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60 करोड़ के जिस ठेका पर पांच महीने से हंगामा, वह 31 पार्षदों के समर्थन से पारित

भ्रष्टाचार, कमीशनखोरी को लेकर डेढ़ घंटे तक हंगामा, बंदर पकडऩे के ठेका में भ्रष्टाचार पर आपस में ही उलझे पार्षद

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60 करोड़ के जिस ठेका पर पांच महीने से हंगामा, वह 31 पार्षदों के समर्थन से पारित

60 करोड़ के जिस ठेका पर पांच महीने से हंगामा, वह 31 पार्षदों के समर्थन से पारित

भरतपुर. शहर में 60.46 करोड़ रुपए की नई सफाई व्यवस्था निजी कंपनी को देने की स्वीकृति को लेकर पिछले करीब पांच महीने से भी अधिक समय से विवाद हो रहा था, वह तीन घंटे की बैठक में 31 पार्षदों के समर्थन से पारित हो गया। बैठक में वोटिंग के माध्यम से 18 पार्षदों ने इस व्यवस्था का विरोध किया। हालांकि समर्थन के पीछे बैठक में 15 पार्षदों की अनुपस्थिति में ही असल कहानी छिपी हुई है। ज्ञात रहे कि 25 जून 2021 को हुई नगर निगम की बैठक में प्रस्ताव संख्या 69 पर भरतपुर शहर की चयनित मुख्य सडक़ों की मैकेनिकल स्वीपिंग, डोर टू डोर कचरा संग्रह और परिवहन कार्य एवं 40 वार्डों की मैनुअल स्वीपिंग की डीपीआर स्वीकृति करने एवं उक्त कार्य पर तीन वर्षों में होने वाले 60.46 करोड़ रुपए की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति पर विचार को शामिल किया गया था। पार्षदों के विरोध के बाद अब दुबारा से बुधवार को हुई बैठक में यह प्रस्ताव रखा गया।बैठक में पार्षद संजय शुक्ला ने शहर में बंदर पकडऩे में फर्जीवाड़ा करने व पकड़े बिना सत्यापन करने की बात कही। शुक्ला ने कहा कि बंदरों की समस्या का मुद्दा हर बैठक में उठाया जा रहा है। इसके बाद भी समाधान नहीं हो रहा है। इसी बीच पार्षद श्यामसुंदर गौड़ ने कहा कि मेयर के सहयोगी पार्षद बंदर के ठेका में शामिल है। इसलिए खुलेआम भ्रष्टाचार किया जा रहा है। इतने में ही पार्षद भास्कर शर्मा बोलने लगे तो गौड़ ने मेयर से जवाब मांगने की बात कहकर उन्हें बैठने को कहा। जब भास्कर ने बैठने से मना किया तो वे आपस में उलझ गए। गौड़ ने पार्षद भास्कर पर बंदर के ठेके में शामिल होने का आरोप लगा दिया। करीब डेढ़ घंटे तक अन्य बिंदुओं पर विचार करने के बाद नई सफाई व्यवस्था का मुद्दा आया। इसको लेकर करीब डेढ़ घंटे से भी अधिक समय तक विपक्षी गुट ने जमकर विरोध व हंगामा किया। डिप्टी मेयर गिरीश चौधरी ने कहा कि शहर की सफाई व्यवस्था को दो टुकड़ों में बांटकर पुरानी व्यवस्था के साथ नई सफाई व्यवस्था को लागू किया। इसको लेकर ज्यादातर पार्षद सहमत हो गए। इस पर मेयर अभिजीत कुमार ने नियम के अनुसार ऐसा प्रस्ताव पारित नहीं होने की बात कही। काफी देर तक विवाद के बाद अंत में वोटिंग के माध्यम से फैसला करना तय किया गया। इसमें मेयर गुट के 32 पार्षदों ने नई सफाई व्यवस्था का समर्थन किया। जबकि 18 पार्षदों ने विरोध किया। 14 पार्षद बैठक में अनुपस्थित रहे। इस पर नई सफाई व्यवस्था का प्रस्ताव पारित कर दिया गया।

सवा तीन घंटे की बैठक में 14 बार आपस में उलझे पार्षद

नगर निगम की बैठक में ऐसा पहली बार था कि भले ही एजेंडा में सात मुद्दे शामिल थे, लेकिन पार्षदों का फोकस सिर्फ एक ही मुद्दे नई सफाई व्यवस्था पर रहा। बार-बार सदन की गरिमा भंग होती रही। एक पार्षद दूसरे पार्षद पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाता रहा। सदन में कम से कम 50 से अधिक बार भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी का शब्द उपयोग में लिया गया।

असल कहानी...एक दिन पहले ही तय था कि कौन आएगा और कौन नहीं

एकमात्र राजस्थान पत्रिका ने ही नई सफाई व्यवस्था के पहलुओं को उजागर किया था। असल कहानी पर नजर डालें तो सामने आता है कि एक दिन पहले ही नई सफाई व्यवस्था का प्रोजेक्ट स्वीकृत कराने की स्क्रिप्ट एक होटल में लिखी जा चुकी थी। तैयारी तो तीन दिन पहले ही हो चुकी थी। इसमें यहां तक तय हो गया था कि अगर कोई पार्षद खुलेआम समर्थन नहीं करता है तो वह बैठक से ही अनुपस्थित हो जाएगा। ऐसे में विरोधी गुट इस स्क्रिप्ट को नजर अंदाज करता रहा। यही कारण रहा कि खुद भाजपा के ही पार्षद अपनी पार्टी का भी साथ नहीं दे पाए। दो दिन पहले भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. शैलेष सिंह की चेतावनी का भी यहां कोई असर दिखाई नहीं दिया।

