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दोहरी मार: फसल को 33 फीसदी नुकसान नहीं तो मुआवजा भी नहीं

असमंजस में किसान, फसल खराबी के मुआवजे में सरकार की दोहरी नीति

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दोहरी मार: फसल को 33 फीसदी नुकसान नहीं तो मुआवजा भी नहीं

दोहरी मार: फसल को 33 फीसदी नुकसान नहीं तो मुआवजा भी नहीं

भरतपुर. रबी सीजन हो या फिर खरीफ का सीजन। हर सीजन में किसान को मौसम की मार झेलनी पड़ती है। कभी बेमौसम बारिश, ओले व अतिवृष्टि तो कभी सूखे की समस्या के चलते फसल चौपट हो जाती है। इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ है। गेहूं, सरसों और चने की फसल की कटाई का समय आया तो कहीं ओले एवं कहीं तेज हवा के साथ बेमौसम बारिश के कारण फसलों को नुकसान हुआ है। लेकिन सरकार की फसल खराबी के मुआवजे में भी दोहरी नीति के कारण किसान असमंजस में हैं। क्योंकि 33 प्रतिशत से कम नुकसान पर सरकार की ओर से कोई मुआवजा नहीं मिलता है। ऐसें में किसानों की स्थिति दयनीय बनी हुई है।

जानकारी के अनुसार फसल खराबी के मामले में सरकार की दोहरी नीति के चलते किसान असमंजस में हैं। सरकार की नीति के अनुसार अतिवृष्टि, ओले या सूखे के कारण यदि फसल में 33 प्रतिशत से अधिक नुकसान हुआ है तो ही किसान मुआवजे का हकदार है। लेकिन उससे कम नुकसान वाले किसान मुआवजे के हकदार नहीं है। ऐसे में किसानों को तो मौसम की मार झेलनी ही पड़ती है। सरकार की इस नीति के कारण जिले के अनेक किसानों की आर्थिक स्थिति प्रभावित होगी।

तहसीलदार का कहना

सरकार की नीति के अनुसार 33 प्रतिशत से कम फसल खराब हुई है तो उन किसानों को मुआवजा नहीं मिलेगा, लेकिन जिन फसलों का बीमा हो रहा है, उन्हें पूरी फसल का मुआवजा मिलेगा, फिर चाहे वह 33 प्रतिशत से कम ही नुकसान हुआ है। उन्हें मुआवजा फसल कटाई प्रयोग के आधार पर पिछले पांच वर्षों की पैदावार के आधार पर औसत निकालकर दिया जाता है।

-ताराचंद सैनी, तहसीलदार, भरतपुर

30 प्रतिशत गेहूं की हो चुकी कटाई

जिले में सरसों की बुवाई करीब 2.62 लाख हैक्टेयर में की गई थी, जिसकी 100 प्रतिशत कटाई हो चुकी है। जबकि गेहूं की कटाई अभी जारी है। अभी तक सिर्फ 25-30 प्रतिशत ही गेहूं की कटाई हुई है। जो भी अभी ज्यादातर खेतों में ही पड़ा है। ऐसे में बेमौसम बारिश से गेहूं को और ज्यादा नुकसान होने की संभावना है।

-देशराज सिंह, अतिरिक्त निदेशक, कृषि विभाग।

किसानों का कहना

सरकार की ओर से 33 प्रतिशत से कम फसल की खराबी वाले किसानों को मुआवजा ना देना क्षेत्र के अधिकांश किसानों के हितो पर कुठाराघात है। सरकार का यह निर्णय अधिकांश छोटे किसानों के लिए कोढ़ में खाज का काम करेगा। किसानों की इस पीड़ा को समझते हुए जिम्मेदारों को आगे आकर ऐसे दोहरे मापदंडों में बदलाव करवाना चाहिए।

-राजेश गुर्जर, किसान, ईसापुर कटारा।

कामां क्षेत्र में बेमौसम बरसात से किसानों की फसल खराब हो गई है और गेहूं का दाना काला पड़ गया है। ऐसे में किसानो की मेहनत पर पानी फिर गया है। राज्य सरकार को बेमौसम बरसात से जो फसल में नुकसान हुआ है उसका मुआवजा दिलाना चाहिए।

-दानी ठाकुर, निवासी कनवाड़ी

बेमौसम बरसात से सरसों की फसल में 20 से 30 प्रतिशत नुकसान हुआ है और गेहूं की फसल बिलकुल लेट गई है। किसान अपनी फसल को देखकर मायूस है। ऐसे में 33 प्रतिशत के नियम से किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ेगा। राज्य सरकार को सभी को मुआवजा देना चाहिए।

-बाज खा ,निवासी अकाता

जहां-जहां बेमौसम बरसात से फसल में नुकसान हुआ है वहां गिरदावरी कराकर राज्य सरकार को मुआवजा दिलाना चाहिए। गेहूं व सरसों की फसल में करीब 20 से 30 प्रतिशत नुकसान हुआ है।

-सुरेश शर्मा, निवासी कामां