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वीरांगना खुद सास को खिला रही खाना…बोली हर कोई नहीं पाता ऐसा नाम

वीरांगना पूनम अपना दर्द आंसूओं में छिपा रही है। वह बार-बार कभी कुछ तो कभी कुछ बोल जाती है। खुद शहीद के पिता, चाचा, भाई भी उसे देखकर रो पड़ते हैं। शहीद के पिता ने नरेश कटारा ने बताया कि शाम को पूनम सास अनिता को जबरदस्ती खाना खिलाने की कोशिश कर रही थी तो उसने खाने से मना कर दिया तो उसने कहा कि हर कोई ऐसा नाम नहीं पाता। उन्होंने देश के लिए प्राणों की आहुति दी है।
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वीरांगना खुद सास को खिला रही खाना...बोली हर कोई नहीं पाता ऐसा नाम

वीरांगना खुद सास को खिला रही खाना...बोली हर कोई नहीं पाता ऐसा नाम

भरतपुर. वीरांगना पूनम अपना दर्द आंसूओं में छिपा रही है। वह बार-बार कभी कुछ तो कभी कुछ बोल जाती है। खुद शहीद के पिता, चाचा, भाई भी उसे देखकर रो पड़ते हैं। शहीद के पिता ने नरेश कटारा ने बताया कि शाम को पूनम सास अनिता को जबरदस्ती खाना खिलाने की कोशिश कर रही थी तो उसने खाने से मना कर दिया तो उसने कहा कि हर कोई ऐसा नाम नहीं पाता। उन्होंने देश के लिए प्राणों की आहुति दी है। मैं सिर्फ पांच दिन ही पति से मिली थी, लेकिन मुझे गर्व है ऐसे पति पर। इतना कहते ही वो बिलखने लगी। बड़ी मुश्किल से उसे संभाला। परिजनों ने बताया कि आठ दिसंबर को शादी के बाद हर कोई शादी से इतना खुश था कि सौरभ के दुबारा छुट्टी पर आने की बात कर रहे थे। ताकि उनको घूमने के लिए भेज सके। ज्ञात रहे कि शहीद सौरभ कटारा की पार्थिव देह गुरुवार सुबह भरतपुर होते हुए सुबह नौ बजे बोकोली मोड पहुंची। जहां हजारों की संख्या में मौजूद ग्रामीणों ने सौरभ की पार्थिव देह को देखते ही जब तक सूरज चांद रहेगा, सौरभ तेरा नाम रहेगा के नारे लगाते हुए पार्थिव देह रखी गाड़ी के साथ चलने लगे। जैसे-जैसे पार्थिव देह रखी गाड़ी आगे बढने लगी। वैसे-वैसे लोगों की संख्या बढने लगी। गांव में पहुंचते ही आस-पास के दर्जनों गांवों व बरौली ब्राह्मण गांव के ग्रामीणों में मां भारती के लाल को देख जुनून सा पैदा हो गया। नारों पर नारे लगाए जाने लगे। सौरभ की पार्थिव देह गांव से होते हुए जब उनके घर पहुंची तो माहौल गमगीन हो उठा। महिलाओं के करुण क्रंदन के आगे पुरुषों के साथ पार्थिव देह के साथ गांव पहुंचे सैनिकों की आंखें भी छलकने पर मजबूर हो गई। शहीद के अंतिम संस्कार की तैयारी कर ली गई थी, लेकिन सूर्यग्रहण के कारण करीब पौन घंटे तक इंतजार किया गया। 11 बजे शहीद के भाई अनूप ने मुखाग्नि दी। इसमें वीरांगना पूनम ने भी हाथ लगाया। वीरांगना पूनम बार-बार बेसुध होती रही। घंटों बाद जब उसने कुछ सुध संभाली तो उसने बस इतना ही कहा कि यह दर्द बहुत है पर वीरांगना होने का भी गर्व बहुत है। 17 दिन की विवाहिता होने पर भी गर्व है। बरौली ब्राह्मण गांव में सौरभ कटारा से आठ दिसम्बर को पूनम की शादी हुई थी। जिस पर सौरभ कटारा शादी के पश्चात 14 दिसम्बर को अपनी डयूटी पर श्रीनगर चला गया। सोमवार रात को फोन पर पांच मिनट बाद बात करता हूं कहकर मंगलवार को बम विस्फोट में शहीद हो गया। इससे 16 दिन में ही पूनम का चांद अस्त हो गया।

