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बिना परखे खोला सेंटर, अब संक्रमण का खतरा

- डब्ल्यूएचओ गाइड की भी नहीं पालना

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भरतपुर. चिकित्सा विभाग एवं सरकार यूं तो लोगों की जान महफूज करने के लिए नित-नए कोरोना वैक्सीन सेंटर खोलकर लोगों को राहत देने का जतन कर रहे हैं, लेकिन इस जल्दबाजी में विश्व स्वास्थ्य संगठन की गाइड लाइन की धज्जियां उड़ती नजर आ रही हैं। ऐसा ही एक मामला शहर में सैटेलाइट हॉस्पिटल में सामने आया है। इस अस्पताल को वैक्सीन सेंटर तो बना दिया है, लेकिन यहां वैक्सीनेशन के लिए पर्याप्त जगह नहीं है। ऐसे में यहां संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ है।
जानकारी के मुताबिक डब्ल्यूएचओ की गाइड लाइन के अनुसार कोरोना वैक्सीनेशन सेंटर के लिए तीन कमरों की आवश्यकता होती है। इसमें एक वेटिंग हॉल, दूसरा वैक्सीनेशन सेंटर एवं तीसरा ऑब्जर्वेशन रूम होता है, लेकिन यहां वैक्सीन लगाने के लिए महज एक ही कमरा दिया गया है। ऐसे में गाइड लाइन की पालना नहीं होने के साथ लोगों में संक्रमण फैलने का खतरा मंडराता नजर आ रहा है। इस संबंध में लोगों ने जिला प्रशासन को शिकायत भी की है, लेकिन नतीजा सिफर ही रहा है। लोगों का आरोप है कि पर्याप्त जगह नहीं होने के कारण मरीज एवं यहां तैनात स्टाफ एक-दूसरे से सटकर बैठ रहा है। वैक्सीन के बाद लोगों के लिए वेटिंग रूम तक नहीं है। इससे यहां संक्रमण की आशंका बलवती हो रही है। बुधवार को सैटेलाइट अस्पताल में स्टाफ पहुंच गया, लेकिन काफी देर तक वैक्सीन नहीं पहुंची। ऐसे में स्टाफ एवं अन्य लोग वैक्सीन का इंतजार करते नजर आए।

हर दिन 400 मरीजों की है ओपीडी

राजकीय सैटेलाइट चिकित्सालय में वैक्सीन सेंटर के मामले में मनोनीत पार्षद रघुवीर सिंह ने कहा कि अस्पताल में पर्याप्त जगह नहीं है, जबकि डब्ल्यूएचओ की गाइड लाइन के अनुसार कोरोना टीकाकरण के लिए तीन कमरे होना जरूरी है, जबकि वहां इतना स्थान नहीं है, जबकि सैटेलाइट अस्पताल की ओपीडी करीब 400 मरीज रोजाना की है। टीकाकरण होने होने पर वहां भीड़ होगी, जिससे संक्रमण का खतरा रहेगा। ऐसे में टीकाकरण सैटेलाइट अस्पताल में नहीं कराकर सिटी औषधालय में कराना चाहिए। पार्षद प्रतिनिधि पप्पू राणा और वरिष्ठ कांग्रेसी सुरेश पदयात्री ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा एवं डॉ. सुभाष गर्ग को पत्र लिखकर इसकी जांच कराने की मांग की है कि किस अधिकारी ने सैटेलाइट हॉस्पिटल में पर्याप्त जगह नहीं होने पर भी टीकाकरण की अनुमति दी।

अब कमेटी करेगी विवाद की जांच

भरतपुर . शहर के जनाना अस्पताल में एक चिकित्सक एवं नर्सिंग स्टाफ में हुए विवाद की जांच अब कमेटी करेगी। इसके लिए मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रजत श्रीवास्तव ने जांच कमेटी गठित कर दी है। इस रिपोर्ट के आधार पर ही आगामी कार्रवाई की जाएगी। राजनीति का अखाड़ा बन रहे जनाना चिकित्सालय में जनवरी माह में दो चिकित्सकों में आपसी खींचतान और विवाद के बाद चिकित्सा राज्यमंत्री ने एक चिकित्सक को मेडिकल कॉलेज में लगा दिया था। अब हटाई गईं चिकित्सक के वापस अस्पताल आने पर मंगलवार को फिर से हंगामा हो गया। नर्सिंग स्टाफ ने जहां चिकित्सक पर दुव्र्यवहार का आरोप लगाया। वहीं चिकित्सक ने भी स्टाफ सहित अन्य पर भ्रष्टाचार के आरोप जड़े थे। उल्लेखनीय है कि मंगलवार को जनाना अस्पताल के चिकित्सक एवं नर्सिंग स्टाफ ने आरबीएम अधीक्षक डॉ. जिज्ञासा साहनी को ज्ञापन देकर आरोप लगाया कि डॉ. निर्मला सिंह ने आई ओटी में आकर पुराना रिकॉर्ड मांगते हुए अनाप-शनाप बातें कहीं। ज्ञापन में स्टाफ एवं चिकित्सकों ने डॉ. सिंह पर दुव्र्यवहार करने का आरोप लगाते हुए वहां काम नहीं करने की बात कही थी। उधर इस मामले में चिकित्सक डॉ. निर्मला सिंह ने भी इस संबंध में अधीक्षक को लिखित में शिकायत देते हुए आरोप लगाया था कि जनाना अस्पताल में राष्ट्रीय कार्यक्रमों को मजाक बना दिया है। उनका आरोप था कि मरीजों से बाहर से लैंस मंगाए जा रहे हैं। साथ ही मरीजों से पैसे लिए जा रहे हैं। उनका आरोप था कि पैसे देने वाले मरीजों को तुरंत भर्ती कर लिया जाता है, जबकि अन्य मरीज यहां भटकते रहते हैं। इस मामले को लेकर दोनों पक्षों की ओर से शिकायत दिए जाने के बाद चिकित्सक अधीक्षक डॉ. साहनी ने मामले की जांच कराने की बात कही थी, लेकिन बुधवार को मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. श्रीवास्तव ने इस मामले की जांच के लिए कमेटी गठित कर दी है, जो प्रिंसीपल को रिपोर्ट सौंपेगी।


इनका कहना है

कुछ जनप्रतिनिधि जिला कलक्टर से मिले थे और कुछ वृद्ध लोगों की सहूलियत के हिसाब से वहां सेंटर खोलने की बात कही थी। वैसे सेंटर में अंदर के हिस्से में वैक्सीनेशन करने के लिए जगह है।

- डॉ. कप्तान सिंह, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भरतपुर