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ऐतिहासिक गंगा मंदिर…छत से टपक रहा कमीशनखोरी का पानी

-177 साल पुराने ऐतिहासिक गंगा मंदिर का ऐसा हाल-पिछले तीन साल से छत से हर बारिश में टपकता है पानी

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ऐतिहासिक गंगा मंदिर...छत से टपक रहा कमीशनखोरी का पानी

ऐतिहासिक गंगा मंदिर...छत से टपक रहा कमीशनखोरी का पानी

भरतपुर. श्रद्धालुओं के कष्टों का निवारण करने वाले मां गंगा के मंदिर के खुद के कष्टों का निवारण देवस्थान विभाग नहीं कर पा रहा है। लाखों रुपए का बजट खर्च करने के बाद मंदिर की छत से लापरवाही का पानी बह रहा है। कमीशनखोरी के बीच अधिकारियों ने ठेकेदार को भुगतान भी कर दिया, लेकिन कार्य का भौतिक सत्यापन तक कराना उचित नहीं समझा। अब छत से टपक रहे पानी के कारण दर्शनों का आ रहे श्रद्धालु घायल हो रहे हैं। रियासत कालीन ऐतिहासिक गंगा मंदिर की बदहाली का आलम यह है कि बीते तीन वर्ष से मंदिर परिसर की छत टपक रही है। आकाशीय बिजली से बचाने के लिए लगाया गया तडि़त चालक भी बीते कई वर्षों से टूटा पड़ा है। जानकारी के अनुसार साल 2019 में देवस्थान विभाग और पुरातत्व विभाग की ओर से लाखों रुपए खर्च कर मंदिर के जीर्णोद्धार के तहत छत का पुनर्निर्माण कराया गया, लेकिन जब से मंदिर में जीर्णोद्धार का कार्य किया गया है तभी से ऐतिहासिक मंदिर के प्रांगण की छत टपक रही है। गंगा मंदिर के पूरे प्रांगण में मंदिर की छत टपक रही बीते तीन सालों से मंदिर की छत में बरसात के मौसम में सीलन आ जाती है और पूरे प्रांगण में पानी टपकता रहता है। इससे श्रद्धालुओं को भी काफी परेशानी होती है। इससे ऐतिहासिक मंदिर को भी नुकसान पहुंच रहा है।
ऐतिहासिक गंगा मंदिर को आकाशीय बिजली से बचाने के लिए निर्माण के समय ही मंदिर के शिखर पर तडि़त चालक लगाया गया था, लेकिन अब मंदिर के शिखर का तडि़त चालक मुड़ा हुआ है और उसका करीब आधा भाग गायब है। गंगा मंदिर आज की तारीख में आकाशीय बिजली से भी सुरक्षित नहीं है। देवस्थान विभाग की ओर से रात के वक्त मंदिर के भवन पर सजावटी रोशनी करने के लिए विभाग की ओर से चारों ओर छतरियों में बिजली की बड़ी-बड़ी लाइटें लगवाई, लेकिन देखभाल और रख-रखाव के अभाव में ये कीमती लाइटें भी टूट कर बर्बाद हो चुकी हैं। चोरी हुई पीतल की क्लिप मंदिर भवन के निर्माण के समय कारीगरों ने मंदिर के पत्थरों और दीवारों को मजबूती प्रदान करने के लिए पीतल की मजबूत क्लिपों से जोड़ा था। इससे दीवारों के पत्थर आपस में जुड़े रहते थे, लेकिन असमाजिक तत्व इन क्लिपों को तोड़कर ले गए।

ऐतिहासिक महत्व

महाराजा बलवंत सिंह को संतान नहीं होने पर पंडितों ने उन्हें मां गंगा की आराधना करने के लिए कहा था। मां गंगा की हरिद्वार में पूजा अर्चना के कुछ समय बाद उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। पुत्र प्राप्ति के बाद भरतपुर के महाराजा बलवंत सिंह ने वर्ष 1845 में गंगा मंदिर की नींव रखी, इसका निर्माण करीब 90 साल में पूरा हुआ। सन 1937 में महाराज सवाई बृजेंद्र सिंह ने गंगा मैया की मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा कराई।

अफसरों ने एक बार जाकर तक नहीं देखा

देवस्थान विभाग ने मंदिर का जीर्णोद्धार कार्य पुरातत्व विभाग के माध्यम से कराया, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि कमीशनखोरी व कथित भ्रष्टाचार के कारण ठेकेदार ने मनमानी से काम किया। लाखों रुपए का बजट व्यय होने के बाद भी गंगा मंदिर की छत से पानी टपक रहा है। सबकुछ जानकारी के बाद भी देवस्थान विभाग के अधिकारी कुंभकर्णी नींद में सोते रहे। जनप्रतिनिधियों ने कभी एक बार जांच कराना तक उचित नहीं समझा। ऐसे में संभव है कि लापरवाही हर स्तर पर बरती गई। इसका खामियाजा शहर के श्रद्धालुओं को भुगतना पड़ रहा है।