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अब जिंदल हॉस्पिटल ने लौटाए पांच और सरकारी वेंटीलेटर

- पत्रिका की खबरों के बाद लौटे वेंटीलेटर

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अब जिंदल हॉस्पिटल ने लौटाए पांच और सरकारी वेंटीलेटर

अब जिंदल हॉस्पिटल ने लौटाए पांच और सरकारी वेंटीलेटर

भरतपुर . सरकारी वेंटीलेटरों से मनमानी कमाई करने वाले जिंदल हॉस्पिटल ने सोमवार को पांच और वेंटीलेटर आरबीएम अस्पताल को लौटा दिए। इससे पहले भी 5 वेंटीलेटर जिंदल हॉस्पिटल ने आरबीएम को लौटाए थे। इससे पहले हॉस्पिटल मरीजों से वसूली गई मनमानी कीमत के एक लाख 62 हजार रुपए भी राजस्थान मेडिकेयर रिलीफ सोसायटी को लौटा चुका है। राजस्थान पत्रिका में नौ मई से लेकर लगातार खबरें प्रकाशित होने के बाद यह मामला देशभर में सुर्खियों में रहा।
आरबीएम अस्पताल को पीएम रिलीफ फंड से मिले वेंटीलेटरों को जिला प्रशासन के निर्देश पर शहर के जिंदल हॉस्पिटल को दिया गया था। प्रशासन की दरियादिली के चलते निजी अस्पताल ने सरकारी वेंटीलेटरों का उपयोग कर मरीजों से मनमानी राशि वसूल की, जबकि यह वेंटीलेटर पीएम रिलीफ फंड से गरीब मरीजों की जिंदगी बचाने के लिए आए थे। यह सब खेल भरतपुर विधानसभा क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले चिकित्सा राज्यमंत्री डॉ. सुभाष गर्ग की नाक के नीचे हुआ। पत्रिका में 9 मई के अंक में गरीबों के हक की सांसों पर रसूख का साया शीर्षक से खबर प्रकाशित होने के बाद राज्य सरकार के स्तर पर फरमान जारी कर प्रदेश में अन्य स्थानों पर भी अतिरिक्त संसाधनों को किराये पर उपलब्ध कराने की बात कही। खास बात यह है कि वेंटीलेटर देते समय जिंदल हॉस्पिटल से वेंटीलेटरों का किराया तय नहीं किया गया था। मामले के सुर्खियों बटोरने के बाद जिंदल हॉस्पिटल ने 5 वेंटीलेटर 18 मई को पीएमओ के पत्र के बाद लौटा दिए। वहीं 5 जिंदल हॉस्पिटल ने 5 वेंटीलेटर सोमवार को लौटा दिए।

पत्रिका ने परत दर परत खोला मामला

जिंदल हॉस्पिटल को सरकारी वेंटीलेटर दिए जाने में प्रशासनिक मेहरबानी का पर्दाफाश पत्रिका ने खबर प्रकाशित किया। खबरों में बताया गया कि आला दर्जे के अफसरों के अपनों का इस निजी अस्पताल में उपचार हुआ। इस उपकार की कीमत चुकान को निजी हॉस्पिटल को सरकारी वेंटीलेटर उपलब्ध करा दिए गए। साहब के रिश्तेदारों के इलाज के लिए दिए गए इन वेंटीलेटरों से निजी हॉस्पिटल संचालक मनमाने दाम वसूलता रहा। पत्रिका ने इसका भी खुलासा श्रृंखलाबद्ध खबरों में किया। मामला तूल पकडऩे पर जिला प्रशासन की कमेटी ने निजी अस्पतालों का निरीक्षण किया। इसके साथ जिंदल हॉस्पिटल की ओर से मरीजों से सरकारी वेंटीलेटर से उपचार करने के एवज में वसूली गई 1 लाख 62 हजार रुपए की राशि भी लौटा ली है।

किराये पर असमंजस बरकरार

आरबीएम अस्पताल प्रशासन ने जिंदल सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल को किराया जमा कराने के लिए 7 मई को पत्र लिखकर किराया जमा कराने को कहा गया, जबकि वेंटीलेटर हॉस्पिटल को अप्रेल माह में दिए गए थे। अस्पताल को यह वेंटीलेटर संक्रमण की स्थिति में मरीजों के हित को देखते हुए चिकित्सकीय कमेटी की अनुशंसा पर जिला कलक्टर के अनुमोदन के बाद आम आदमी की जीवन रक्षा के लिए प्रति वेंटीलेटर किराया 2 हजार प्रतिदिन की दर निर्धारित की गई। अस्पताल को 27 अप्रेल को 5 वेंटीलेटर एवं 6 मई को 5 वेंटीलेटर उपलब्ध कराए गए। इनका किराया राजस्थान मेडिकेयर रिलीफ सोसायटी में जमा कराने की बात कही, लेकिन अभी तक इस पर असमंजस बना हुआ है।

अब हाईकोर्ट में मामला

गरीबों के हक की सांसों को किराये पर देने का मामला विजय कुमार गोयल की जनहित याचिका पर हाईकोर्ट में है। इसमें सरकार ने जांच के लिए कमेटी बनाने की बात कहते हुए समय की मोहलत मांगी है। इस मामले की 26 मई को सुनवाई हो चुकी है। विजय कुमार गोयल के अधिवक्ता की ओर से कोर्ट के समक्ष पेश कि गए शपथ पत्र में सरकार एवं जिला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

इनका कहना है

शेष पांच वेंटीलेटर भी जिंदल हॉस्पिटल ने सोमवार को लौटा दिए हैं। चूंकि यह प्रकरण कोर्ट में हैं। ऐसे में माननीय न्यायालय के आदेश के बाद ही किराये संबंधी निर्णय लिया जा सकेगा।

- डॉ. जिज्ञासा साहनी, प्रमुख चिकित्सा अधिकारी आरबीएम भरतपुर