
लुपिन ने दिया लाखन की सांसों को सुकून
भरतपुर . मुफलिसी की मार से आहत लाखन की सांसों को अब सुकून मिल सकेगा। लुपिन संस्था ने एसएमएस में भर्ती लाखन को ऑक्सीजन कन्सन्ट्रेटर उपलब्ध कराया है। इसके बाद उन्हें घर पर लाकर कन्सन्ट्रेटर के सहारे रखा जा सकेगा। इसको लेकर पत्रिका ने खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद सहयोग के लिए लुपिन आगे आई है। पत्रिका ने 30 जून के अंक में मुफलिसी के बीच मुसीबत, जोखिम में जान शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। खबर में बताया था कि कोरोना महामारी की मार से लाखन की जिंदगी बच तो गई है, लेकिन अब अगले दो माह तक ऑक्सीजन की दरकार ने परिवार के सामने मुसीबतों का पहाड़ खड़ा कर दिया है। जयपुर के एसएमएस में भर्ती लाखन को चिकित्सक सुरक्षा के लिहाज से छुट्टी दे रहे हैं। साथ ही उन्हें करीब दो माह तक ऑक्सीजन कन्सन्ट्रेटर पर रखने की नसीहत भी दे रहे हैं, लेकिन आर्थिक रूप से तंग परिवार के पास कन्सन्ट्रेटर की व्यवस्था नहीं हैं। ऐसे में यह परिवार छुट्टी कराने को लेकर उलझन में है। खबर में बताया कि चिचाना के नगला कल्याण निवासी मजदूरी करने वाले लाखन सिंह अप्रेल माह में कोरोना से पीडि़त हुए। आरबीएम से उन्हें रैफर किया गया। इसके बाद वह 18 मई से एसएमएस अस्पताल में भर्ती हैं। अब उनकी कोरोना सहित अन्य रिपोर्ट नेगेटिव आ गई हैं, लेकिन अभी आईसीयू में ऑक्सीजन पर निर्भर हैं। अब एमएमएस के चिकित्सकों ने ट्रीटमेंट बंद कर उन्हें घर ले जाने कहा है। चिकित्सकों ने ज्यादा दिन आईसीयू में रखने पर वापस संक्रमण की आशंका जताते हुए उन्हें घर ले जाने की सलाह दी है। साथ ही यह भी कहा है कि उन्हें करीब दो माह तक ऑक्सीजन कन्सन्ट्रेटर के सहारे रखा जाए। पत्रिका में खबर प्रकाशित होने के बाद लुपिन हृूमन एंड वैलफेयर सोसायटी की ओर से लाखन सिंह के पुत्र पुष्पेन्द्र सिंह को ऑक्सीजन कन्सन्ट्रेटर उपलब्ध कराया गया। इस दौरान लुपिन के राजेश शर्मा, भीम सिंह, पुनीत गुप्ता एवं राजेन्द्र माहुरे आदि मौजूद रहे।
खबर पढ़कर टीम को दिए निर्देश
लुपिन के अधिशासी निदेशक सीताराम गुप्ता ने पत्रिका में प्रकाशित हुई खबर में लाखन सिंह की पीड़ा पढ़कर तुरंत टीम को कन्सन्ट्रेटर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। गुप्ता के बाहर होने पर टीम ने लाखन सिंह के पुत्र पुष्पेन्द्र को संस्था बुलाकर कन्सन्ट्रेटर भेंट किया।
अब इनवर्टर की दरकार
लाखन सिंह के पुत्र पुष्पेन्द्र सिंह ने पत्रिका एवं लुपिन के सीताराम गुप्ता का आभार जताते हुए कहा कि कन्सन्ट्रेटर मिलने से हम पिता को नई जिंदगी दे पाएंगे। पुष्पेन्द्र ने बताया कि कन्सन्ट्रेटर को चलाने के लिए बिजली की जरूरत होती है, लेकिन गांव में बिजली जाने की समस्या रहने के कारण इसकी उपयोगिता थोड़ी कम होगी। यदि कन्सन्ट्रेटर चलाने के लिए उन्हें इनवर्टर मिल जाए तो उन्हें काफी राहत मिलेगी।
Published on:
01 Jul 2021 03:13 pm
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