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सरकारी भवनों के निर्माण में हो रहा संरक्षित वन क्षेत्र के अवैध पत्थर का उपयोग

-बाबा हरिबोलदास ने लगाया अधिकारी, पुलिस व राजनेताओं पर संरक्षण देने का आरोप

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सरकारी भवनों के निर्माण में हो रहा संरक्षित वन क्षेत्र के अवैध पत्थर का उपयोग

सरकारी भवनों के निर्माण में हो रहा संरक्षित वन क्षेत्र के अवैध पत्थर का उपयोग

भरतपुर/पहाड़ी. कामां बृजांचल के प्रतिबंधित संरक्षित वन क्षेत्र में श्रीकृष्ण क्रीडा स्थली के पर्वतों के अवैध खनन का पत्थर सरकारी भवनों के नव निर्माण के उपयोग में लिया जा रहा है। भैसेड़ा लघु गिर्राज पर्वत पर स्थित आश्रम के महंत बाबा हरिबोलदास ने बताया कि बृज क्षेत्र के पहाड़ों का दौरा करने पर सामने आया है कि वन विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत से कामां बृजांचल के प्रतिबंधित पहाड़ों में अवैध खनन रुकने का नाम नहीं ले रहा है। इसको लेकर गत दिनों संभागीय आयुक्त एवं जिला कलेक्टर से दूरभाष पर बातचीत कर अवगत करा दिया गया। उसके बाद भी प्रतिबंधित पहाड़ों का खनन रुकने का नाम नहीं ले रहा है। चोरी से आए पत्थर को ठेकेदार सरकारी नवनिर्मित भवनो के उपयोग में ले रहा है। इसकी जानकारी सरकारी निर्माण एजेंसी के अधिकारियों को है। इसकी शिकायत संबंधित अधिकारी को खनन से जुड़े लोग कर चुके है। उसके बाद भी उन्हें रोका नहीं जा रहा है। उन्होंने दावा किया है कि यदि पूर्व व वर्तमान में भवनों के निर्माण में उपयोग के पत्थर की जांच कराई जाए तो मिलान करने पर पत्थर प्रतिबंधित वन क्षेत्र का पाया जाएगा। उनका आरोप है कि यह सब स्थानीय राजनेताओं व विभाग के अधिकारियों के इशारे पर चहेतों से कराया जा रहा है। कुछ पत्थर पूर्व में चोरी से इक_ा किया गया जो पुराना व नया पत्थर ठेकेदारों के पास बिना बिल रवन्ना के चोरी से पहुंच रहा है।

यहां हो रहा है संरक्षित वन क्षेत्र में अवैध खनन

वन संरक्षित खनन प्रतिबंधित क्षेत्र के पहाड़ों में चरण पहाड़ी, अंगरावली, फतेहपुर विलंग, गढाजान, टायरा, अकबरपुर, लेवड़ा, कनवाडी मुल्लाका, भूराका, सुन्हेरा के पहाड़ों मे धड़ल्ले से अवैध खनन हो रहा है। टेन्डर छोडऩे वाली एजेन्सी ठेकेदार से शर्तो में यह बाध्य नहीं करती है वह किस पहाड का पत्थर, किस मार्का की ईट, सीमेन्ट उपयोग में लेगा। इसलिए खनन माफिया सांठगाठ कर चोरी के पत्थर को बेचने में जुटा हुआ है, ऐसा नहीं है कि निर्माण विभाग के अधिकारियों को पता नहीं है।