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कारी में औद्योगिक क्षेत्र का सपना अधूरा, दो बार टेंडर, प्रस्ताव ग्वालियर भेजा

फि र भी 32 एकड़ अतिक्रमण मुक्त नहीं, रोजगार की तलाश में जिले से पलायन को मजबूर युवा

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फि र भी 32 एकड़ अतिक्रमण मुक्त नहीं, रोजगार की तलाश में जिले से पलायन को मजबूर युवा

फि र भी 32 एकड़ अतिक्रमण मुक्त नहीं, रोजगार की तलाश में जिले से पलायन को मजबूर युवा

टीकमगढ़. शहर के साथ नगर पंचायत कारी में औद्योगिक क्षेत्र विकसित कर स्थानीय युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की योजना बीते पांच वर्षों से कागजों में ही सिमटी हुई है। कारी में औद्योगिक केंद्र की स्थापना के लिए 16 हेक्टेयर लगभग 32 एकड़ भूमि चिन्हित की गई, लेकिन अतिक्रमण, महंगाई और विभागीय लेटलतीफी के कारण आज तक उद्योग स्थापित नहीं हो सके।

औद्योगिक भूखंडों के विक्रय के लिए दो बार टेंडर प्रक्रिया निकाली गई और प्रस्ताव लघु उद्योग निगम ग्वालियर को भी भेजा गया, बावजूद इसके उद्योग विस्तार की रफ्तार तेज होने के बजाय और धीमी पड़ गई। कारी में औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना यदि समय पर हो जाती, तो सैकड़ों युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिल सकता था। लेकिन प्रशासनिक सुस्ती, महंगाई और अतिक्रमण ने इस महत्वाकांक्षी योजना को अधर में लटका दिया है।

अतिक्रमण बना सबसे बड़ी बाधा

उद्योग विभाग द्वारा साइज अनुसार प्लाट काटे जाने के बावजूद, पिछले पांच वर्षों में जमीन से अतिक्रमण नहीं हटाया जा सका। इसका नतीजा यह हुआ कि संभावित युवा उद्यमी इस क्षेत्र से दूरी बनाते चले गए। उद्योग की जमीन पर कब्जों के चलते न तो बुनियादी सुविधाएं विकसित हो सकीं और न ही निवेशकों का भरोसा बन पाया।

महंगाई ने भगा उद्यमी

कारी नगर परिषद क्षेत्र में प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र में एसओआर के तहत पीडब्ल्यूडी द्वारा कराए जाने वाले विकास कार्य जैसे सडक़, नाली, बिजली और पानी की लागत लाखों में बताई जा रही है। बताया गया कि यहां एक औद्योगिक प्लाट की कीमत 40 से 45 लाख रुपए तक पहुंच रही है, जबकि आसपास के क्षेत्रों में 25 लाख रुपए में प्लाट उपलब्ध है। इसी कारण व्यापारियों और उद्यमियों ने टेंडर प्रक्रिया में रुचि नहीं दिखाई।

अब ग्वालियर लघु उद्योग निगम को जिम्मेदारी

पीडब्ल्यूडी के स्थान पर अब इस पूरे प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी लघु उद्योग निगम ग्वालियर को सौंपी गई है। जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र द्वारा यहां क्लस्टर डवलपमेंट मॉडल तैयार किए जाने की योजना है, ताकि एक ही क्षेत्र में फू ड प्रोसेसिंग, सीमेंट मटेरियल, पेवर्स, लोहे से जुड़े उद्योगों सहित अन्य इकाइयां स्थापित की जा सकें। इससे कच्चे माल की उपलब्धता, परिवहन और विपणन में उद्यमियों को सुविधा मिलने की बात कही जा रही है। परिणामस्वरूप जिले के बेरोजगार युवा मंडीदीप, रायसेन,पीथमपुर, इंदौर, देवास, दिल्ली, सूरत और गुजरात जैसे औद्योगिक शहरों की ओर पलायन करने को मजबूर है।

पहले एयरपोर्ट, फि र उद्योग के लिए जमीन

बताया गया कि झांसी रोड स्थित यह जमीन पहले एयरपोर्ट के लिए आवंटित थी, जिसे बाद में उद्योग स्थापना के लिए परिवर्तित कर दिया गया। हालांकि जमीन का विधिवत हस्तांतरण जिला उद्योग एवं व्यापार केंद्र को अब तक नहीं हो सका, जिससे पूरी योजना ठंडे बस्ते में पड़ी हुई है।

शासन ने उद्योग के लिए कारी में जमीन आवंटित कर दी है। उस जमीन पर अतिक्रमण फैला हुआ है। उसके खसरों को परिवर्तित करने के लिए कलेक्टर के पास फाइल पड़ी है। निर्णय होते ही उद्यमियों को मौका दिया जाएगा।

डॉ गुजन जैन, महा प्रबंधक जिला उद्योग केंद्र टीकमगढ़।