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ईश्वर को अर्पित फूलों से खिलखिलाएगा जीवन

Life will blossom with flowers offered to God भगवान को अर्पित फूल अब बेकार में नहीं फेंके जा सकेंगे... और तो और मंदिरों में चढ़ाए गए इन फूलों से लोगों का जीवन भी महकेगा।

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ईश्वर को अर्पित फूल से खिलखिलाएगा जीवन

ईश्वर को अर्पित फूल से खिलखिलाएगा जीवन

Life will blossom with flowers offered to God
- आंध्र प्रदेश में हुई राष्ट्रीय स्तर का स्मार्ट इंडिया हैकथोन में रखा प्लान
- राष्ट्रीय स्तर पर हुआ सम्मानित
सीकरी. भगवान (God) की सेवा में फूलों का विशेष महत्व होता है। मंदिरों (temple)पर आने वाले श्रद्धालु फूल, माला आदि अपने साथ लेकर आते हैं और भगवान की प्रतिमा पर चढ़ाते हैं। जिन्हें पुजारी व सेवादारों को हटाना पड़ता है और वे इन्हें एक जगह इक_ा कर देते हैं। अभी तक मंदिरों पर चढ़ाए गए फूल-माला आदि इधर-उधर पड़े दिख जाते हैं। कहीं सडक़ तो कहीं कचरादान में फूल पड़े रहते हैं। मंदिर प्रबंधन से लेकर श्रद्धालु भी इसका ध्यान नहीं रख पाते हैं, अंतत: आस्था का अपमान ही होता है। बतादें इसे रोकने के लिए अब विकल्प तैयार है।


मंदिरों में चढ़ाए गए इन फूलमालाओं से लोग अपने जीवन में महका सकेंगे। मंदिरों से निकलनी वाली फूलमालाओं को इक्टठा कर अब रिसाइिकल कर उनसे पत्तल-दौने या फिर दूसरी आवश्यक कटलरी बनाई जा सकेगी।


हाल ही में भरतपुर के सीकरी निवासी जतिन जैन ने अपनी छह सदस्यीय टीम का नेतृत्व करते हुए ओंगोले (आंध्रप्रदेश) andhra pradesh के क्यू आई एस विश्वविद्यालय में आयोजित स्मार्ट इंडिया हैकथोन-2022 में राष्ट्रीय स्तर पर इस योजना को बताया।


उन्होंने बताया उनका उद्देश्य अनुपयोगी फूल मालाओं का सदुपयोग कर दैनिक जीवन में काम आने वाली वस्तुओं का निर्माण करना है। उन्होंने बताया कि इससे न केवल स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा मिलेगा बल्कि पर्यावरण को संरक्षित करने में अहम योगदान भी रहेगा।


बतादें कि फूलमालाओं से जुड़ी समस्या के समाधान में जतिन जैन की टीम को प्रतियोगिता में राष्ट्रीय विजेता चुना गया और एक लाख रुपए पुरस्कार देकर विश्वविद्यालय प्रबंधन की ओर से सम्मानित भी किया गया।


कार्यक्रम को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी संबोधित करते हुए आजादी के 100 वर्ष पूर्ण होने तक भारत को विश्व में सर्वोच्च पर पहुंचाने का आग्रह किया और सभी विजेताओं के विचारों की सराहना करते हुए उत्साहवर्धन किया। जतिन जैन महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर में अध्ययनरत हैं।


जतिन बताते हैं कि फूल माला के वेस्ट को पहले सुखाया जाता है। उसे पीसकर उसमें आवश्यक इफेक्ट्विस उसमें मिलाकर हाइड्रोलिक प्रेस से कटलरी की शक्ल दी जाती है। बनने वाली यह कटलरी कॉस्ट इफेक्टिव भी होती है।