
आरजीएचएस : मेडिकल की दुकानों पर चल रहे हॉस्पिटल, उठा रहे फर्जी बिल
भरतपुर . सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स को मुफ्त में दवा उपलब्ध कराने को शुरू की गई आरजीएचएस योजना घोटालों की योजना बनती जा रही है। मंगलवार को शहर में आरजीएचएस प्रशासन ने एक हॉस्पिटल एवं एक क्लीनिक पर कार्रवाई की तो यहां बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया। सरकारी चिकित्सक खुलेआम हॉस्पिटल चलाकर ज्यादातर मरीजों को एक ही तरह के इंजेक्शन लगाकर बड़े-बड़े बिल उठा रहे हैं। वहीं एक चिकित्सक सरकारी के ड्यूटी करने के साथ दो जगह क्लीनिक चलाने की बात सामने आई।
आरजीएचएस के संयुक्त परियोजना निदेशक सुरेशचंद मीणा के नेतृत्व में मंगलवार को टीम औचक निरीक्षण के लिए हाइवे पर स्थित बालाजी हॉस्पिटल पहुंची। यहां पहचान संबंधी कोई बोर्ड नहीं लगा था। यहां एक ही चिकित्सक के 99 प्रतिशत पर्चे थे, जिन पर डॉ. राजवीर सिंह के हस्ताक्षर मिले। डॉ. सिंह आरबीएम अस्पताल में हड्डी रोग विशेषज्ञ हैं। यहां ज्यादातर मरीजों को एक ही इंजेक्शन लगाने की बात सामने आई। इनके बड़ी-बड़ी राशि के बिल लगाए जा रहे थे। दवा देने को यहां फार्मासिस्ट नहीं मिला। इस अस्पताल के ऑनर भी डॉ. राजवीर सिंह बताए गए हैं। खास बात यह है कि आरजीएचएस के बिल पर संबंधित कर्मचारी के हस्ताक्षर होने के साथ मोबाइल नंबर लिखने होते हैं, जो यहां किसी भी बिल पर नहीं मिले। ओपीडी का रजिस्टर यहां ठीक नहीं मिला। बिल की रसीदों पर कुछ ऐसा लिखा मिला, जो पढऩे में भी नहीं आया। टीम की पूछताछ पर यहां मिले कार्मिकों ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया। जयपुर से पहुंची आरजीएचएस की टीम ने बालाजी हॉस्पिटल के अलावा कृष्णा नगर स्थित रश्मि मेडिकल एवं जनरल स्टोर का भी निरीक्षण किया। यहां क्लीनिक भी संचालित होता मिला। यहां डॉ. दौलतराम धाकड़ के नाम से पर्चे मिले। टीम ने बताया कि डॉ. दौलतराम धाकड़ बयाना के सरकारी अस्पताल में चर्म रोग विशेषज्ञ हैं। टीम को इस बात पर हैरानी हुई कि बिना अनुमति के चिकित्सक मुख्यालय नहीं छोड़ सकते। ऐसे में डॉ. धाकड़ के बहुतेरे पर्चे यहां कैसे मिले। सूत्रों ने दावा किया कि डॉ. धाकड़ बयाना में भी एक क्लीनिक संचालित करते हैं। टीम ने इस बात पर भी आश्चर्य जाहिर किया कि सरकारी सेवा में रहते हुए चिकित्सक दो-दो क्लीनिक संचालित कर रहा है, जबकि चिकित्सा विभाग के अधिकारी हाथ पर हाथ रखे बैठे हैं। मेडिकल स्टोर से टीम को रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं कराया गया। जयपुर से आई टीम में संयुक्त परियोजना निदेशक मीणा के साथ गौरव कुमार संयुक्त निदेशक, अजय कुमार बंसल सहायक प्रोग्रामर एवं लक्ष्मण प्रसाद वरिष्ठ सहायक आदि मौजूद रहे। उल्लेखनीय है कि 27 जुलाई को भी सतर्कता दल की ओर से शहर में आरजीएचएस में धांधलेबाजी को लेकर निरीक्षण किया गया था।
मिलीभगत से चल रहा फर्जीवाड़े का खेल
जयपुर से आई टीम ने आशंका जाहिर है कि चिकित्सक एवं कर्मचारी मिलीभगत कर राजकोष को खासा नुकसान पहुंचा रहे हैं। टीम ने बताया कि अब ऐसे कर्मचारियों को चिह्नित करने का काम शुरू कर दिया गया है। इनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। टीम ने बताया कि कुछ चिकित्सक एवं कर्मचारी फर्जी तरीके से बिल बनाकर राजकोष को चपत लगा रहे हैं। इन्हें जल्द चिह्नित कर कार्रवाई की जाएगी।
ऐसे चल रहा फर्जीवाड़े का खेल
आरजीएचएस टीम के निरीक्षण में सामने आया है कि कुछ मेडिकल स्टोर एवं हॉस्पिटलों में दवाओं का पूरा बिल बनवाकर ज्यादातर राशि का अन्य सामान लिया जा रहा है। इसमें कर्मचारी और चिकित्सक दोनों की मिलीभगत है। इस संबंध में सरकार के पास हजारों शिकायत पहुंची हैं। इसको लेकर अब टीम सक्रिय हो गई है।
- 135 मेडिकल स्टोर जिलेभर में अनुमोदित
- 20 हजार की दवा एक पेंशनर्स को
- 30 दिन की दवा ले सकते हैं एक बार में
- 12 अगस्त को एक दवा विक्रेता के खिलाफ दर्ज हुआ था मामला
- 27 जुलाई को सतर्कता दल ने किया था निरीक्षण
- 50 प्रतिशत राशि का किया जा रहा घोटाला
Published on:
31 Aug 2022 01:29 pm
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