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कर्ज में डूबे डाकघर एजेंट ने की खुदकुशी, मानसिक दबाव था

लोगों से लिए कर्जे को चुकाने में नाकाम एक डाकघर व बीमा कंपनी एजेंट ने विषाक्त पदार्थ खाकर खुदकुशी कर ली। खुदकुशी से पहले उसने सुसाइड नोट छोड़ा है जिसमें आत्महत्या की वजह का उल्लेख किया है।

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aniket soni

May 08, 2016

लोगों से लिए कर्जे को चुकाने में नाकाम एक डाकघर व बीमा कंपनी एजेंट ने विषाक्त पदार्थ खाकर खुदकुशी कर ली। खुदकुशी से पहले उसने सुसाइड नोट छोड़ा है जिसमें आत्महत्या की वजह का उल्लेख किया है। मृतक लक्ष्मण मंदिर के पीछे आरओ प्लांट भी चलाता थाा। लोगों का आरोप है कि उसने लाखों रुपए उनसे लिए, लेकिन तकादा करने पर भी नहीं चुकाए।

थाना प्रभारी जगदीश सिंह मीना ने बताया कि चंद्रभान गुप्ता पुत्र केशवदेव निवासी नीम दरवाजा गत 25 अप्रेल से लापता था। वह एलआईसी व डाकघर में एजेंट का कार्य करता था। चंद्रभान को परिजन तलाश कर शुक्रवार को उसे घर ले आए, इसके बाद वह रात करीब दो बजे वापस चला गया। उन्होंने बताया कि शनिवार दोपहर करीब दो बजे वह रिक्शे में बैठकर घर पहुंचा। यहां तबीयत बिगडऩे पर परिजनों ने उसे जिला आरबीएम अस्पताल में भर्ती कराया।

हालत गंभीर होने पर उसे रैफर कर दिया। परिजन उसे आगरा ले जा रहे थे कि रास्ते में उसकी मौत हो गई। पुलिस ने बताया कि मृतक पर लाखों रुपए का कर्जा था, जिसके चलते वह परेशान था। मृतक के पुत्र राहुल ने बताया कि उसके पिता दोपहर में घर आए थे, उन्होंने विषाक्त पदार्थ खाने की बात कही। वह कर्ज के चलते परेशान थे। उन्होंने सुससाइड नोट छोड़ा है, जिसमें घटनाक्रम का उल्लेख किया है।


ये लिखा सुसाइड नोट में

मृतक ने सुसाइट नोट में बताया कि तीन साल पहले एक डाकघर एजेंट राजकुमार उससे आरओ प्लांट की दुकान पर मिलने आया। उसने प्रॉपर्टी के काम में अच्छे मुनाफे की बात कही। उसकी बातों में आकर उसने अपने रुपए तथा लोगों से कर्ज लेकर राजकुमार को करीब 45 लाख रुपए दिए। राजकुमार भरतपुर छोड़कर चला गया जिसकी शिकायत उसने एक अन्य एजेंट महेन्द्र अग्रवाल से की। उसने 17 लाख रुपए देने के लिए कहा।


सुसाइड नोट में आरोप लगाया है कि ये रुपए भी उसने नहीं दिए। इस पर लोगों का काफी कर्जा हो गया, जिसे चुकाने में असमर्थ हो गया। पत्र में उसने अन्य लोगों से ली लाखों रुपए की राशि का भी जिक्र किया है। इसमें बताया कि मार्च 16 से 15 अप्रेल तक जिन जमाकर्ताओं के पैसे आ गए, उनकी राशि आरडी खाते में जमा करा दी है।

मृतक के पुत्र ने बताया कि उसके पिता मानसिक दबाव थे जिसके चलते वह गत 25 अप्रेल को हरिद्वार चले गए थे। सुसाइड नोट में मृतक ने दोस्तों व परिवार के लोगों से माफी मांगी है। वह सुसाइड की तीन कॉपी छोड़ गए, जिसमें एक एसपी, न्यायाधीश व एक परिवारजनों के लिए थी।


जगदीश् प्रसाद मीना थाना प्रभारी अटलबंध ने बताया कि मृतक पर करोड़ों रुपए का कर्ज था। दोपहर में वह घर विषाक्त पदार्थ खाकर पहुंचा, परिजन अस्पताल ले गए। बाद में उसकी इलाज के लिए ले जाते समय मौत हो गई। सुसाइड नोट मिला है, जिसके आधार पर मामले की जांच की जाएगी।

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