
सेवा का जुनून: 87 की उम्र भी नहीं डिगा पाती इरादे
भरतपुर. कोरोना काल में जिंदगी बचाने का जुनून यूं तो हर चिकित्सक पर सवार है, लेकिन जब दूसरे चिकित्सक खुद को महफूज रखने के लिए मरीजों से दूरी बना रहे हैं। वहीं एक ऐसा नाम भी है, जो मरीजों से आत्मीयता से मिलकर उनकी पीड़ा हर रहे हैं। यह सेवा का जज्बा ही है कि 87 साल की उम्र में भी वह गजब का आत्मविश्वास लिए पूरी तन्मयता से मरीजों का उपचार कर रहे हैं। हम बात कर रहे हैं निजी क्लीनिक चलाने वाले डॉ. शंकरदयाल शर्मा की।
कोरोना सभी को डरा रहा है। खास तौर से बुजुर्गों के लिए यह बड़ा खतरा माना जा रहा है, लेकिन डॉ. शर्मा इस उम्र में भी अपना ख्याल रखते हुए दूसरों की सेवा में जुटे हैं। डॉ. शर्मा शहर के गंगा मंदिर के पास क्लीनिक चलाते हैं। नाक, कान, गला सहित अन्य बीमारियों की ओपीडी कोरोना के खौफ के चलते बंद हो गईं। ऐसे में डॉ. शर्मा ने ऐसे मरीजों की सेवा का बीड़ा उठाया। डॉ. शर्मा कहते हैं कि यदि कान में तकलीफ है तो अन्य चिकित्सक दूरी बनाकर उसे केवल उपचार दे रहे हैं। इससे उन्हें यह भी ज्ञात नहीं हो पा रहा कि उनके आखिर दिक्कत क्या है। यही वजह है कि मरीजों को तुरंत राहत नहीं मिल पा रही। इसको लेकर डॉ. शर्मा ईयर स्कोप की मदद से मरीजों को बेहद पास से देखकर उनका उपचार कर रहे हैं। ग्वालियर मेडिकल कॉलेज से वर्ष 1960 में डिग्री लेने वाले डॉ. शर्मा मध्यप्रदेश में एक साल की नौकरी छोड़ आए और यहां निजी क्लीनिक के जरिए लोगों की सेवा में जुटे हैं। डॉ. शर्मा पूर्व में कांग्रेस के शहर अध्यक्ष भी रह चुके हैं।
दिनचर्या का हिस्सा है हवन
डॉ. शर्मा की दिनचर्या लोगों को प्रेरित करती नजर आती है। खास तौर से वह इस उम्र में भी थकते नजर नहीं आते। इसी प्रमुख वजह उनकी बेहतर दिनचर्या है। वह प्रतिदिन अलसुबह 4 से 5 बजे जागते हैं। इसके बाद योग एवं आसन करते हैं। साथ ही घर पर बंधी करीब चार-पांच गायों की सेवा भी उनकी दिनचर्या का प्रमुख हिस्सा है। इसके अलावा वह नियमित रूप से हवन करते हैं। बेहतर दिनचर्या की बदौलत वह इस उम्र में भी नियमित रूप से मरीजों की सेवा में जुटे रहते हैं। डॉ. शर्मा पिछले 61 वर्षों से लगातार प्रेक्टिस कर रहे हैं।
Published on:
24 May 2021 03:04 pm
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