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RGHS : राजस्थान में घर-घर दवा पहुंचाने की योजना अटकी, कर्मचारी-पेंशनर परेशान, जानें नया अपडेट

Door Step Delivery Medicine Scheme : राजस्थान सरकार की महत्वाकांक्षी डोर स्टेप डिलीवरी दवा योजना कब शुरू होगी। बजट घोषणा को एक वर्ष बीत चुका है। क्रियान्वयन प्रक्रिया शुरू न होने से लाखों कार्मिक और पेंशनर अब भी लाभ से वंचित है।

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Rajasthan Door Step Delivery Medicine Scheme stalled employees and pensioners worried

फोटो - AI

Door Step Delivery Medicine Scheme : राजस्थान सरकार की आरजीएचएस (राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम) के लाभार्थियों के लिए घर-घर दवाइयां पहुंचाने की महत्वाकांक्षी डोर स्टेप डिलीवरी दवा योजना अभी तक धरातल पर नहीं उतर सकी है। बजट घोषणा को एक वर्ष बीत चुका है। क्रियान्वयन प्रक्रिया शुरू न होने से लाखों कार्मिक और पेंशनर अब भी लाभ से वंचित है। सरकार की घोषणा के अनुसार यह योजना प्रदेश के लगभग 11 लाख सेवारत कर्मचारियों, 16 लाख सेवानिवृत कार्मिकों तथा उनके आश्रितों को सीधे तौर पर लाभ पहुंचाने वाली थी। जिले में इनकी संख्या करीब 55 हजार है।

आरजीएचएस के तहत पंजीकृत लाभार्थियों को अनुमोदित फार्मा स्टोरों या ई-फार्मा प्लेटफॉर्म से दवाइयां ऑनलाइन आदेश करने की सुविधा मिलनी थी। इसके बाद 24 घंटे के भीतर दवाओं की डोर स्टेप डिलीवरी सुनिश्चित की जानी थी, जिससे मरीजों को मेडिकल स्टोर तक जाने से राहत मिलती।

बताते हैं कि योजना के लिए ई-फार्मा कंपनियों का चयन, लॉजिस्टिक पार्टनरों की नियुक्ति, दवा आपूर्ति की ट्रैकिंग के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का विकास तकनीकी कारणों से लंबित है। साथ ही, दवाओं की कीमतों के मानकीकरण, विभिन्न जिलों में आपूर्ति श्रृंखला की उपलब्धता तथा आरजीएचएस पोर्टल के साथ एकीकरण जैसे मुद्दों पर स्पष्ट नीति तय नहीं हो सकी है। यही कारण है कि योजना की शुरुआत बार-बार टलती जा रही है।

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि योजना को व्यावहारिक, सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए आवश्यक तकनीकी प्रक्रियाएं अंतिम चरण में है और जल्द लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।

जयपुर व जोधपुर में पायलट प्रोजेक्ट लागू करने का निर्णय

दवा विक्रेता हेमंत बंसल ने बताया कि डोर स्टेप डिलीवरी का मतलब है कि आपका सामान विक्रेता से सीधे आपके घर तक पहुंचाना। इसके लिए किसी स्टोर या पिकअप पॉइंट पर जाने की जरूरत नहीं है। इससे आपका समय और मेहनत बचती है। किसी दुकान या कूरियर ऑफिस तक गाड़ी चलाने के बजाय, डिलीवरी करने वाला व्यक्ति आपके पते पर आता है। इसे ही डोर-टू-डोर डिलीवरी सेवा कहा जाता है। हालांकि फिलहाल यह योजना

अब पायलट प्रोजेक्ट के तहत जयपुर व जोधपुर में लागू करने का निर्णय विभाग ने लिया है। इसके बाद यह अन्य शहरों में लागू की जाएगी।

घर बैठे दवा का फायदा ऐसे मिलता

पेंशनर्स को आसानी से घर पर दवाएं उपलब्ध कराने का पूरा सिस्टम ऑनलाइन ही होगा। जिस पेंशनर्स को भी दवा की जरूरत है, उसे आरजीएचएस पोर्टल पर लॉगिन करना होगा। पोर्टल के अलावा ऐप लाने का भी विचार चल रहा है। दोनों जगह डोर स्टेप डिलीवरी का चयन करना होगा।

वहीं, पेंशनर्स अगर खुद जाकर मेडिकल स्टोर से दवा लेना चाहते है तो उसका ऑप्शन भी दिया जाएगा। टेंडर के जरिए जिस एजेंसी का चयन होगा, वही दवाएं सप्लाई करेगी। इस योजना में अलग-अलग मेडिकल स्टोर को रजिस्टर किया जाएगा।

पेंशनर्स की ओर से ओपीडी में दिखाए जाने के बाद पर्ची को पोर्टल या ऐप पर अपलोड करना होगा। इसके बाद एजेंसी अपने पंजीकृत मेडिकल स्टोर से दवाएं लेकर पेंशनर्स के घर पर सप्लाई करवाएगी। इस पूरी प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए एजेंसी को पेंशनर्स का पूरा डेटा शेयर किया जाएगा। डेटा में पेंशनर का नाम, पता, पिनकोड, मोबाइल नंबर की जानकारी होगी।

बुजुर्ग व पेंशनर्स को राहत मिलती

राज्य सरकार ने अपने बजट डोर स्टेप डिलीवरी योजना की घोषणा की थी। लेकिन उसे अब तक लागू नहीं किया गया। योजना में मॉड्यूल बनाना था। मेडिकल स्टोर्स को अनुबंधित करते, लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ है। यदि यह योजना लागू होती तो बुजुर्ग व पेंशनर्स को राहत मिलती।
विवेक विजय, प्रदेशाध्यक्ष, प्रादेशिक दवा विक्रेता समिति

पेंशनर्स की परेशानी होगी खत्म

ऑनलाइन दवा आपूर्ति शुरू होने से न केवल समय और खर्च की बचत होगी, बल्कि गंभीर रोगों से पीड़ित बुजुर्ग पेंशनरों के लिए यह व्यवस्था अत्यंत राहतदायक होगी। सरकार से योजना को शीघ्र लागू करने की भी मांग की जा चुकी है। अब तक कोई निराकरण नहीं हुआ है।
ओमप्रकाश शर्मा, पेंशनर

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