20 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

खाकी के खौफ को चुनौती, 100 किमी में दौड़ रहे बजरी के वाहन

- प्रतिबंध की खिल्ली उड़ा रहे बजरी माफिया- दो जिलों की सीमा में खुलेआम हो रहा प्रतिबंधित बजरी का परिवहन

3 min read
Google source verification
खाकी के खौफ को चुनौती, 100 किमी में दौड़ रहे बजरी के वाहन

खाकी के खौफ को चुनौती, 100 किमी में दौड़ रहे बजरी के वाहन

भरतपुर . बागी, बजरी और बंदूक के लिए बदनामी झेलने वाले धौलपुर में बागियों की बादशाहत पर अंकुश लगने के बाद बंदूक की गोलियों की गंूज भले ही थमी हो, लेकिन बजरी का परिवहन पुलिस की तमाम निगेहबानी को अभी भी बड़ी चुनौती दे रहा है। दो जिलों के साथ दो राज्यों की पुलिस भी इस पर अंकुश लगाने में विफल नजर आ रही है। प्रतिदिन 100 किमी की सीमा में खनन माफिया के ट्रैक्टर-ट्रॉली बेखौफ दौड़ रहे हैं, लेकिन खनिज विभाग का मौन टूटने का नाम नहीं ले रहा।
धौलपुर से भरतपुर तक हर रोज सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्रॉली तेज रफ्तार में पुलिस के दावों की धज्जियां उड़ाते हुए भरतपुर तक पहुंच रहे हैं। इस बीच इनका सामना कई पुलिस थानों एवं चौकियों से हो रहा है, लेकिन इन पर लगाम नहीं पा रही। यह बजरी धौलपुर से रूपवास होते हुए ग्रामीण इलाकों के रास्ते भरतपुर शहर में कुछ स्थानों पर खुलेआम सप्लाई हो रही है। खास बात यह है कि आगरा-जयपुर हाइवे स्थित बिल्डिंग मैटेरियल की दुकानों के साथ शहर के अन्य हिस्सों में यह बजरी खुले तौर पर देखी जा रही है। इन दुकानों पर पहले अवैध बजरी तड़के पहुंचती थी, लेकिन अब तो दिनदहाड़े ट्रैक्टर यहां बजरी लेकर पहुंच रहे हैं। बजरी माफिया धौलपुर के सदर थाना क्षेत्र की पचगांव चौकी, सैंपऊ थाना, उत्तरप्रदेश के सरैंधी थाना, भरतपुर के रूपवास थाना, गहनौली मोड़ पुलिस चौकी, ऊंचा नगला पुलिस चौकी एवं शहर में सारस पुलिस चौकी से होकर निकलते हैं। इसके बाद यह पुलिस अधीक्षक कार्यालय, पुलिस लाइन एवं सर्किट हाउस के पास से गुजरते हैं। इस दौरान थाना मथुरा गेट एवं चिकसाना पुलिस का इलाका आता है, लेकिन इन पर प्रतिबंध तो दूर पुलिस इन्हें टोकने तक की जहमत नहीं उठाती।

कार भी चलती है आगे

अवैध बजरी सप्लाई की चैन में धौलपुर से रूपवास और भरतपुर का पूरा नेटवर्क जुड़ा हुआ है। यह तड़के ही धौलपुर से चल देते हैं। इन ट्रैक्टरों के आगे पुलिस की कुछ सख्ती होने पर एक कार चलती नजर आती है, जो उन्हें पुलिस के होने और नहीं होने संबंधी जानकारी मुहैया कराती रहती है। बजरी खाली हो जाने के बाद यह आसानी से निकल जाते हैं। धौलपुर से अवैध बजरी का परिवहन सैंपऊ होते हुए रूपवास इलाके से होता है। यहां से स्थानीय बजरी माफिया के नेटवर्क से जुड़े कुछ लोग ग्रामीण क्षेत्रों से ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को निकलवाते हैं। तड़के ज्यादातर बजरी माफिया ऊंचा नगला तक मुख्य रास्ते से बजरी लेकर आते हैं। इसके बाद आसपास के गांव में बजरी लदे ट्रैक्टर-ट्रॉली खड़े हो जाते हैं। इसके बाद भरतपुर में नेटवर्क के जुड़े लोग बजरी को अलग-अलग जगह पर खाली कराते हैं। उल्लेखनीय है कि पूर्व में सेवर पुलिस ने बजरी के अवैध परिवहन से जुड़े एक आरोपी को गिरफ्तार किया था। इसमें खुलासा हुआ था कि इस व्यक्ति आगरा व मथुरा तक अवैध बजरी की सप्लाई करवाता था।

जिम्मेदारी खनिज विभाग की, बदनामी झेल रही पुलिस

चम्बल नदी से बजरी निकालने पर पूरी तरह प्रतिबंध है। इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने आदेश भी जारी कर रखे हैं। इसके बाद भी यह बेखौफ निकल रही है और शहर तक पहुंच रही है। खास बात यह है कि बजरी रोकने की पहली जिम्मेदारी खनिज विभाग की है। इसके बाद भी इसमें सबसे ज्यादा फजीहत पुलिस को झेलनी पड़ रही है। खास बात यह है कि पुलिस अवैध बजरी व खनन सामग्री में कार्रवाई के लिए खनिज विभाग को जिम्मेदार बताती है। वहीं ख्निज विभाग के अधिकारी जाब्ता नहीं होने का रोना रोते हुए कार्रवाई करने से कतराते रहते हैं। दोनों विभागों की इसी ढिलमुल रवैये का फायदा बजरी माफिया उठा रहे हैं। खनन माफियाओं के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि वह खनन विभाग कार्यालय के सामने से अवैध खनिज सामग्री लदे वाहन आसानी से निकलते हैं। इसके बाद भी इन पर कार्रवाई नहीं होती। कई बार ऐसे वाहनों को पुलिस पकड़ लेती है। पकड़े वाहनों की सुपुर्दगी के बाद खनन विभाग जुर्माना वसूलकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर लेता है।