
प्रमोद कुमार वर्मा
लाखों की आबादी के जिले में भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत मुट्ठी भर लोगों को उपचार मिल रहा है।
जबकि लाखों परिवारों के पास भामाशाह कार्ड हैं, जिसे केंद्र व राज्य सरकार ने चिकित्सा सुविधा के लिए अनिवार्य कर रखा है। बावजूद इसके अधिकांश रोगी उपचार से वंचित हैं।
बीपीएल परिवारों की नि:शुल्क चिकित्सा
सुविधा के लिए एनएफएसए कार्ड बनवाए गए। जिन्हें सरकारी अस्पतालों में उपचार दिया जाता है। साथ ही वर्ष 2012-13 में राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजना के कार्ड से भी इलाज शुरू किया गया। अब वर्ष 2015-16 दिसम्बर में भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना प्रारम्भ कर दी गई।
कार्ड होना अनिवार्य
एनएफएसए कार्ड व राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजना के कार्ड में से किसी एक कार्ड के साथ भामाशाह कार्ड लाना अति-आवश्यक है। तब रोगी का उपचार सरकारी या गंभीर होने पर निजी अस्पताल में कराने की सहूलियत मिलती है। इसमें भी ऐसे झंझट हैं, जिनकी पूर्ति भामाशाह कार्डधारक रोगी नहीं कर पाता। इसलिए उपचार से वंचित रह जाता है।
होना पड़ता है भर्ती
सर्वप्रथम भामाशाह कार्ड वाले रोगी को अपने दस्तावेज लाने होंगे। उनकी जांच अस्पताल में खुली खिड़की पर बैठा योजना का मार्गदर्शक करेगा। पात्र पाए जाने पर ऑनलाइन दर्ज करेगा और रोगी जांच के लिए संबंधित चिकित्सक के पास भेजेगा। तब उपचार प्रक्रिया शुरू होगी। इस लाभ के लिए रोगी 24 घंटे भर्ती होना अनिवार्य है।
बीमा कंपनी करती है भुगतान
इसके लिए 10 सरकारी अस्पतालों में नि:शुल्क उपचार की व्यवस्था के साथ राज्य सरकार ने शहर में 21 निजी अस्पतालों को भी जोड़ा है। जो भामाशाह स्वास्थ्य बीमा के तहत उपचार देंगे। निजी अस्पतालों में दिए गए उपचार का भुगतान बीमा कंपनी करती है, जो सरकार से जुड़ी है।
13 करोड़ का होना था भुगतान
भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के आंकड़ों पर नजर डालें तो शुरुआत से दो जून 2017 तक निजी व सरकारी अस्पतालों में केवल 53497 रोगी ही उपचार का लाभ ले सकें हैं। इनके उपचार की एवज में बीमा कंपनी को 13 करोड़ 79 लाख 21 हजार 916 रुपए का भुगतान अस्पतालों को होना था। आबादी के जिले में मुट्ठी भर रोगियों को उपचार मिल रहा है।
जांच के बाद भुगतान
हालांकि योजना के तहत 1740 बीमारियों के उपचार का पैकेज है। इसमें संबंधित बीमा कंपनी प्रति व्यक्ति साधारण बीमारी के इलाज का 30 हजार रुपए और गंभीर बीमारी का 30 लाख रुपए तक के उपचार का क्लेम अस्पताल को देती है। यह भुगतान कंपनी द्वारा जांच पड़ताल के बाद ही दिया जाता है।
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