In the third week of February itself….Geyser off, AC on!
-30 डिग्री सेल्सियस से अधिक हुआ तापमान, न्यूनतम तापमान भी पहुंचा दहाई में
-फरवरी में पड़ रही मार्च के अंतिम सप्ताह जैसी गर्मी
भरतपुर. बदलते वेदर कंडीशन का ही असर है कि फरवरी (Faburary) में मार्च (march) के अंतिम सप्ताह जैसी गर्मी (summer) पड़ रही है। रविवार (sunday) को अधिकतम पारा 30 डिग्री पार जा पहुंचा वहीं न्यूनतम पारा भी दहाई में आ गया। इससे सुबह से चढ़ता पारा दोपहर को तेज धूप के साथ सताने लगा है।
इधर दिन और रात का तापमान बढऩे से किसानों की चिंता भी बढ़ गई है। कारण यह है कि बढ़ता हुआ तापमान फ सलों पर प्रभाव डालेगा। गेहूं की फसल इस समय फू ल की अवस्था पर है। तापमान अधिक होने की वजह से दाना सिकुड़ सकता है, जिससे उसके उत्पादन पर भी असर पड़ेगा। रविवार को दिन का तापमान 30.5 डिग्री सेल्सियस पर दर्ज किया गया। जबकि रात का तापमान 10.7 डिग्री सेल्सियस पर दर्ज किया है।
भीषण गर्मी अप्रेल से ही!
जलवायु परिवर्तन के चलते फरवरी में ही मार्च जैसी गर्मी पडऩी शुरू हो गई है। फरवरी में बढ़ते तापमान को देखते हुए ये माना जा रहा है कि अप्रैल से जून के बीच भीषण गर्मी पड़ सकती है।
सुबह से सता रही धूप
पूर्वानुमान के अनुसार अभी बादल होने की संभावना नहीं दिख रही है। सुबह से ही कड़ी धूप होने के आसार बने हुए हैं। सोमवार को भी सुबह दिन उगने के साथ ही सूरज ने तेजी पकडऩा शुरू कर दिया था।
औसम तापमान से 4 डिग्री अधिक तापमान
मौसम विभाग की मानें तो साल के दूसरे महीने यानी फरवरी में आमतौर पर अधिकतम तापमान 26-27 डिग्री सेल्सियस रहता है। लेकिन मौसम में परिवर्तन की वजह से इस बार तापमान में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। उन्होंने बताया कि पिछले दो तीन साल में 20 फ रवरी से पहले इस महीने में इतना पारा कभी नहीं बढ़ा है।
मार्च में होता है इस तरह का तापमान
बढ़ते तापमान से लोगों की परेशानी तो बढ़ेगी ही फसलों को नुकसान भी हो सकता है। दरअसल, 30 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पारा आमतौर पर मार्च के अंतिम सप्ताह और अप्रेल के पहले सप्ताह के बीच होता रहा है।