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ना गोलियों का डर और ना अंधेरी रात का था भय ,क्योंकि मन में बसे थे प्रभुश्रीराम

बयाना के कार सेवक की जुबानी...कहा, पिता से मिली हिम्मत

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ना गोलियों का डर और ना अंधेरी रात का था भय ,क्योंकि मन में बसे थे प्रभुश्रीराम

ना गोलियों का डर और ना अंधेरी रात का था भय ,क्योंकि मन में बसे थे प्रभुश्रीराम

बयाना. वो दिन आज भी याद है। जब चारों ओर गोलियों की गूंज सुनाई देती थी। हर चौराहे पर कड़ा पुलिस बंदोबस्त था। अंधेरे में ही इधर-उधर गांवों के रास्ते भटकते हुए अयोध्या जाने की ललक थी। लेकिन मन में ना गोलियों का डर था और ना ही अंधेरी रात का भय, क्योंकि मन में प्रभु श्री राम बसे हुए थे। हर आफत को झेलते हुए आगे बढ़ते गए।

यह कहना है कि कार सेवक महेन्द्र भूषण शर्मा एडवोकेट का। कस्बे की महादेव गली निवासी महेन्द्रभूषण शर्मा एडवोकेट ने बताया कि अक्टूबर 1990 की कई दिनों की काली रात उन्हे आज भी बखूबी याद है। जब अपने पिता रघुवीरशरण एडवोकेट के निर्देश के बाद अयोध्या कार सेवकों के जत्थे के साथ रवाना हुए थे। बयाना से ही पैदल चलकर वह अंधेरी रात और गांवों की गलियों में होकर दूसरे दिन आगरा पहुंचे। जहां कार सेवकों की पुलिस को सख्ती से तलाश थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायमसिंह यादव के सख्त निर्देशे थे कि अयोध्या तक कार सेवक नहीं पहुंच सकें। मगर जूनुन ऐसा था कि भगवान श्रीराम की सूरत मन और दिन में बसी थी। एक ही नारा याद था कि मंदिर यही बनेगा और जय श्रीराम के जयकारों के साथ बयाना से अयोध्या के लिए रवाना हो गए। शर्मा ने बताया कि उनके साथ पाषर्द थलेश शर्मा, प्रकाश शर्मा, कार सेवा के लिए निकला था।
रात भर भूखा प्यासा चलकर पुलिस से बचते हुए केवल एक बैग और उसमें कुछ रोटियां लेकर मन में भगवान श्रीराम की भक्ति के साथ निकले थे। 28 अक्टूबर 1990 को खानसूरजपुर के रास्ते रूपवास के बाद आगरा पहुंचे। आगरा पहुंचते ही पुलिस की छाबनी बनी हुई थी। प्रत्येक चौराहे पर हथियारबंद पुलिस को कार सेवकों की तलाश थी। मगर हम गांवों के रास्ते अयोध्या के लिए जा रहे थे। बीच में अंधेरे में गांव के नाम और रास्ता पूछ ही रहे थे कि रात को एक व्यक्ति से रास्ता पूछा तो पहले उसने अपना नाम मोहम्मद ही बोला कि हम रास्ते के आगे निकल गए। क्योंकि हमने पहले उसे बता दिया कि हम कार सेवक हैं और अयोध्या जा रहे हैं। मगर किसी प्रकार की हिम्मत नहीं हारी। कदम आगे बढते चले गए।

दस दिन बंद रहे जेल में
आगे बढे तो पता चला कि मुलायम सरकार कार सेवकों पर गोली दाग रही है। मगर कार सेवक गोलियों की परवाह किए बिना आगे बढ़ते चले जा रहे थे। रात होते ही पुलिस ने घेर लिया और पुलिस ने पकड कर पहले एक स्कूल में बंद कर दिया। इसके बाद सुबह आगरा की सेन्ट्रल जेल में बंद कर दिया। जिसमें करीब 10 दिन बंद रहना पडा। क्योंकि हमारे हाथो में भगवा झण्डा था उस समय आगरा से हरद्वार दुबे विधायक थे और रमेशकांत लवानियां सांसद थे। इसके बाद 30 अक्टूबर 1990 के बाद पुन 6 नवम्बर को फिर कारसेवकों ने अयोध्या में बाबरी मस्जिद पर चढाई कर दी। महेन्द्रभूषण शर्मा ने बताया कि 30 अक्टूबर से 6 नवम्बर तक वह कार सेवकों के साथ जेल मे बंद रहे। जहां जेल में हनुमान चालीसा, कीर्तन और भगवान श्रीराम के जयकारे लगाए। वह नाजारा आज भी आंखों से ओझल नहीं होता है। अब भगवान श्रीराम के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में अयोध्या जाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। इस अवसर पर घर घर में दीप जलाकर भगवान श्रीराम की आरती संध्या आदि धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।

फोटो-महेन्द्रभूषण शर्मा एडवोकेट बयाना

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