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VIDEO…खुद का नहीं संवरा जीवन, लेकिन किन्नर नीतू मौसी कराती है सामूहिक विवाह

विवाह सम्मेलन में एक बार फिर मौंसी की झोली दुआओं से भर गई। शहर इन्हें नीतू मौसी के नाम से जानता है। मौंसी पिछले एक दशक से ज्यादा समय से हर साल दस कन्याओं का विवाह और निकाह कराकर मां का धर्म निभा रही हैं

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विवाह सम्मेलन में एक बार फिर मौंसी की झोली दुआओं से भर गई। शहर इन्हें नीतू मौसी के नाम से जानता है। मौंसी पिछले एक दशक से ज्यादा समय से हर साल दस कन्याओं का विवाह और निकाह कराकर मां का धर्म निभा रही हैं। बीते 12 साल में नीतू मौसी अब तक 120 कन्याओं का कन्यादान कर विवाह-निकाह कराने का पुण्य कमा चुकी हैं। इनके विवाह सम्मेलन की खास बात यह है कि एक ही विवाह मंडप में वैदिक मंत्र और निकाह की आयतें गूंजती हैं। नीतू मौसी पिछले बीते 12 साल से जरूरतमंद कन्याओं का विवाह कराकर आपसी सद्भाव का संदेश भी दे रही हैं। सोमवार को गाजे-बाजे के साथ दूल्हा बारात लेकर अभिनंदन मैरिज होम पहुंचे। वहीं दुल्हनें सजी-धजी मंडप में बैठीं। नीतू मौसी ने एक ही मंडप में हिंदू और मुस्लिम समाज की बेटियों का एक साथ विवाह और निकाह कराया। खुद नीतू मौसी ने कन्यादान कर मां का फर्ज अदा किया। विवाह में नीतू मौसी ने न केवल कन्याओं के लिए सोने और चांदी के जेवरात बनवा कर दिए। बल्कि घर की जरूरतों का प्रत्येक सामान भी कन्यादान स्वरूप भेंट किया। शहर में कोतवाली से कुम्हेर गेट जाने वाले रास्ते पर नीतू मौसी के आवास से कोतवाली वासन गेट होते हुए पाईबाग तक दूल्हों की निकासी निकाली गई। इसमें किन्नर समाज की महिलाएं नाचते हुए चल रही थीं। शादी में सभी दस जोड़ो को आलमारी, फ्रिज, गद्दा-बेड़, रजाई, कुर्सी, टेबिल, कुकर, 51 बर्तन, प्लास्टिक, दूल्हा-दूल्हन के दो जोड़ी कपड़ा, सोने के कुंडल, नाक की नथ, तोडिय़ां, बिछुआ, चांदी का मंगलसूत्र, एक घड़ी व शहर के लोगों की ओर से कन्यादान में अन्य सामग्री दी गई।

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