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ओपीडी में हुए संक्रमित, बुलंद हौसलों से हराया कोरोना

- चिकित्सक बोले, वैक्सीन बड़ा हथियार

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ओपीडी में हुए संक्रमित, बुलंद हौसलों से हराया कोरोना

ओपीडी में हुए संक्रमित, बुलंद हौसलों से हराया कोरोना

भरतपुर . कोरोना का काम तमाम करने को दवाओं के साथ हौसला बहुत जरूरी है। बीमारी से ज्यादा कोरोना का खौफ लोगों को तकलीफ दे रहा है, लेकिन इसे हम अपने मजबूत इरादों के जरिए हरा सकते हैं। यह कहना है जनाना अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. पंकज शर्मा का। डॉ. शर्मा हाल ही में जनाना अस्पताल में बच्चों का उपचार करते हुए संक्रमित हुए हैं, जो अब मजबूत इरादों के बल पर कोरोना को हरा चुके हैं।
जनाना अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. शर्मा ने बताया कि 13-14 मई को अस्वस्थता लगने पर जांच कराई। 15 मई को रिपोर्ट पॉजिटिव आई। ऐसे में तुरंत परिजनों से दूर खुद को घर में ही आइसोलेट कर लिया और दवाओं का सेवन शुरू कर दिया। इसका फायदा यह हुआ कि अन्य परिजन संक्रमित नहीं हो सके। चिकित्सकीय गाइड लाइन का पूरी तरह पालन करते हुए बेहतर खान-पान के साथ नियमित रूप से दवाओं का सेवन किया। इस दौरान खुद को अंदर से मजबूत रखा। डॉ. शर्मा कहते हैं कि बीमारी डर मन पर हावी नहीं होना चाहिए। यदि हम मन से बीमार होते हैं तो बीमारी हमें ज्यादा तकलीफ देने के साथ खूब नुकसान पहुंचाती है। ऐसे में बीमारी को केवल तन तक सीमित रखें। उसे मन तक नहीं पहुंचने दें। सकारात्मक सोच के सहारे हम कोरोना को हराने में जरूर कामयाब होंगे।

कोरोना को हराने में वैक्सीन बड़ा हथियार

डॉ. शर्मा कहते हैं कि कोरोना से बचाव के लिए वैक्सीन जरूर लगवाएं। उन्होंने बताया कि मैंने दोनों वैक्सीन समय से लगवा ली थीं। इसके बाद भी मैं संक्रमित हुआ, लेकिन गंभीर स्थिति जैसी नौबत नहीं आई। वैक्सीनेशन की वजह से कोरोना के केवल माइल्ड लक्षण ही आए। डॉ. शर्मा बताते हैं कि उनके साथी चिकित्सक भी कोरोना की चपेट में आ चुके हैं, लेकिन वैक्सीन लगवाने के कारण वह गंभीर अवस्था में नहीं पहुंचे। ऐसे में इस रोग को हराने में वैक्सीन बड़ा हथियार है।

सुरक्षा के सभी इंतजामात करें

डॉ. शर्मा कहते हैं कि मास्क, दो गज दूरी एवं बार-बार हाथ धोने को आदत में शुमार कर लें। यह कोरोना को हराने में खूब कामयाब है। इसके साथ गर्म पानी के गरारे करना भी इसमें खूब लाभदायक है। संक्रमित हुआ व्यक्ति एवं स्वस्थ व्यक्ति भी इसे अपना सकता है। यह कोरोना को रोकने में काफी कारगर साबित हो रहा है। वह बताते हैं कि दवाओं के साथ योग-व्यायाम का भी सहारा लें। खास तौर से ऊं का उच्चारण एवं सांस रोकने-छोडऩे की प्रक्रिया को अपनाना चाहिए। इससे फेंफड़े मजबूत होते हैं। हर दिन सांस रोकने की क्षमता सैकंड के लिहाज से बढ़ानी चाहिए। इससे फेंफड़े मजबूत बने रहते हैं।