
100 साल से भी पहले हुआ था कामां के गणेश मंदिर का निर्माण
भरतपुर/कामां. घर में कोई शुभ कार्य हो तो ऐसा हो ही नहीं सकता है कामां का कोई परिवार तीर्थराज विमल कुण्ड स्थित काशी विश्वनाथजी मन्दिर के सामने गणेशजी को निमंत्रण दिए बगैर करे, क्योंकि हर शुभकार्य की शुरुआत की परंपरा यहां गणेशजी को नियंत्रण देने से होती है। मानते हैं कि गणेशजी को निमंत्रण देने के बाद सारे काम उनकी इच्छा पर निर्भर करते हैं, वह कार्य में कोई कमी नहीं होने देते हैं। यह मन्दिर बहुत पुराना है। इस मन्दिर का निर्माण संवत 1912 में किया गया था। इससे पूर्व से ही यहां पर गणेश की प्रतिमा विराजमान है। गणेशजी के दर्शन के लिए कस्बा के ही नहीं बल्कि महाराष्ट्र, इन्दौर, गुजरात, दिल्ली, हरियाणा सहित अन्य स्थानों से श्रद्धालु आते है। गणेश चतुर्थी पर विशेष उत्सव मनाया जाता है। यह कामां तहसील में सबसे प्राचीन मन्दिर है।
मन्दिर के पुजारी ललित कुमार पण्डा ने बताया कि मंदिर का निर्माण स्व. दौलतराम सोनी की ओर कराया गया था। इस मन्दिर में सेवा पूजा पिछले करीब 30 वर्षों से करते आ रहे है। पिता देवीराम पण्डा के निधन के बाद स्वंय के द्वारा सेवा पूजा की जा रही है। मन्दिर के पुजारी ने ललित कुमार पण्डा ने बताया कि सिद्धी विनायक गणेशजी का दाई मुख है। ऐसी प्रतिमा हजारों में एक मिलती है। अन्य गणेश प्रतिमा का बाई मुख होता है। मन्दिर पुजारी ने बताया कि गणेश जी वर्क का चोला ग्रहण करते है। सिंदूर का चोला ग्रहण नहीं करते है। यह प्रतिमा चमत्कारी भी मानी जाती है।
तड़के मंदिर आकर देते हैं निमंत्रण
मन्दिर के पुजारी ने बताया कि शुभ कार्य चाहे शादी हो, गृह प्रवेश, कुआं पूजन सहित अन्य कार्य कस्बे सहित ग्रामीण क्षेत्र के लोगों की ओर से मन्दिर पर पहुंचकर गणेश का न्यौता देकर व पूजा अर्चना कर शुभ कार्य शुरू किया जाता है। निमंत्रण देने के लिए लोग तड़के ही जाकर दर्शन करते हैं। सबसे पहले जाकर गणेशजी के दर्शन करते हैं। मानते हैं कि निमंत्रण देने के बाद सारे बिगड़े काम भी बनने लगते हैं।
Published on:
03 Sept 2022 05:02 pm
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