
भरतपुर। लोहागढ़ किला 289 साल पुराना है। इसका निर्माण भरतपुर के जाट वंश के महाराजा सूरजमल ने 19 फरवरी 1733 में कराया था।इसके चारों ओर मिट्टी की दोहरी दीवारें और गहरी खाई है। इसे सुजानगंगा कहते हैं। इसमें पानी मोती झील से लाया गया था। किले में दो दरवाजे हैं। उत्तरी द्वार अष्टधातु का बना है, इसे जवाहर सिंह 1765 में दिल्ली विजय के बाद लाल किले से उतारकर लाए थे। भरतपुर राज्य के जाट राजवंश के राजाओं का राज्याभिषेक जवाहर बुर्ज में होता था। इस किले पर कई आक्रमण हुए हैं, लेकिन इसे कोई भी नहीं जीत पाया। सन् 1803 में लार्ड लेक ने बारूद भरकर इसे उड़ाने का प्रयास किया था, लेकिन इसका कुछ नहीं बिगड़ा था।
किले की खासियत
किले को बनाने में विशेष तकनीक का प्रयोग किया गया था, इससे बारूद के गोले भी किले की दीवार से टकराकर बेअसर हो जाते थे।
किले के निर्माण के समय पहले चौड़ी और मजबूत पत्थर की ऊंची दीवार बनाई गई। इस पर तोपों के गोलों का असर नहीं होता था।
इन दीवारों के चारों ओर सैकड़ों फुट चौड़ी कच्ची मिट्टी की दीवार बनाई गई और नीचे गहरी और चौड़ी खाई बना कर उसमें पानी भरा गया। दुश्मन पानी को पार कर भी गया तो सपाट दीवार पर चढऩा संभव नहीं होता था।
इस किले पर कब्जा जमाने के लिए अंग्रेजों ने 13 बार आक्रमण किया था। अंग्रेजी सेना ने यहां सैकड़ों तोप के गोले बरसाए थे, लेकिन किले पर कोई असर नहीं हुआ। अंग्रेजों की सेना हताश होकर चली गई थी।
फैक्ट फाइल
पूर्व महाराजा सूरजमल ने 289 साल पहले कराया था निर्माण
13 बार अंग्रेजों ने आक्रमण किया इस किले पर
1050 मीटर से अधिक की ऊंचाई पर है स्थित
Published on:
14 Nov 2022 02:30 pm
बड़ी खबरें
View Allभरतपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
