सेक्टर नंबर 13: अब यूआईटी के खिलाफ आंदोलन की तैयारी में खातेदार

-जिन्होंने सुध नहीं ली उनको सबक सिखाएंगे

By: Meghshyam Parashar

Published: 22 Jul 2021, 03:52 PM IST

भरतपुर. हाईवे पर प्रस्तावित संभाग की सबसे बड़ी आवासीय कॉलोनी सेक्टर नंबर १३ मजाक बनकर रह गई है। यही कारण है कि १२ साल गुजरने के बाद भी इसको लेकर कोई निर्णय नहीं हो सका है। उल्लेखनीय है कि राजस्थान पत्रिका की ओर से १३ जुलाई से अभियान चलाया जा रहा है। इधर, भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष व सामाजिक कार्यकर्ता गिरधारी तिवारी ने बताया कि संभाग की सबसे बड़ी आवासीय कॉलोनी की योजना स्थानीय प्रशासन व राजनेताओं की अनदेखी के के कारण फेल हो गई है तो वहीं दूसरी ओर अपने जीवनभर की कमाई से बनाई खेती की भूमि का उचित मुआवजा न मिलने के कारण अन्नदाता किसान भी आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। ऐसे में अब आंदोलन की रणनीति बनाई जा रही है। इसकी शुरुआत शुक्रवार से की जाएगी।

खातेदार बोले:


-हमारी 14 बीघा जमीन है। 12 साल से खेती तक नहीं कर पा रहे हैं। बाजार से गेहूं की बोरियां लानी पड़ रही हैं। सरकार अगर हमारी भूमि को नहीं ले सकती तो हमें लौटा दे। हम दोबारा से उस पर खेती कर अपने परिवार का पालन पोषण कर सकते हैं।

अनीता सिंह पत्नी ओंकार सिंह, ओमविहार सेवर


-हम भाइयों की 18 बीघा जमीन है न तो पैसा मिला न जमीन मिली। जमीन पर भी रोड बना दी है। खेती करने लायक नहीं छोड़ी है। हमारे भूखे मरने की नौबत है। जमीन घेर कर पटक दी है। सरकार जल्द से जल्द हमारे साथ इंसाफ करे। 12 साल से अभी तक हम भटक ही रहे हैं। कोई सुनने वाला ही नहीं है।

रमन सिंह पुत्र रतन सिंह, जाट मडोली सेवर

-14 बीघा जमीन के न तो पट्टे मिले न जमीन मिली। सरकार ने जमीन भी बंजर कर दी है। उसमें सड़क पर मिट्टी डालकर सड़क बना दी है। कितना घाटा हो गया, क्या सरकार हमारे घाटे की भरपाई करेगी। यह एक तरह का किसानों के साथ नाइंसाफी है। किसानों को उसका मुआवजा मिले और उसकी ब्याज दी जाए।

जीत सिंह पुत्र भूरे लाल, जाट मडोली सेवर

-तीन बीघा जमीन है। लंबा समय होने के कारण ज्यादा समस्या हो गई है। पहले खाने के लिए गेहूं आ जाते थे, लेकिन अब बाजार से खरीदने पड़ रहे हैं गांव के लोगों से कर्जा लेना पड़ रहा है। पत्नी के ऑपरेशन के लिए कर्जा अभी तक नहीं चुकाया है। जमीन होते हुए भी भटक रहे हैं ।

रमेश पुत्र हुकुमा, जाट मडोली सेवर


-सेक्टर नंबर 13 में 17 बीघा जमीन है। लंबा समय हो गया खेती नहीं कर पा रहे है। यूआईटी के चक्कर लगाते-लगाते परेशान हो गए, लेकिन कोई नहीं सुन रहा। तत्कालीन यूआईटी सचिव नीलिमा तक्षक ने आश्वासन दिया था, लेकिन उनके जाने के बाद सेक्टर नम्बर 13 का कोई जवाब देने वाला नहीं है। बच्चों का पालन पोषण किस तरह करें।

सुजान सिंह पुत्र अतर सिंह, गांव जाट मडोली सेवर


-16 बीघा खेत होते हुए भी एक-एक दाने को मोहताज हो गई। खेती से परिवार का पालन पोषण हो रहा था लेकिन सरकार ने हमारी जमीन लेकर हमारे साथ कुठाराघात किया है। सरकार हमारी जमीन का निस्तारण करें। इससे हमारी पारिवारिक स्थिति सही हो सके।

बदन सिंह पुत्र बदर सिंह, जाट मडोली सेवर

-सेक्टर नंबर १३ में हमारी साढ़े चार बीघा जमीन है। हमारा पूरा परिवार खेती पर ही आधारित है। सरकार ने जब हमारे खेत ले लिए तो हमें मुआवजा क्यों नहीं दे रहे। हम अपने परिवार की स्थिति को सही कर सकें। गेहूं बाजार से खरीद कर लाना पड़ रहा है। पढ़ाई व बीमारी समेत अन्य खर्चे कहां से करें।

प्रताप सिंह पुत्र अमृतलाल, नगला झीलरा सेवर


-सेक्टर नंबर 13 में हमारी जमीन होते हुए भी हम पैसे को मोहताज हो गए हैं। आखिर घर का खर्चा किस तरह चले। बच्चों की पढ़ाई किस तरह कराएं। घर में शादी विवाह सब काम पैसे से होता है ऐसा नहीं होगा तो कहां से करेंगे।

परवो पत्नी चिरंजीलाल, गांव श्रीनगर

Meghshyam Parashar Bureau Incharge
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