25 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

पैनल में तीन वरिष्ठ पार्षदों के थे नाम, उन्हें छोड़कर चौथे युवा को बनाया नेता प्रतिपक्ष

-नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष का मनोनयन बना राजनीतिक रहस्य

2 min read
Google source verification
पैनल में तीन वरिष्ठ पार्षदों के थे नाम, उन्हें छोड़कर चौथे युवा को बनाया नेता प्रतिपक्ष

पैनल में तीन वरिष्ठ पार्षदों के थे नाम, उन्हें छोड़कर चौथे युवा को बनाया नेता प्रतिपक्ष

भरतपुर. भारतीय जनता पार्टी की ओर से करीब डेढ़ साल का समय गुजरने के बाद नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष की घोषणा शनिवार को कर दी गई। आश्चर्य तब हुआ जब पैनल बनाकर भेजने वाले भाजपाइयों को पता चला कि पार्टी ने पैनल में तीन वरिष्ठ पार्षदों को छोड़कर चौथे युवा पार्षद का चयन किया है। हालांकि मनोनयन के बाद भाजपा पदाधिकारियों ने कहा कि पार्टी अब युवाओं को मौका दे रही है। ऐसे में पार्षद कपिल फौजदार को नेता प्रतिपक्ष बनाकर उसी मकसद को पूरा किया गया है।
जानकारी के अनुसार नगर निगम के चुनाव नवंबर 2019 में हुए थे। 26 नवंबर को मेयर व 27 नवंबर को डिप्टी मेयर का चुनाव हुआ था। इस बार नगर निगम में 65 में से भाजपा के 22, निर्दलीय 22, बसपा के तीन व कांग्रेस के 18 पार्षद चुनाव जीतकर आए थे। बताते हैं कि किसी भी नगर निगम में विपक्ष का नेतृत्व करने वाला नेता प्रतिपक्ष अहम पद होता है। अभी तक नगर निगम की 27 दिसंबर 2019 से लेकर करीब चार बैठक हुई है। इन सभी बैठकों में शहर की समस्याओं को लेकर विपक्ष बहुत कम नजर आया। इसके पीछे नेता प्रतिपक्ष का चयन नहीं होना भी मुख्य कारण माना जा रहा था। ऐसे में अब युवा पार्षद कपिल फौजदार को नगर निगम का नेता प्रतिपक्ष बनाया गया है। इस संबंध में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां ने पार्टी के जिला अध्यक्ष शैलेश सिंह व नगर निगम आयुक्त को स्वीकृति पत्र प्रेषित किया है। फौजदार ने कहा कि प्रदेश नेतृत्व व भरतपुर शहर की जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने की पूरी कोशिश की जाएगी। शहर के विकास के लिए सभी पार्षदों व जनता, पार्टी के साथ मिलकर दिन-रात मेहनत करेंगे।

आखिर तीन के बाद अचानक कैसे आया नाम

जब पार्टी के पदाधिकारियों से बात की गई तो सामने आया कि पैनल में चार पार्षदों के नाम भेजे गए थे। इनमें शिवानी दायमा, श्यामसुंदर गौड़, रूपेंद्र सिंह व कपिल फौजदार का नाम शामिल था। खुद पार्टी के पदाधिकारियों को जब इस घोषणा के बारे में पता चला तो उन्होंने बताया कि तीन में से एक नाम की घोषणा होना माना जा रहा था। उनका तर्क था कि शिवानी दायमा का नाम प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य के रूप में आने के कारण उन्हें यहां मनोनीत नहीं किया गया। हालांकि दूसरे व तीसरे नाम को भी हटाने के पीछे वो भी तर्क नहीं दे पाए।

समीकरण हुए फेल मतलब जातिगत वोट बैंक साधा

सूत्रों की मानें तो नेता प्रतिपक्ष का चयन करने में भले ही संगठन के नेताओं के करीबियों को फायदा मिलने बात कही जा रही थी, परंतु पार्टी का ही एक गुट वरिष्ठ नेताओं के सामने यह बात रख चुका था कि नगर निगम के चुनाव में जिन पार्षदों ने निष्ठा का परिचय दिया था। उनको आवश्यक रूप से ध्यान में रखा जाएगा। बताया जा रहा है कि पार्टी पदाधिकारी इस पद पर मनोनयन कर जातिगत वोट बैंक को साधने की कोशिश की है।

-पैनल में चार नाम भेजे गए थे। मुझे तो खुद ही पता नहीं था कि मनोनयन की घोषणा हो गई है। खुद कपिल फौजदार ने ही फोन कर बताया। क्योंकि मैं भरतपुर से बाहर किसी कार्य में व्यस्त था। बाकी प्रदेशाध्यक्ष के स्तर पर ही यह तय किया जाता है। पार्टी का निर्णय सर्वोपरि है।

डॉ. शैलेष सिंह
जिलाध्यक्ष भाजपा

बड़ी खबरें

View All

भरतपुर

राजस्थान न्यूज़

ट्रेंडिंग