
पिता लापता और भाई मानसिक बीमार, नीलम ने उठाया परिवार का बीड़ा
भरतपुर/पहाड़ी. करीब 18 वर्ष पहले पिता लापता हो गए, देशभर में विभिन्न स्थानों पर जाकर तलाश की, लेकिन कुछ भी पता नहीं चल पाया। मां ही बेलदारी कर परिवार का पालन पोषण कर रही थी। पांच बहनों का इकलौता भाई भी मानसिक रूप से बीमार निकला। ऐसे में परिवार के लिए भाई का इलाज और परिवार का पालन-पोषण बड़ी चुनौती बनने लगा। अकेली मां के भरोसे परिवार पालना भी मुश्किल हो रहा था। ऐसे में छह भाई-बहनों में सबसे छोटी बेटी नीलम ने जीवन में कुछ करने का सपना संजोया। आज वह परिवार की आजीविका का सहारा बनी हुई है। यह सबकुछ नीलम ने स्वरोजगार की नींव रखकर ही संभव किया है। यही कारण है कि उस परिवार को बेटी बड़ा सहारा बनकर मजबूती से खड़ी हुई है।
पहाड़ी के प्रभुदयाल की पुत्री नीलम के चार बहन और एक भाई है। मां ने बड़ी मुश्किल हालात में चार बेटियों की शादी कर दी। नीलम छह भाई-बहनों में सबसे छोटी होने के साथ ही हिम्मत वाली भी थी। 18 साल पहले पिता के लापता होने के बाद उसकी मां ने काफी तलाश की। यहां तक कि जगह-जगह रिश्तेदार व परिजनों के माध्यम से पंफलेट बांटकर रेलवे स्टेशन व रोडवेज बस स्टेंड पर जाकर पूछताछ की, लेकिन करीब दो साल की कड़ी मेहनत के बाद भी उनका कोई सुराग नहीं लग सका। नीलम की मां बेलदारी और मजदूरी कर बड़ी मुश्किल से परिवार का गुजारा चला रही थी। वर्ष 2018 में नीलम ने एक संस्था के परिधान उत्पादन प्रशिक्षण केंद्र में दाखिला लिया और तीन माह तक रेडीमेड वस्त्र उत्पादन का प्रशिक्षण लिया। उसके बाद पांच माह तक यहीं केंद्र पर रहकर काम किया। इसके बाद उसने अपने घर पर ही काम करना शुरू कर दिया। संस्था के सहयोग से इनको सिलाई मशीन खरीदने के लिए 20 हजार रुपए का ऋण भी प्राप्त हुआ। उन्होंने शर्ट, कुर्ते और सलवार बनाने का काम शुरू किया। इनके काम में बहुत अच्छी सफाई होने के कारण आसपास काफी पसंद किया जाने लगा। इनके पास बहुत ग्राहक भी आने लगे तो काम अच्छा चलने लगा।
अपने साथ ही 10 महिलाओं को भी दिया रोजगार
नीलम ने बताया कि शुरुआत में काम इतना अधिक नहीं निकल रहा था, लेकिन धीरे-धीरे जब कुर्ते, शर्ट की सिलाई में सफाई अधिक और अच्छी आने लगी तो आसपास के अलावा अन्य स्थानों से भी डिमांड आने लगी। इससे काम और भी अच्छा चलने लगा। वह अपने कार्य से 14 से 20 हजार रुपए के बीच कमा रही है। अपने यहां पर 10 और महिलाओं को प्रशिक्षित किया है। जो कि चार से पांच हजार रुपए महीने तक कमाती हैं। इसके अलावा आठ और महिलाओं का प्रशिक्षण चल रहा है। नीलम ने मां को भी मजदूरी का कार्य कराना बंद करा दिया है। ये अकेले ही परिवार का पालन पोषण कर रही है। जीवन यापन तथा स्तर पहले से बहुत अच्छा हुआ है।
Published on:
08 Oct 2020 03:55 pm
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