भरतपुर . नगर निगम में पट्टा देने का मामला उलझता जा रहा है। पहले नगर निगम प्रशासन की ओर से इस संबंध में मार्गदर्शन मांगा जो मिल भी गया। इसके बाद भी निगम प्रशासन शुक्रवार को पट्टा देने से मुकरा तो आक्रोशित महिला-पुरुषों ने आयुक्त कार्यालय के बाहर हो-हल्ला कर विरोध-प्रदर्शन किया। महापौर के पट्टे की फीस जमा कराने के आश्वासन पर मामला शांत हुआ।
जानकारी के अनुसार नगर निगम आयुक्त बीना महावर ने 14 सितम्बर को अधीक्षण पुरातत्वविद् भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग मंडल जयपुर को प्रशासन शहरों के संग अभियान 2021 के तहत संरक्षित स्मारक/स्थल से 100 मीटर (प्रतिषिद्ध क्षेत्र) में पट्टे देने के संबंध में मार्गदर्शन मांगा गया कि प्राचीन संस्मारक तथा पुरातत्वविक स्थल एवं अवशेष अधिनियम 1958 तथा तथ्य संबंधित नियम 1959 एवं अधिनियम 2010 के नियम/अधिनियम के तहत 16 जून 1992 तक या इससे पूर्व बने हुए भवनों का केवल मरम्मत एवं नवनिर्माण कार्य संरक्षित स्मारक की संरक्षक सीमा 100 मीटर की दूरी तक बिना सक्षम प्राधिकारी की बिना स्वीकृति के करना प्रतिबंधित है। साथ ही 16 जून 1992 से पूर्व बने मकानों, भवानों का पट्टा देना कानून में प्रतिबंधित नहीं है। अधिनियम 2010 के अनुसार मार्गदर्शन प्रदान किया जाए कि स्मारक/स्थल से 100 मीटर में 16 जून 1992 से पूर्व निर्मित भवनों के पट्टे सशर्त दिए जा सकते हैं या नहीं। इस मार्गदर्शन पत्र पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग जयपुर मंडल के अधीक्षण पुरातत्वविद् ने 20 सितम्ब्र को आयुक्त नगर निगम को मार्गदर्शन देते हुए पत्र में लिखा कि केन्द्रीय संरक्षित स्मारक/स्थल से 100 मीटर की दूरी पर 16 जून 1992 तक या इससे पूर्व में बने हुए भवनों का केवल मरम्मत कार्य सक्षम प्राधिकारी की पूर्वानुमति से किए जाने की शर्त पर ही पट्टे दिए जा सकते हैं, खाली भूखंड पर नहीं। आयुक्त को मार्गदर्शन मिलने पर भरतपुर के कच्चे डंडे में स्थित संरक्षित स्मारक दिल्ली दरवाजा, सूरजपोल बुर्ज, अनाह गेट, फतेह बुर्ज के 100 मीटर में रहने वाले लोगों में पट्टे मिलने की आस जाएगी। शुक्रवार को इन संरक्षित क्षेत्रों के लोग 16 जून 1992 के पूर्व के रहवास के सुबूत लेकर आयुक्त महावर से मिलने पहुंचे तो उन्होंने पट्टा देने से मना कर दिया। इस पर मौजूद लोगों में रोष फैल गया। कार्यालय के बाहर महिला-पुरुष धरने पर बैठकर नारेबाजी करने लगे। इस दौरान पुलिस भी मौके पर पहुंची। इस दौरान भीड़ महापौर के कक्ष में पहुंंच गई। इस पर महापौर अभिजीत कुमार ने आयुक्त को आदेश दिए कि जिन लोगों को पट्टे की पत्रावली का आवेदन किया गया है, उनकी प्राप्त मार्गदर्शन की शर्तों पर पट्टे की राशि जमा कर पट्टे दिए जाएं। इसके बाद भीड़ शांत हुई। उल्लेखनीय है कि शहर के कच्चे डंडे पर पट्टा देने की कार्रवाई निगम प्रशासन की ओर से की जा रही है।