
कामां। भगवान श्रीकृष्ण क्रीडास्थली कामां बृज के 12 वनों में से पांचवां वन है। यहां पर भगवान श्रीकृष्ण ने अपने बाल सखाओं के साथ बाल्यावस्था में बाल क्रीडाएं की थी। देश विदेश से आने वाले धार्मिक पर्यटकों का मानना है कि यहां की मिट्टी के कण-कण में भगवान श्रीकृष्ण लीलाओं का वास है और जैसे जैसे जमाना बदलता गया वैसे वैसे इस धार्मिक बृज नगरी की पहचान मिटती गई।
बृज पर लगे कलंक को मिटाया जाए
इसकी पहचान देश विदेशों में जामताडा के बाद दूसरे ऑनलाइन ठगी के गढ के रूप में बन गई। बृज पर लगे इस कलंक को अब मिटाकर इसका नाम बृज नगरी कामवन कर इसमें मौजूद चौरासी मन्दिर, चौरासी कुंडा, चौरासी खम्बा का जीर्णोद्धर कराकर भगवान श्रीकृष्ण की इस क्रीडास्थली को मूल स्वरूप में लाने की आवश्यकता है।
यहां पर विराजते हैं चौरासी तीर्थ
यहां देश विदेशों से आने वाले दर्शनार्थी बृज रज को मस्तक से लगाकर उसे अपने साथ थैलियों में भरकर ले जाते हैं और अपने वहां पर चंदन का स्वरूप देकर मस्तक पर तिलक लगाते है। अपने सगे सम्बन्धियों के मांथे पर भी इस रज को लगाकर चंदन का स्वरूप दिया जाता है।
कामां का नाम बदलकर बृज नगरी कामवन करने की बहुत ही आवश्यकता है। यह आदि वृन्दावन कामवन है। बृज में इसकी अपनी अलग पहचान है। यहां पर गोविन्ददेव वृन्दादेवी साक्षात विराजमान है।
गोस्वामी अंजन कुमार, एकल प्रन्यासी गोविंद देव जी मन्दिर कामां व जयपुर
कामां का नाम बृज नगरी कामवन होना आवश्यक है। यहां पर चौरासी तीर्थ विराजते हैं। यह एक अदभूत बृज नगरी है। सभी बृजवासियों को इसकी महत्वता को समझना होगा। बडे पुण्यों के बाद इस बृज भूमि जन्म मिलता है।
धनंजय महाराज, नृसिंह जी मन्दिर, कामां
बृज में कामां चौरासी कोस परिक्रमा का मुख्य केन्द्र बिन्दु है। यहां पर चौरासी कोस परिक्रमा का पडाव स्थल है। इसका नाम कामां से बदलकर बृज नगरी कामवन किया जाए। पूरा संत समाज इस मांग को लेकर एक मंच आकर आवाज उठाएगा।
रमेश बाबा, मान मन्दिर बरसाना
Published on:
13 Apr 2024 05:09 pm
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