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World Religion Day: दुनिया में बढ़ते ‘नॉन्स’, लेकिन भारत में आस्था की जड़ें अब भी मजबूत

दुनिया में तेजी से बढ़ रहे धर्म को न मानने वाले ‘नॉन्स’, लेकिन भारत में आज भी आस्था की जड़ें मजबूत हैं। प्यू रिसर्च के आंकड़ों, युवाओं की धार्मिक रुचि और वैश्विक धार्मिक बदलावों पर विशेष विश्लेषण।

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World Religion Day

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धारणाद् धर्ममित्याहु: धर्मो धारयते प्रजा:।
यत्स्याद् धारणसंयुक्तं स धर्म इति निश्चय:॥

अर्थात् धर्म ही प्रजा (समाज) को धारण करता है (एक सूत्र में बांधकर रखता है)। अत: जिससे समाज का धारण और पोषण हो, वही धर्म है। सभ्यता के उदय से आज तक धर्म मानव जीवन की सबसे बड़ी धुरी रहा है। व्यक्ति, समाज और ब्रह्मांड के बीच समन्वय के सिद्धांत ने धर्म को हमारे जीवन में ढाला। इन्हीं खूबियों से धर्म हमारी जरूरत बना, लेकिन 21वीं सदी में धार्मिक आस्था के बीच एक ऐसा वर्ग तेजी से उभरा जो किसी भी धर्म को नहीं मानता। इन्हें नॉन्स कहते हैं। प्यू रिसर्च सेंटर के मुताबिक 2010 में नॉन्स की आबादी 23 फीसदी थी, जो 2025 में बढकऱ करीब 25 फीसदी हो गई।

अर्थात दुनिया की करीब एक चौथाई आबादी ऐसी है, जो खुद को किसी धर्म से नहीं जोडकऱ देखती। ये महज आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि इंसान के भीतर चल रहे विश्वास और तर्क के युद्ध की कहानी है। नॉन्स की सबसे बड़ी संख्या ईसाई बाहुल्य देशों में बढ़ी है। इसी का नतीजा है कि यूरोप और उत्तरी अमरीका में लोग चर्च छोड़ रहे हैं, दूसरे धर्म के लोग भी धर्मस्थलों से दूरी बना रहे हैं। लेकिन भारत में स्थिति उलट है। भारत में किसी भी धर्म को नहीं मानने वाले लोग आज भी एक फीसदी से कम हैं, जबकि यहां धर्म को मानने वालों की संख्या बढ़ी है।

इसका अर्थ है भारत में आज भी आस्था की जड़ें गहरी हैं। प्यू रिसर्च के अनुसार लगभग 97 फीसदी भारतीय अपने आराध्य में विश्वास रखते हैं। लगभग 60 फीसदी भारतीय नियमित रूप से प्रार्थना या पूजा करते हैं, जो दुनिया के कई विकसित देशों की तुलना में कहीं ज्यादा है। देश में धार्मिक पर्यटन भी इसका बड़ा प्रमाण है। 2024 में भारत का धार्मिक-आध्यात्मिक बाजार 5.31 लाख करोड़ रुपए था, जो 2034 में 10 फीसदी बढकऱ 13.69 लाख करोड़ होने का अनुमान है।

भारत में आस्थावान युवाओं से मजबूत हुई धर्मध्वजा

सामाजिक शोध संस्थान सीएसडीएस-लोकनीति के हालिया सर्वे के मुताबिक लगभग 81 फीसदी भारतीय युवा धार्मिक विविधता और आस्था में विश्वास रखते हैं, जो बुजुर्गों (73त्न) की तुलना में ज्यादा है। इतना ही नहीं मंदिर, गुरुद्वारे और अन्य आस्था स्थलों में उनकी उपस्थिति भी एक दशक में 20 से 25 फीसदी तक बढ़ी है। इसी तरह आध्यात्मिक यात्राओं के लिए वीजा और बुकिंग करने वालों में 66 फीसदी मिलेनियल्स और जेन-जेड शामिल हैं। अयोध्या, वाराणसी और केदारनाथ जैसे तीर्थस्थलों पर जाने वाले कुल यात्रियों में 45 फीसदी युवा (18-25 फीसदी) थे।

क्यों बढ़ रहे हैं नॉन्स

  • वैज्ञानिक सोच : वैज्ञानिक सोच और इंटरनेट की पहुंच ने लोगों को हर बात पर सवाल करना सिखाया। ब्रह्मांड की उत्पत्ति जैसे सवाल अब धर्मग्रंथों से ज्यादा विज्ञान में ढूंढ रहे हैं।
  • बंधन पसंद नहीं : आधुनिक पीढ़ी धार्मिक नियमों में बंधने की बजाय अपनी शर्तों पर जीना पसंद करती है।
  • धार्मिक कट्टरवाद : कई युवा धर्म के नाम पर होने वाले संघर्षों और रूढि़वादिता को देखकर खुद को धर्म या धार्मिक बंधनों से मुक्त करना बेहतर समझते हैं। ईरान का मौजूदा संघर्ष इसका उदाहरण है।

सबसे ज्यादा धर्मों को मानने वाले देश

सिंगापुर, ताइवान, वियतनाम, दक्षिण कोरिया जैसे देशों में कई धर्मो को मानने वाले लोग रहते हैं। हालांकि आबादी के हिसाब से भारत दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक विविधता वाला देश है। यहां हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध और जैन धर्म के करोड़ों अनुयायी सदियों से साथ रह रहे हैं।

प्रमुख धर्म

  • ईसाई- 240 करोड़ (31फीसदी)
  • मुस्लिम- 200 करोड़ (25 फीसदी)
  • हिंदू- 120 करोड़ (15 फीसदी)
  • बौद्ध- 50 करोड़ (6 फीसदी)
  • यहूदी-1.5 करोड़ (01फीसदी)
  • गैर धार्मिक-120 करोड़

इन देशों में सबसे ज्यादा नॉन्स

चीन-90 फीसदी
जापान-86 फीसदी
चेक-75 फीसदी
स्वीडन-60 फीसदी
उत्तर कोरिया-71 फीसदी

इन धर्मों के वजूद पर संकट

पारसी: भारत में 1941 में पारसियों की आबादी 1.14 लाख के आसपास थी, जो अब 57 हजार ही रह गई। कम जन्मदर और समुदाय से बाहर शादी नहीं करने जैसे नियमों के कारण धर्म संकट में।
यजीदी: इराक और सीरिया में धार्मिक उत्पीडऩ और नरसंहार के कारण इस प्राचीन धर्म के अस्तित्त्व पर संकट।
मंदावाद: इराक का अत्यंत प्राचीन धर्म हैं। इसके महज 70 हजार लोग बचे हैं।
समरी धर्म: इजरायल और फिलिस्तीन के बीच रहने वाले इस समुदाय की आबादी एक हजार से भी कम बची है।
जनजातीय धर्म: अफ्रीका और अमेजन के जंगलों और अंडमान-निकोबार जैसे छोटे समूह एक सदी में ईसानी या इस्लाम धर्म में शामिल हो गए या आधुनिकीकरण के कारण अलग हो गए।

जाननें योग्य बातें

  • दुनिया में करीब 4300 छोटे-बड़े धर्म हैं, इनमें ज्यादातर समुदाय से जुड़े हैं।
  • 80फीसदी लोग दुनिया के पांच प्रमुख धर्मों के हैं। ये हैं हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, बौद्ध और यहूदी।
  • एशिया में दुनिया के सबसे ज्यादा धर्मों के लोग रहते हैं।
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