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अब खांसने की आवाज से हो जाएगी टीबी की पहचान

-नया टीबी रोगी खोजने पर मिलेगी 500 रुपए की प्रोत्साहन राशि

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अब खांसने की आवाज से हो जाएगी टीबी की पहचान

अब खांसने की आवाज से हो जाएगी टीबी की पहचान

भरतपुर. अब मात्र कुछ सेकंड में खांसी की आवाज से टीबी की पहचान हो सकेगी। केंद्र सरकार ने फील्डी नामक नया एप तैयार किया है, जो खांसने की आवाज से बीमारी का पता लेगा। इस एप की मदद से कफ साउंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेस्ड सॉल्यूशन टू डिटेक्ट टीबी प्रोग्राम के तहत ट्रायल हुआ था। सरकारी अस्पतालों में अभी तक टीबी यानी बलगम की जांच एक्स-रे या सीबी नाइट मशीन से लगाया जाता है। अब खांसने की आवाज मात्र से ही बीमारी का पता चल जाएगा। टीबी कब कलेक्शन की एप फील्डी से यह एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक लेंस है, जो खांसी के आवाज के नमूने मात्र से टीबी का पता लगाएगी। पायलट प्रोजेक्ट के तहत देशभर में खांसी की आवाज के नमूने इक_े किए जा रहे है। इसमें टीबी के सक्रिय होगे, उसके स्वजन और संपर्क में आए लोग शामिल होंगे। केंद्र सरकार ने 2025 तक टीबी के पूरी तरह से नाश का लक्ष्य रखा है। टीबी के अधिक से अधिक रोगियों को खोज कर उन्हें स्वस्थ बनाने पर जोर दिया जा रहा है। डॉक्टरों की मानें तो दो सप्ताह से ज्यादा किसी को खांसी रहती है तो टीबी का संदिग्ध रोगी माना जाता है, टीबी है या नहीं इसका पता बलगम की जांच से होता है। कुछ लोग इससे बचने के लिए जांच ही नहीं कराते, कई बार टीबी पहली स्टेज से आगे पहुंच जाती है। मल्टी ड्रग रेजिस्टेंस टीबी के रोगियों की संख्या बढऩे का एक कारण यह भी है टीबी रोगियों की मृत्यु का कारण भी समय पर जांच व उपचार शुरु ना करना है। अब मोबाइल एप आने से रोगियों की पहचान आसानी से होने की संभावना है। एप के माध्यम से टीबी मरीज और संभावित टीबी मरीज की आवाज सात बार रिकॉर्ड की जाएगी। हर बार आवाज अलग-अलग तरीके से होगी। जिन लोगों की आवाज रिकॉर्ड की जाएगी, उनके नाम पता गोपनीय रखा जाएगा। रिपोर्ट किसी को शेयर नहीं की जाएगी। नमूने लेते समय व्यक्तिगत टीम पहुंचेगी। पहले व्यक्ति की सहमति ली जाएगी, फिर एप को चालू कर 30 सेकंड की आवाज रिकॉर्ड की जाएगी।

इन्हें मिल सकेगी प्रोत्साहन राशि

राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के तहत कम्युनिटी वॉलंटियर, आशा सहयोगिनी और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की ओर से समुदाय में नए टीबी रोगी की खोज करने पर 500 रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी तथा स्वयं मरीज भी प्रोत्साहन राशि प्राप्त कर सकते हैं। आशा सहयोगिनी व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का नए टीबी रोगी खोजने में प्रमुख योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि मरीज, कम्युनिटी वॉलंटियर व कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहित करने के लिए गाइडलाइन अनुसार प्रथम सूचना प्रदाता प्रोत्साहन राशि 500 रुपए का भुगतान डीबीटी के माध्यम से किया जाएगा। प्रोत्साहन राशि क्लेम करने की प्रक्रिया के बारे में उन्होंने बताया कि कम्युनिटी वॉलंटियर, आशा सहयोगिनी व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की ओर से समुदाय में संभावित टीबी रोगी को चिन्हित कर निर्धारित रेफरेल प्रपत्र के साथ नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र डीएमसी में बलगम जांच के लिए भेजा जाएगा। यदि आशा व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की ओर से रेफर किए गए संभावित में टीबी रोग की पुष्टि हो जाती है तो सम्बंधित कार्यकर्ता को प्रथम सूचना प्रोत्साहन राशि 500 रुपए का भुगतान किया जाएगा। यदि मरीज किसी भी जांच केन्द्र पर स्वयं जांच करवाने के लिए जाता है और उसमें टीबी रोग की पुष्टि होती है, तो वह मरीज खुद के लिए प्रोत्साहन राशि 500 रुपए प्राप्त करने के लिए योग्य माना जाएगा।

इनका कहना है

-राज्य स्तर से प्राप्त निर्देशानुसार एनटीईपी के तहत कम्युनिटी वॉलंटियर, आशा वर्कर और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की ओर से समुदाय में नए टीबी के रोगी की खोज करने पर 500 रुपए की प्रोत्साहन राशि देय की जाएगी। यदि कोई मरीज स्वयं आकर जांच कराने पर रिपोर्ट पॉजीटिव होने पर मरीज को भी जांच कराने के लिए 500 रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।

डॉ. लक्ष्मण सिंह, सीएमएचओ