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केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान, मानसून का बेसब्री से इंतजार

मानसूनी बरसात का इतंजार कर रहे केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान प्रशासन (घना) को निराशा हाथ लगी है। अभी तक एक बार ही बरसात हुई है, जो उद्यान के हिसाब से नाकाफी है।

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Rajesh Kumar Khandelwal

Jul 10, 2017

मानसूनी बरसात का इतंजार कर रहे केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान प्रशासन (घना) को निराशा हाथ लगी है। अभी तक एक बार ही बरसात हुई है, जो उद्यान के हिसाब से नाकाफी है।

मई-जून की भीषण गर्मी की वजह से घना के कई ब्लॉकों में पानी सूख गया था। पक्षियों के एक स्थान पर नहीं बैठने और वन्यजीवों के परेशान होने पर घना प्रशासन ने पिछले दिनों चंबल लिफ्ट परियोजना से कुछ मात्रा में पानी लिया है।

यह पानी उद्यान के गिने-चुने ब्लॉकों में छोड़ा गया है, जिससे पक्षी अपना ठिकाना बना सके। घना प्रशासन अच्छी मानसूनी बरसात का इतंजार कर रहा है। अगले कुछ दिनों में बरसात नहीं होती है तो वह चंबल से और पानी लेने पर विचार कर सकता है।

उद्यान में लिया 12 एमसीएफटी पानी

गर्मी के चलते घना के कई ब्लॉकों में जून अंत में पानी की दिक्कत आना शुरू हो गई। घना प्रशासन ने जुलाई प्रथम सप्ताह में अच्छी बारिश होने की उम्मीद जताई, लेकिन वह 9 दिन गुजर जाने के बाद निराशा ही हाथ लगी। वन्यजीवों की बैचेनी को देखते घना प्रशासन ने पिछले दिनों चंबल से पानी लेना मुनासिब समझा। घना में अभी तक 11 एमसीएफटी पानी आ चुका है। इस पानी को जरुरत के हिसाब से कुछ ब्लॉकों में छोड़ा गया है।

नेस्टिंग में आ रही थी परेशानी

ब्लॉकों में पानी की कमी होने से पक्षियों को नेस्टिंग करने में दिक्कत आ रही थी। ब्लॉक सूख जाने से उन पक्षियों को अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा था, जो अड्डे दे चुके थे। उत्पाती बंदर घोसलों में रखे अड्डों को नुकसान पहुंचा रहे थे। वहीं, दूसरी तरफ जो पक्षी नेस्टिंग कर रहे थे, वह भी इधर-उधर उडऩा शुरू कर दिया। पक्षियों के घना छोडऩे की आशंका को देखते घना प्रशासन ने चंबल से पानी लेने की योजना बनाई।

चाहिए 450 एमसीएफटी पानी

घना को एक सीजन में करीब 450 एमसीएफटी पानी की जरुरत पड़ती है। पिछली बार अच्छी मानसूनी बरसात तथा घना के पुराने स्रोत पांचना और गोवर्धन कैनाल से पानी मिलने पर चंबल से पानी लेने की खास जरुरत नहीं पड़ी। गौरतलब रहे कि चंबल परियोजना से घना को अक्टूबर 2011 में पानी की शुरुआत हुई थी। लेकिन घना के लिए पांचना बांध का पानी 'लाइफ लाइनÓ है, जिसमें आवश्यक तत्व और पर्याप्त मात्रा में भोजन उपलब्ध रहता है। करौली क्षेत्र के ग्रामीणों ने पांचना से घना को पानी छोडऩा का विरोध किया, जिस पर पानी मिलना बंद हो गया था। इस बीच घना में बढ़ते जल संकट को देखते हुए राज्य सरकार ने हस्तक्षेप कर वर्ष 2010 में पांचना से 216 एमसीएफटी पानी छुड़वाया था। बाद में चंबल परियोनजा तैयार होने पर पानी लेना शुरू कर दिया। हालांकि, गत वर्ष करौली इलाके में भारी बरसात होने से पांचना से पानी घना पहुंच गया था।


- मानसूनी बरसात नहीं होने से घना में पानी की किल्लत होने लगी थी। पक्षियों को नेस्टिंग करने में परेशानी आ रही थी, जिस पर कुछ मात्रा में पानी चंबली से लिया है। अभी मानसूनी बरसात को देखेंगे, उसके बाद आगे पानी लेने पर विचार किया जाएगा।
-अजीत ऊचोई, निदेशक
केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान

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