
भरतपुर . बच्चे का खून बदलती चिकित्सकों की टीम।
भरतपुर . बच्चे का शरीर पीलिया रोग से पीला पड़ रहा था। पीलिया की अधिकता इतनी थी कि वह बच्चे के दिमाग में पहुंचकर उसे बहरा बना सकता था, लेकिन चिकित्सकों ने बच्चे के शरीर का पूरा खून बदलकर उसे नई जिंदगी का तोहफा दिया। खास बात यह है कि बच्चे को नेगेटिव रक्त भी जनाना अस्पताल के एक चिकित्सक ने दिया।
जनाना अस्पताल की एनआईसीयू में 23 जुलाई को पुष्पा पत्नी धर्मवीर का बच्चा भर्ती हुआ। बच्चे का जन्म 19 जुलाई को ही हुआ था। इमरजेंसी ड्यूटी पर शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. हरिमोहन, डॉ. शिवराम एवं डॉ. रजनीश थे। बच्चे का शरीर पीलिया से पीला पड़ रहा था।
उसका ब्लड ग्रुप ओ नेगेटिव एवं बच्चे की मां का ब्लड ग्रुप बी नेगेटिव था। बच्चे के पीलिया का लेबल 32.55 था, जो बहुत ज्यादा था। ऐसी स्थिति में पीलिया बच्चे के दिमाग में पहुंचकर उसके सुनने की क्षमता को छीन सकता था। साथ ही उसकी जान को भी खतरा हो सकता था। इस स्थिति में चिकित्सकों ने बच्चे के खून को बदलने का निर्णय लिया। बच्चे के ग्रुप का ब्लड परिजनों के पास नहीं था। ऐसी स्थिति में बच्चे की जान बचाने के लिए रेजीडेंट डॉ. शिवराम शर्मा ने अपना ओ नेगेटिव ब्लड स्वेच्छा से दान कर बच्चे का खून बदलने का निर्णय लिया।
डॉ. हरिमोहन शिशु रोग विशेषज्ञ के निर्देशन में एनआईसीयू के रेजीडेंट चिकित्सक एवं स्टाफ ने दो से तीन घंटे में बच्चे का पूरा खून बदल दिया। बच्चे का खून बदलने के बाद उसका लेबल 9.4 आ गया। इसके बाद बच्चा खतरे से बाहर आया, जो अब स्वस्थ है। बच्चे का खून बदलने वाली टीम में डॉ. हरिमोहन, डॉ. विजय सिंह मीणा, डॉ. शिवराम, डॉ. रजनीश, डॉ. योगेश, डॉ. वी.एस. तेजा एवं नर्सिंग स्टाफ के धर्मेन्द्र, पंकज एवं मीना कुमारी आदि मौजूद रहे।
Updated on:
04 Aug 2022 11:27 am
Published on:
04 Aug 2022 11:24 am
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