
रेलवे अब सूर्य से लेगा ज्यादा शक्ति
भरतपुर. हरित ऊर्जा क्रांति के तहत गैर पारंपरिक माध्यमों से ऊर्जा प्राप्त करने के ठोस प्रयासों के तहत कोटा मंडल ने सोलर पावर प्लांट की योजना को विस्तार दिया है। कोटा के बाद अब मंडल के भरतपुर स्टेशन पर 60 किलोवॉट विद्युत उत्पादन क्षमता प्लांट स्थापित किया है। वरिष्ठ मंडल बिजली इंजीनियर सामान्य हरीश रंजन के अनुसार, इस प्लांट के लगने से कोटा मंडल को सालाना करीब 4 लाख 40 हजार रुपए की बचत होगी। सोलर प्लांट निर्माता कंपनी के साथ कोटा मंडल ने एक करार किया है। इसके तहत कोटा मंडल के पांच स्थानों पर सोलर पावर प्लांट लगाए जाएंगे। इसमें कोटा रेलवे स्टेडियम, कोटा वर्कशॉप, कोटा आरओएच डिपो, तुगलकाबाद इलेक्ट्रिक लोको शेड और बारां रेलवे स्टेशन शामिल हैं। इस सोलर पॉवर प्लांट से रेलवे को 25 साल तक 3 रुपए 47 पैसे प्रति यूनिट से बिजली मिलती रहेगी। वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक अजय कुमार पाल ने बताया कि केवल भरतपुर प्लांट से प्रतिदिन लगभग 240 किलोवॉट बिजली का उत्पादन होगा। सालाना लगभग 87,600 यूनिट बिजली प्राप्त होगी। इस तरह वर्तमान प्रचलित विद्युत दरों के हिसाब से रेलवे को लगभग 7 लाख 45 हजार रुपए वार्षिक की बचत होगी। उत्पादित एनर्जी के लिए निर्माता कम्पनी को 3 रुपए 47 पैसे प्रति यूनिट की दर से भुगतान करने के बाद भी रेलवे को लगभग 4 लाख 40 हजार की बचत होगी। कोटा जंक्शन के भवन और टीन शेड पर सौर ऊर्जा के प्लांट लगाया जा चुका है। स्टेशन की आपूर्ति इसी प्लांट के जरिए हो रही है।
इसलिए भी है जरूरी
पिछले कुछ समय से विभिन्न सेक्टरों में हरित ऊर्जा क्रांति के तहत गैर पारंपरिक माध्यमों से ऊर्जा प्राप्त करने की डिमांड बढ़ रही है। भारत का दुनिया भर में बिजली का उत्पादन और खपत के मामले में पांचवें नंबर पर है। भारत ने पिछले कुछ वर्षों में बिजली उत्पादन के क्षेत्र में काफी विस्तार किया है। देश में अधिकांश बिजली (लगभग 53 प्रतिशत) का उत्पादन कोयले से होता है और इसके चलते भविष्यवाणी की गई है कि वर्ष 2040-50 के बाद देश में कोयले के भंडार समाप्त हो जाएंगे।
Published on:
22 Dec 2020 07:20 pm
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