
भरतपुर के अस्पताल में बच्ची की देखभाल करते चिकित्सक। फोटो पत्रिका
Bharatpur : भरतपुर में मां की ममता हारी… लेकिन मासूम की जिंदगी बच गई। जनाना अस्पताल में भर्ती बार-बार आंख खोलकर देख रही तीन घंटे की नवजात बच्ची शायद यही कह रही होगी कि, मां! मैं भी तो तुम्हारा ही अंश हूं फिर मुझे मरने के लिए कचरा में क्यों फेंक दिया।
भरतपुर में चिकसाना थाना अंतर्गत न्यू पुष्प वाटिका कॉलोनी में शाम 7.30 बजे खाली भूखंड पर कचरा डालने गई महिला को एक रोती हुई बच्चे के आवाज सुनाई दी। इस पर उसने जाकर देखा तो एक नवजात शिशु रो रहा था। संभावना है कि किसी अभागिन मां ने उसे जन्म देने के तुरंत बाद कचरे में फेंक दिया था। नवजात शिशु का फूल तक अलग नहीं था, नाल तक नहीं काटा गया था।
नवजात बच्ची ने कोई भी कपड़ा नहीं पहन रखा था। घर से लाकर महिला ने कपड़े पहनाए। रात 8 बजे पुलिस मौके पर पहुंची और बच्ची को जनाना अस्पताल में भर्ती कराया।
बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष राजाराम भूतौली ने बताया कि बच्ची पूरी तरह से स्वस्थ है। चिकित्सकों ने बताया कि दो-तीन घंटे पहले ही बच्ची ने जन्म लिया है। अभी पुलिस जांच कर रही है। अन्य स्वास्थ्य संबंधी जांच रविवार को की जाएंगी।
पुलिस को आशंका है कि जीवित नवजात बच्ची को भी विवाहित जोड़ा इस प्रकार कचरा में नहीं फेंकता। किसी भी तरह से उसकी जान बचाने की कोशिश होती है, प्रसूता को अस्पताल में भर्ती कर दोनों का इलाज भी कराया जाता है, लेकिन जिस प्रकार से जिंदा शिशु को नाल के साथ फेंका गया है, उससे यही आशंका जताई जा रही है कि किसी बिन ब्याही युवती ने उसे जन्म दिया होगा और लोक-लाज के भय से बच्चे को फेंक दिया।
पुलिस नवजात बच्ची की मां व अन्य घरवालों को ढूंढ़ने का प्रयास कर रही है। फिलहाल इस बारे में कोई पता नहीं लग सका है। पुलिस को अंदेशा है कि जन्म के कुछ देर बाद ही अनचाही संतान की पैदाइश छुपाने अथवा बालिका के जन्म लेने की वजह से उसे झाड़ियों में फेंका गया होगा।
भरतपुर में लिंग अनुपात 2001 की जनगणना के 854 के आंकड़े की तुलना में 1000 पुरुषों पर 880 है। जनगणना 2011 निदेशालय की नवीनतम रिपोर्टों के अनुसार भारत में औसत राष्ट्रीय लिंग अनुपात 940 है। 2011 की जनगणना में बाल लिंग अनुपात 1000 लड़कों पर 869 लड़कियां हैं, जबकि 2001 की जनगणना के आंकड़ों के अनुसार 1000 लड़कों पर 879 लड़कियां थी।
पत्रिका पड़ताल में सामने आया कि इस तरह के प्रकरण तीन साल में आठ आए हैं। आंकड़ों के हिसाब से जयपुर, जोधपुर, कोटा, बाड़मेर, अजमेर के बाद भरतपुर इसमें शामिल है। भरतपुर के बाद उदयपुर में ऐसे सात प्रकरण आए।
उदाहरण की बात करें तो 16 अक्टूबर 2025 को सेवर के गांव नगला झीलरा में कांटों से भरी झाड़ियों में दो दिन का बच्चा मिला था। जिसका मुंह कपड़े से बंधा था। शरीर पर गहरे जख्म थे। यह नवजात गांव की महिलाओं को लकड़ी काटते वक्त मिला था। 9 दिसंबर 2021 को डीग जिले के कामां में कलयुगी मां ने अपनी नवजात बालिका को जन्म के बाद खेतों में डाल दिया था। जो कि कामां-जुरहरा रोड गांव बड़कली के पास मिली थी। हालांकि इसके बाद भी ऐसे मामले सामने आते रहे हैं।
Published on:
01 Mar 2026 08:51 am
