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खुद कैंसर पीडि़त, फिर भी कैंसर पीडि़त पति की सलामती को रख रहीं व्रत

- सेवा को बनाया जिंदगी का मकसद

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खुद कैंसर पीडि़त, फिर भी कैंसर पीडि़त पति की सलामती को रख रहीं व्रत

खुद कैंसर पीडि़त, फिर भी कैंसर पीडि़त पति की सलामती को रख रहीं व्रत

भरतपुर . साल 2003 में मुझे पता चला कि मैं कैंसर पीडि़त हूं तो एकबारगी सब कुछ बिखर सा गया। वजह, खुद के साथ परिवार को संभालने की जिम्मेदारी मेरी थी, लेकिन इसके बाद वर्ष 2005 में पति के कैंसर पीडि़त होने की बात ने सबको झकझोर सा दिया। हंसती-खेलती जिंदगी में आई इस बीमारी ने सब कुछ बदल दिया था, लेकिन हमने हौसला नहीं खोया और जिंदगी के पथ पर एक-दूसरे को साथ लेकर आगे बढ़े। आज दोनों ने करीब-करीब कैंसर को मात दे दी। यह कहना है शहर के सेक्टर नंबर तीन निवासी विमला गुप्ता का। विमला की उम्र करीब 72 है। वह आज भी पति की सलामती के लिए करवा चौथ का व्रत रखती हैं।
विमला बताती हैं कि कैंसर पीडि़त होने के नाते चिकित्सक ने मुझे व्रत रखने से मना किया है, लेकिन मेरी आस्था मुझे इतनी ताकत देती है कि मैं सहज ही व्रत कर लेती हूं। इससे अभी तक मुझे कोई दिक्कत नहीं हुई। विमला गुप्ता गृहणी हैं, जबकि इनके पति चन्द्रभान गुप्ता जिला परिषद में वरिष्ठ लेखाधिकारी के पद पर थे, जो वर्ष 2011 में सेवानिवृत हो गए। गुप्ता दंपती की एक बेटी है, जिसकी शादी हो चुकी है। अब दोनों अकेले रहते हैं। विमला के पति चन्द्रभान गुप्ता कहते हैं कि हमारी ईश्वर में प्रबल आस्था है। यही वजह है कि हम दोनों ही पिछले करीब 11 साल से कोई दवा नहीं ले रहे हैं। कैंसर जैसी बीमारी का ख्याल हमने दिमाग से ही निकाल दिया है। विमला गुप्ता ने बताया कि तीज-त्योहारों में मेरी शुरू से ही गहरी आस्था रही है। यही वजह है कि मैं हमेशा से करवाचौथ का व्रत कर रही हूं। भले ही चिकित्सक ने हिदायत दी है, लेकिन मुझे इस व्रत से कभी कोई दिक्कत नहीं हुई।

सेवा को बनाया जीवन का मकसद

गुप्ता दंपती ने अब अपने जीवन का मकसद लोगों की सेवा को बना रखा है। दोनों पति-पत्नी स्वास्थ्य मंदिर सेवा संस्थान से जुड़े हैं और यहां सेवा के लिए पहुंचते हैं। दंपती यहां सेवा प्रकल्प में सहयोग देते हैं। चन्द्रभान बताते हैं कि किन्हीं भी हालातों में व्यक्ति को अच्छे कर्म और ईश्वरीय आस्था से मुंह नहीं मोडऩा चाहिए। ईश्वरीय सत्ता हमें खूब शक्ति देती है। इसकी बदौलत इनसान हर परेशानी से उबरने में सक्षम हो जाता है।


दो साल से पत्नी की सेवा कर रहे डॉ. रवि गुप्ता

करवा चौथ पर डॉ. रवि गुप्ता की कहानी भी किसी प्रेरणा से कम नहीं है। उनकी पत्नी डॉ. रचना गुप्ता (46) वर्तमान में न्यूरो बीमारी से पिछले दो वर्ष से जूझ रही है। उनको सेरेबल की जटिल एवं लाइलाज बीमारी के चलते बेड रेस्ट पर हैं। उनको नित्यकर्म भोजन इत्यादि सहारे के साथ कराया जाता है। डॉ. रचना पूर्व में अपने उच्च शिक्षण पीएचडी की उपाधि 2002 में प्राप्त करने के पश्चात उन्होंने सेंट पीटर्स स्कूल में करीब 14 वर्ष तक सेवाएं दी। इसी बीमारी के चलते उन्होंने वहां से उन्होंने अपनी सेवाएं समाप्त कर दी। डॉ. रचना की दो पुत्रियां है। इसमें से एक राजकीय मेडिकल कॉलेज उदयपुर से तृतीय वर्ष में अध्ययनरत है एवं दूसरी पुत्री सातवीं कक्षा में पढ़ती है। आज उनकी देखभाल और सेवा उनकी पुत्री एवं पति डॉ. रवि गुप्ता कर रहे है जो कि राजकीय अभियांत्रिकी महाविध्यालय भरतपुर के प्राचार्य पद पर हंै।

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