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जानिए, राजस्थान के किस इलाके में असलहा-बारूद के दम पर बनते हैं आशियाने!

धौलपुर के चम्बल नदी क्षेत्र से अवैध खनन कर निकलने वाली बजरी इस क्षेत्र के करीब एक दर्जन शहरों और जिलों में विशेष मांग है। यही कारण है कि प्रतिदिन 100 किमी की सीमा में खनन माफिया के ट्रैक्टर-ट्रॉली बेखौफ दौड़ रहे हैं। हर ट्र्र्र्रैक्टर-ट्रॉली के साथ बंदूक, रिवाल्वर व देशी कट्टे और दूसरे हथियार होते हैं, जिनके दम पर वे इधर से उधर ही बजरी पहुंचा रहे हैं।

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जानिए, राजस्थान के किस इलाके में असलहा-बारूद के दम पर बनते हैं आशियाने!

जानिए, राजस्थान के किस इलाके में असलहा-बारूद के दम पर बनते हैं आशियाने!

Know, in which area of Rajasthan, houses are built on the basis of arms and ammunition!
- चम्बल बजरी की प्रतिबंध के बावजूद बढ़ रही मांग
- दोगुनी और तीन गुनी कीमतों पर खरीदने को तैयार लोग
- अवैध खनन कर बंदूक की नोक पर पहुंचा रहा माफिया


भरतपुर. अयोध्या के राम मंदिर निर्माण में भरतपुर (bharatpur) का बंशी पहाड़पुर पत्थर व धौलपुर (Dholpur) का धौलपुर स्टोन जरूर सुर्खियां बटोर चुका है लेकिन देश के इस इलाके में निर्माण सामग्री के रूप में प्रयुक्त होने वाली बजरी भी कम विख्यात नहीं है। चम्बल बजरी (chamble sand) के नाम से इस निर्माण सामग्री का इस्तेमाल कर मकान बनवाना यहां के बाशिंदों का बड़ा ख्वाब बन चुका है।

धौलपुर के चम्बल नदी क्षेत्र से अवैध खनन कर निकलने वाली बजरी इस क्षेत्र के करीब एक दर्जन शहरों और जिलों में विशेष मांग है। यही कारण है कि प्रतिदिन 100 किमी की सीमा में खनन माफिया के ट्रैक्टर-ट्रॉली बेखौफ दौड़ रहे हैं। बेरोक-टोक ये माफिया बजरी के साथ असलहा बारूद भी लेकर चलते हैं। हर ट्र्र्र्रैक्टर-ट्रॉली के साथ बंदूक, रिवाल्वर व देशी कट्टे और दूसरे हथियार होते हैं, जिनके दम पर वे इधर से उधर ही बजरी पहुंचा रहे हैं।

बजरी माफिया धौलपुर के सदर थाना क्षेत्र की पचगांव चौकी, सैंपऊ थाना, उत्तरप्रदेश के सरैंधी थाना, भरतपुर के रूपवास थाना, गहनौली मोड़ पुलिस चौकी, ऊंचा नगला पुलिस चौकी एवं शहर में सारस पुलिस चौकी से होकर निकलते हैं। यही नहीं इसके बाद यह पुलिस अधीक्षक कार्यालय, पुलिस लाइन एवं सर्किट हाउस के पास से गुजरते हैं। इस दौरान थाना मथुरा गेट एवं चिकसाना पुलिस का इलाका आता है, लेकिन इन पर प्रतिबंध तो दूर पुलिस इन्हें टोकने तक की जहमत नहीं उठाती।

घडिय़ालों को दे रहे कवर
चम्बल नदी में काफी संख्या में घडिय़ाल होने के कारण यहां खनन पर काफी पहले से रोक लगा दिया गया है। गुनगुनी सर्दी व गर्मियों के दिनों में यहां नदी किनारे कई बार घडिय़ाल परिवार यहां तादाद में देखे जाते हैं। खनन पर रोक लगने के पीछे मंशा भी यही रही है लेकिन बजरी की मांग यहां खनन पर पूर्ण लगाने में कामयाब नहीं होने दे रही है।

...औने पौने दामों पर बिकती है चम्बल बजरी
चम्बल क्षेत्र में खनन पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद से यहां से निकाली जाने वाली अवैध बजरी भी औने पौने दामों पर बेची जाती है। इस बजरी के खरीदार ज्यादा होने के कारण बेचने वाले इसे ऊंचे दामों पर बेचते हैं। बाजार के अनुसार जहां क्रशर बजरी की कीमत 35 सौ रुपए प्रति ट्रॉली है वहीं चम्बल बजरी की कीमत 06 हजार रुपए प्रति ट्रॉली तक है।

राजाखेड़ा-बसई डांग हॉटस्पॉट
धौलपुर के राजाखेड़ा-बसई डांग क्षेत्र से इस बजरी का अवैध खनन किया जाता है। इस क्षेत्र में धड़ल्ले से बजरी का खनन होता है जिसमें काफी संख्या में लोग इस काम के लिए वहां मौजूद होते हैं। बताया जाता है कि काफी लम्बा चौड़ा नेटवर्क होने के कारण पूरी चेन इस काम को अंजाम देती है।

भरतपुर ही नहीं मथुरा-आगरा भी सप्लाई
चम्बल बजरी की सप्लाई धौलपुर और भरतपुर के क्षेत्रों में ही नहीं होती ब्लकि उत्तर प्रदेश के मथुरा-आगरा क्षेत्र और मध्यप्रदेश के मुरैना-ग्वालियर तक इसकी सप्लाई होती है। इन इलाकों में दूरी होने के कारण बजरी को पहुंचाने में इसकी कीमत काफी बढ़ जाती है।

चम्बल की ही बजरी क्यों
दरअसल चम्बल नदी में चट्टानों के घिस-घिस कर पानी बहने के कारण यहां नदी किनारे मोटी दाने की बजरी इक_ी होती है। यह मोटे दाने की बजरी मजबूत निर्माण कार्य में काफी उपयोगी बताई जाती है। मोटे दाने की इस बजरी की खास तौर से मकान निर्माण कार्य के लिए काफी बेहतर माना जाता है।

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