाग के सहयोग से प्रमाण आधारित जानकारी उपलब्ध कराना।

- जिला प्रशासन, वन विभाग के नेतृत्व में जनप्रतिनिधियों, पंचायती राज संस्थाओं विभिन्न राजकीय विभागों व संस्थानों, विद्यालयों और औद्योगिक घरानों आदि का सहयोग लेकर जन अभियान के रूप में क्रियान्वित करना।


इस वर्ष वितरण होने वाले पौधे
नीम 8000
जामुन 4000
बोटल ब्रश 1000
गूलर 500
बड़ 400
बेलपत्र 600
कचनार 200
करंज 1800
कदम्ब 3000
हैज 6000
चांदनी 1000
हिमेलिया 600
दिन का राजा 100
हरसिंगार 100
शीशम 2000
गुडहल 3500
शहतूत 2000
नागदोन 15000
पाखर 1000
अशोक 500
गुलदाऊदी 1300
रामबाण 1000
ग्वारपाठा 1000
अमरूद 1800
अर्जुन 200
चम्पा 500
लाल कनेर 2000
आम 1000
पारस पीपल 200

इनका कहना है

योजना के तहत एक परिवार को आठ पौधे देने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए चार लाख पौधे तैयार किए जा रहे हैं। इस वर्ष 65 हजार पौधे बांटने का लक्ष्य रखा है।

- पवन कुमार यादव, रेंजर भरतपुर रेंज

Meghshyam Parashar Bureau Incharge
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