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सूरज की पहली किरण के साथ ही खिलखिलाएगा राजस्थान के इस हिस्से में बसा मिनी पूर्वांचल

शुक्रवार को नहाय-खाय के साथ शुरू होने वाले इस पर्व को लेकर घाट की सफाई शुरू हो गई है। शहर के सिमको क्षेत्र स्थित फाटक-39 के पास घाट तैयार किया गया है।

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Mini Purvanchal settled in this part of Rajasthan will bloom with the first ray of sun
-छठ महापर्व कल से, घाट पर तैयारियां शुरू
-नहाय खाय के साथ होगा आगाज


भरतपुर. बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश मनाए जाने वाला त्योहार छठ पूजा (chhth puja) अब ग्लोबल पहचान बन चुका है। लोक आस्था का महापर्व छठ 28 अक्टूबर को नहाय खाय के साथ प्रारंभ हो रहा है। राजस्थान के भरतपुर जिले में बसे मिनी पूर्वांचल में भी इसको लेकर तैयारी कर ली गई है।


शुक्रवार को नहाय-खाय के साथ शुरू होने वाले इस पर्व को लेकर घाट की सफाई शुरू हो गई है। शहर के सिमको क्षेत्र स्थित फाटक-39 के पास घाट तैयार किया गया है, जहां और भी तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। शुक्रवार सुबह व्रती और उनके परिवार घर की सफाई कर व्रती आसपास के नदी-तालाब में स्नान कर भगवान सूर्य को जल अर्पण करेंगे। इसके बाद घर में बने प्रसाद (अरवा चावल, सेंधा नमक में चने की दाल व घीया आदि) को ग्रहण कर व्रत की शुरुआत करेंगे।


पूर्वांचलवासी समिति के सदस्य उमा शंकर तिवारी के अनुसार 29 अक्टूबर को खरना मनाया जाएगा। इस दिन दिनभर निर्जला व्रत करने के बाद शाम को गुड़ की खीर का प्रसाद ग्रहण करेंगे। इसके बाद 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू हो जाएगा, जो 31 अक्टूबर को उगते हुए सूर्य को अघ्र्य देने के बाद पूर्ण होगा।


मान्यता के अनुसार दीपावली के छह दिन के उपरांत कार्तिक मास की षष्ठी तिथि को छठ पर्व मनाया जाता है। शनिवार को खरना के साथ 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू हो जाएगा। व्रती संतान की प्राप्ति, सुख-समृद्धि, संतान की दीघार्यु और आरोग्य की कामना के लिए साक्षात सूर्य देव और छठी मैया की आराधना करती हैं।


हिंदू पंचांग के अनुसार, 29 अक्टूबर, शनिवार को खरना है। इस दिन व्रती संध्या में आम की लकड़ी से मिट्टी के बने चूल्हे पर गुड़ का खीर बना कर भोग अर्पण करती हैं और प्रसाद के रूप में इसे ग्रहण करती है। इसके साथ ही व्रतियों का 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू हो जाता है। इससे एक दिन पूर्व सोमवार को नहाय खाय के दिन महिलाएं सूर्योदय से पूर्व स्नान कर नए वस्त्र धारण कर पूजा करने के उपरांत चने की दाल कद्दू की सब्जी और चावल का प्रसाद ग्रहण करेंगी।


खरना के दूसरे दिन अर्थात 30 अक्टूबर, रविवार को अस्ताचलगामी सूर्य को अघ्र्य दिया जाएगा। इस दिन व्रती डूबते हुए सूर्य को अघ्र्य देंगे। इस दिन छठ घाट पहुंचने से पूर्व घर में सभी सदस्य मिलजुल कर साफ-सफाई से शुद्ध देसी घी में ठेकुआ बनाते हैं। इसी ठेकुआ, चावल के आटा और घी से बने लड्डू, पांच प्रकार के फल व दीए के साथ पूजा का सूप सजाया जाता है। दौरा सिर पर रखकर लोग छठ गीत की धुन पर श्रद्धा भाव के साथ घाट पहुंचते हैं।