कांग्रेस के तीन का विरोध, भाजपा के छह पार्षदों का समर्थन

नई सफाई व्यवस्था का समर्थन कर प्रस्ताव पारित कराने में जिन 32 पार्षदों ने सहमति दी है। इनमें कांग्रेस के 11, भाजपा के छह, निर्दलीय सात, बसपा के तीन पार्षद हैं। विरोध में कांग्रेस के तीन, भाजपा के 11, निर्दलीय चार पार्षदों ने वोटिंग की है। जबकि 15 पार्षद बैठक से अनुपस्थित रहे हैं।

चंडीगढ़ यात्रा पर उठाया सवाल

पार्षद दाउदयाल शर्मा ने कहा कि वर्ष 2018 में हुई भर्ती के सफाई कर्मियों का अभी तक नियमितीकरण नहीं हुआ है। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि शहर की सफाई व्यवस्था को अब खराब बताया जा रहा है तो अब तक क्या हुआ। पिछले बैठक के निर्णय अनुसार कमेटी का गठन किया गया था तो आयुक्त के आदेश की प्रति कहां हैं। यह कस्टम का सवाल नहीं है, बल्कि डीएलबी के नियमों से जुड़ा है। इसको लेकर मेयर व पार्षद के बीच नियमों को लेकर काफी देर तक बहस हुई। पार्षद श्यामसुंदर गौड़ ने कहा कि जब डीएलबी ने यात्रा से पहले स्वीकृति ही नहीं दी थी तो उसका व्यय कंपनी उठाया या मेयर ने। क्योंकि अभी तक उस यात्रा का बिल भी नहीं लगाया गया है। इससे साफ जाहिर है कि ऐसा किसलिए किया गया है।

कौन पार्षद क्या बोला

-नेता प्रतिपक्ष कपिल फौजदार ने कहा कि कागजों में बंदर पकड़े जा रहे हैं। सफाई की नई व्यवस्था के लिए आप दबाव बना रहे हैं।

-शिवानी दायमा: एक कर्मचारी को बंदर ने छत पर काट लिया। एक महिला दूध लेने जा रही थी तो सांड ने हमला कर दिया। नगर निगम सिर्फ घोटाले कर रहा है।

-रूपेंद्र सिंह: ठेकेदार जाल लेकर जाता है और बगैर सत्त्यापन 50 बंदर पकडऩा दिखा देता है। नई सफाई व्यवस्था से जनता पर आर्थिक भार पड़ेगा।-नरेश जाटव: एक पार्षद का ऑटो टिपर के चालक से 100 रुपए रोज व एक लीटर डीजल मांगने का ऑडियो वायरल हुआ, आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।

-भूपेंद्र शर्मा चंदा पड़ा: सीवरेज के कारण हालत खराब है। चैंबरों से होकर पाइपलाइन निकल रही है। इससे कॉलोनियो में करीब पांच महीने से लोगों को गंदा पानी पीना पड़ रहा है।

-अंजना लवानिया: पानी की समस्या बहुत है। सीवरेज से समस्या है। गलियों में परेशानी अधिक आ रही है।

-सतीश सोगरवाल: सभी पार्षदों को मर्यादा पालना करना चाहिए। किसी भी मुद्दे पर पार्षदों की शंका का समाधान मेयर ही करेंगे। आपस में गरिमा के साथ बात करें।

-विजेंद्र चीमा: पार्क, श्मशानों व सामुदायिक भवनों को पीपीपी मोड पर संचालित करने का प्रस्ताव निरस्त किया जाना चाहिए। यह जनहित में नहीं है।-राजेंद्र सिंह राजू: मेयर साहब पहले अवगत कराएं कि आखिर प्रस्ताव संख्या 77 क्या बीमारी है। हर कोई इस पर बोलना चाहता है।

-पार्षद मोती सिंह ने कहा कि सफाई व्यवस्था को वार्डों में दलाली चल रही है। उसे खत्म किया जाना चाहिए। विकास के लिए समर्थन करें। पार्षद श्यामसुंदर ने जवाब दिया कि आपने भी पुराने ठेके में भ्रष्टाचार किया है। अगर ऐसा नहीं किया तो गंगाजल उठाकर बात करें।

मेयर बोले: साफ सुथरा नजर आएगा शहर

मेयर अभिजीत कुमार ने कहा कि प्रस्ताव में शामिल सात में से छह प्रस्ताव पारित हो चुके हैं। खुद मैंने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया था। 31 पार्षदों ने प्रस्ताव पारित किया है। विश्वास है कि नई सफाई व्यवस्था से शहर में बहुत बदलाव नजर आएगा। यह जनता के हक में लिया गया निर्णय है। नियमों के तहत ही सबकुछ किया गया है। कमेटी का गठन करके ही भ्रमण कराया गया था।