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शर्मनाक…नहीं मिली व्हील चेयर, बूढ़े कंधों ने दिया पति को सहारा

- ट्रॉली पुलरों का भी नहीं मिला सहारा, आरबीएम अस्पातल का चिंताजनक हाल

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शर्मनाक...नहीं मिली व्हील चेयर, बूढ़े कंधों ने दिया पति को सहारा

शर्मनाक...नहीं मिली व्हील चेयर, बूढ़े कंधों ने दिया पति को सहारा

भरतपुर . आरबीएम अस्पताल की व्यवस्थाएं पूरी तरह पटरी पर लौटती नजर नहीं आ रही हैं। शनिवार को एक वृद्धा व्हील चेयर के अभाव में अपने बीमार पति को कंधे का सहारा देकर दो मंजिला इमारत से उतारकर लाई, लेकिन उसे न तो व्हील चेयर की सुविधा मिली और न ही ट्रॉली पुलर का सहारा। ऐसे में वह अस्पताल प्रशासन को कोसती नजर आई।
शहर के जवाहर नगर निवासी सुराज शनिवार को अपने बीमार पति को अस्पताल लाई थी। यहां दूसरी मंजिल पर उसने पति अजय शर्मा की डायलसिस कराई। इसके बाद उसे यहां न तो पति को नीचे लाने के लिए व्हील चेयर मिली और न ही उसे ट्रॉली पुलर मिले। ऐसे में वह कंधों के सहारे अपने पति को नीचे लेकर आई। तमाम शिकायतों के बाद भी अस्पताल की व्यवस्थाएं अभी पूरी तरह सुधार में नहीं आ रही हैं। ऐसे में मरीज एवं उनके परिजनों को खासी दिक्क्तों का सामना करना पड़ रहा है। कुछ दिन पहले ट्रॉली पुलर और स्ट्रेचर की कमी के चलते मरीजों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा। पत्रिका में लगातार खबरें प्रकाशित होने के बाद व्यवस्थाओं में कुछ सुधार हुआ, लेकिन अभी पूरी तरह व्यवस्था नहीं सुधर सकी हैं। ऐसे में हर रोज मरीजों को परेशानी से दो-चार होना पड़ रहा है।

एक अन्य पर था मरीज

सुराज ने बताया कि डायलसिस कराने के बाद उन्होंने पति को ले जाने के लिए व्हील चेयर तलाशी, लेकिन वह नजर नहीं आई। एक अन्य व्हील चेयर पर दूसरा मरीज था। ऐसे में सुराज को अपने पति को कंधों का सहारा देकर नीचे तक लाना पड़ा।

हर बार रहती है परेशानी

वृद्धा सुराज ने बताया कि उनके पति किडनी की बीमारी से पीडि़त हैं। ऐसे में उन्हें एक निश्चित अंतराल के बाद अस्पताल आना पड़ता है। हर बार स्ट्रेचर और व्हील चेयर की कमी उन्हें अखरती है। ऐसे में दूसरी मंजिल पर उन्हें ले जाना और लाना काफी कठिनाई भरा होता है, लेकिन अस्पताल प्रशासन ऐसे मरीज और उनके परिजनों की अनदेखी करता है।

यहां जांच के नाम पर होता है दिखावा

हाल में ही राजस्थान पत्रिका के आठ दिन के अभियान के बाद आखिर सुनीता को जीत मिल पाई थी। दबाव बढ़ता देख बैकफुट पर आए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग व प्रशासन ने आनन-फानन में जांच का दावा कर इतिश्री करते हुए महिला सुनीता को 32 हजार रुपए की सहायता राशि प्रदान की थी। राजस्थान पत्रिका ने 18 नवम्बर के अंक में 'शर्मनाक प्लास्टर चढ़ा कर कह दिया बाहर कराओ ऑपरेशनÓ शीर्षक से खबर प्रकाशित की। इसके बाद अस्पताल प्रशासन हरकत में आया और पीडि़ता महिला की सुनीता की खोज-खबर ली, लेकिन उसका कहीं पता नहीं चला, लेकिन पत्रिका ने तलाश कर महिला से बात कर अस्पताल प्रबंधन के झूठ को उजागर किया था, साथ ही आरबीएम अस्पताल प्रशासन की ओर से बनाई गई झूठी रिपोर्ट का सच भी सामने लाया गया था। बेशर्मी ही हद यह थी कि संबंधित अस्पताल प्रशासन समेत तमाम प्रशासनिक अधिकारी भी जांच के नाम पर झूठ बोलते रहे। आरबीएम अस्पताल में लापरवाही के नाम पर हार बार जांच दल का गठन किया जाता है और रिपोर्ट के नाम पर ऑफिस में बैठकर जांच दल इतिश्री कर देता है। यह सिलसिला वर्षों से चल रहा है।

इनका कहना है

व्हील चेयर और स्ट्रेचर अस्पताल में हैं। व्हील चेयर वगैरह दिलाने की जिम्मेदारी रिसेप्शन को दे रखी है। संबंधित मरीज ने वहां से मांगी नहीं होगी। रिसेप्शन से व्हील चेयर मांगी होती तो जरूर उपलब्ध होती।

- डॉ. नवदीप सैनी, प्रमुख चिकित्सा अधिकारी आरबीएम अस्पताल भरतपुर