मां कहती रही...मेरा बेटा जिंदा है उसे वापस ले आओ

घर की महिलाओं को सौरभ कटारा की शहादत के बारे में नहीं बताया गया था। रिश्तेदारों को भी गुरुवार सुबह नौ बजे बाद आने के लिए कह दिया गया था। सौरभ की पत्नी पूनम बार-बार ससुर व जेठ से इस बारे में पूछ रही थी कि अगर कुछ गलत हुआ है तो बता दीजिए। अंत में सुबह परिजनों को ही रोता देख मां व पत्नी को सबकुछ मालूम चल गया। मां अनीता अपने लाडले की खबर के बाद अपनी सुधबुध खो बैठी जो कि अन्त्येष्टि स्थल पर अपने बेटे के दर्शनों के लिए पहुंची तो एक बार बेटे को देखकर चीखने लगी कि यह मेरा सौरभ नहीं है मेरा सौरभ जिन्दा है और उसे वापस ला दो। मां को यहां से वापस घर ले जाते समय उसने एक पुलिसकर्मी को पकड़ लिया और उस पर सौरभ को मारने का आरोप लगाने लगी। इस पर परिजनों ने उसे छुड़ाया और घर ले गए। इस दौरान मां चीख चीखकर सौरभ जिन्दाबाद के नारे लगाने लगी। मां अनीता हार्ट मरीज होने के कारण गुरुवार सुबह सौरभ की पार्थिव देह गांव पहुंचने एवं मां को लाडले के शहीद होने की खबर देने से पूर्व ही चिकित्सा टीम गांव में पहुंच गई। बीसीएमएचओ रामावतार शर्मा के नेतृत्व में बंसी पहाड़पुर सीएचसी से अभिषेक चतुर्वेदी के साथ चिकित्सा टीम गांव पहुंची और अन्तिम संस्कार होने के बाद तक गांव में मौजूद रही।

शहादत के सामने राजनीति हुई गौण

बरौली ब्राह्मण में भाजपा हो या कांग्रेस, हर नेता शहीद को नमन करता नजर आया। खुद भाजपा और कांग्रेस के नेता मिलकर शहीद के परिजनों को दिलास देते रहे। कैबीनेट मंत्री विश्वेन्द्रसिंह, सांसद रंजीता कोली, जिला कलक्टर नथमल डिडेल, पुलिस अधीक्षक हैदर अली जैदी, भाजपा प्रदेश महामंत्री भजनलाल शर्मा, भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. शैलेश सिंह, समाज कल्याण विभाग के कर्नल ठेनुआ, विधायक अमरसिंह, कमांडो केशव फौजी, पूर्व जिलाध्यक्ष भानुप्रताप राजावत, पूर्व प्रधान रविन्द्र परमार, पूर्व प्रधान सालिगराम, सीओ बयाना खींव सिंह, उपखंड अधिकारी कमलसिंह यादव, तहसीलदार अलका श्रीवास्तव, धर्मसिंह, नेमसिंह फोजदार, भगवानदास शर्मा, डा. रितु बनावत, ऋषि बंसल, नवीन दुबे, गोरधनसिंह आदि ने पुष्प चक्र चढाकर शहीद को श्रद्वांजलि अर्पित की। इसके पश्चात शहीद के छोटे भाई अनूप ने शहीद सौरभ कटारा को मुखाग्नि देकर पूरे सैन्य सम्मान के साथ सैनिकों ने तीन चक्र फायरिंग कर के साथ अंतिम विदाई दी।

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