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केन्द्र मेहरबान, अब राहत बख्शे राजस्थान

-41 साल बाद भरतपुर कर रहा सेमिनार की मेजबानी

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केन्द्र मेहरबान, अब राहत बख्शे राजस्थान

केन्द्र मेहरबान, अब राहत बख्शे राजस्थान

भरतपुर . केन्द्र सरकार का पूरा फोकस किसान पर है। ऐसे में विदेशी तेल पर पाबंदी भी कसी जा रही है। केन्द्र सरकार का मन है कि किसान का पैसा किसान को मिले। इसके लिए सरसों के भाव ऊंचे हैं और इसका फायदा किसानों को भी मिला है। केन्द्र सरकार ने किसानों के अच्छे दिन लौटाने का काम किया है। अब राजस्थान सरकार से राहत की उम्मीद है। कृषि और मंडी टैक्स खत्म कर दिया जाए तो किसानों के साथ सरसों की सेहत भी संवर जाएगी। यह कहना है सेंट्रल आर्गेनाइजेशन फॉर ऑयल एंड ट्रेड तथा प्रेसीडेंट मस्टर्ड ऑयल प्रोड्यूसर एसोसिएशन ऑफ इंडिया बाबूलाल डाटा का। डाटा शनिवार को भरतपुर में हो रही रबी सेमिनार में भाग लेने पहुंचे।
पत्रिका से बातचीत में डाटा ने कहा कि हिन्दुस्तान में 45 प्रतिशत सरसों अकेले राजस्थान में पैदा होती है। इसमें भी चार बड़े सेक्टरों में भरतपुर शुमार है। सरसों के भाव अच्छे रहने से इस बार पैदावार बढिय़ा है। केन्द्र सरकार चाहती है कि किसानों की आय दोगुनी हो। इसके लिए उन्हें अच्छे खाद-बीज की दरकार है। अभी राजस्थान सरकार से कोई खास राहत नहीं मिली है। ऐसे में किसान और व्यापारी राहत की उम्मीद संजोए हुए हैं। कृषि और मंडी टैक्स खत्म कर दिया जाए तो किसानों के साथ व्यापारियों को भी राहत मिलेगी। डाटा ने कहा कि भरतपुर में सरसों संबंधी उद्योग की अपार संभावनाए हैं, जिन्हें सहेजने की बेहद दरकार है। तेल उद्योग भरतपुर के लिए जीवनदायिनी सरीखा है। ऐसे में सरकारी स्तर पर इसको बढ़ावा देने के प्रयास किए जाएं।

पैदावार बढ़ी, अब बहुरेंगे दिन

भरतपुर ऑयल मिलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष कृष्ण कुमार अग्रवाल ने कहा कि सरसों उत्पादन में खास पहचान रखने वाले भरतपुर को इस बार तेल, तिलहन एवं तेल उद्योग की राष्ट्रीय स्तर की 'रबी सेमिनारÓ की मेजबानी का मौका मिला है। पहले दिन शनिवार को वक्ताओं ने सेमिनार को लेकर अपनी राय रखी। मुख्य कार्यक्रम रविवार को होगा। अग्रवाल ने कहा कि पिछली बार 90 लाख टन सरसों की पैदावार हुई थी, जो इस बार के अनुमान के मुताबिक 120 लाख टन है, जो अपने आप में रिकॉर्ड पैदावार है। अच्छे भावों की बदौलत किसानों को पैसा मिल रहा है। इससे किसान आत्मनिर्भर बन रहा है। अग्रवाल ने कहा कि अच्छा तेल खाने के लिए कीमतों में कुछ उछाल आ सकता है, लेकिन खाने के रूप में सरसों के तेल का विकल्प नहीं है। अब तक सरसों तेल इंडस्ट्री से करीब पांच हजार लोगों को रोजगार मिल रहा था, जो अब बढ़कर सात से आठ हजार हो गया है। उन्होंने कहा कि 41 सालों बाद पहली बार यह सेमिनार भरतपुर को मिली है।

यह मांगें मानी जाएं, तो बने बात

-अभी स्टॉक लिमिट 45 दिन की है, जबकि कुछ राज्यों में यह 90 दिन है। यहां भी यह 90 दिन की जाए।
-राजस्थान सरसों के क्षेत्र में सरसों प्रधान स्टेट घोषित हो।
-सरसों की बुवाई पर किसानों को सब्सिडी मिले।
-किसानों की जमीन की टेस्टिंग कराकर यहां सरसों को बढ़ाया दिया जाए।
-खाद-बीज सस्ते उपलब्ध कराए जाएं।
-कृषि वैज्ञानिकों से गुणवत्ता की जांच कराकर किसानों को राहत दी जाए।
-सरसों की बुवाई के लिए सस्ती ब्याज पर खाद-बीज एवं अन्य सुविधाएं दी जाएं।