
भरतपुर।
कई सालों पहले नवजात बच्ची को गले में कपड़ा बांध सीने से चिपकाए रिक्शा चलाते हुए युवक की बेबसी की घटना ने प्रदेश के लोगों को झकझोर कर रख दिया था। भरतपुर की वही मासूम बच्ची इटली की दंपति की सूनी गोद भरेगी। इटली की दंपति ने जो आवेदन उसे गोद लेने के लिए लगाया था, वह प्रक्रिया अब लगभग पूरी हो चुकी है। पारिवारिक न्यायालय के न्यायाधीश तनवीर अहमद ने उसे प्रस्तुत किया। इसमें कोर्ट ने बालिका को उसकी राय जानने के लिए बुलाया। जहां दामिनी ने गोद जाने के लिए स्वीकृति प्रदान कर दी है।
अधिवक्ता राजेश मितल ने बताया कि मामला अक्टूबर 2012 का है। जनाना अस्पताल में बालिका को जन्म देते ही उसकी मां की मौत हो गई। पिता बबलू रिक्शा चलाता था। नवजात को घर पर अकेला कैसे छोड़े, इसके लिए उसने गले में कपड़े की रस्सी का झूला बनाकर दामिनी को साथ लिया और रिक्शा चलाने लगा। इसके बाद देश-विदेश के लोगों ने उसकी सहायता के लिए राशि एकत्रित कर खाते में डाली। लेकिन उसके पिता बबलू की अत्यधिक शराब सेवन से जून 2017 में मौत हो गई। दत्तक गृहण में लेने के लिए इटली के दंपति ने आवेदन किया था। इसके लिए न्यायाधीश ने शुक्रवार को निदेशक बालिका गृह को दामिनी को लेकर आने के लिए पाबंद किया था। हालांकि बालिका से बात करने के बाद न्यायालय ने निर्णय सुरक्षित रख लिया है।
आपको बता दें कि साल 2012 के नवम्बर महीने में बबलू की पत्नी ने एक बच्ची को जन्म दिया था, लेकिन इस नवजात बच्ची के दुनिया में आते ही उसकी मां की मौत हो गई थी। अपना और अपनी नवजात बालिका का भरण पोषण करने के लिए पिता बबलू अपनी नवजात बच्ची को सीने से लगाए रिक्शा चलाने लगा। बबलू की ये बेबसी मीडिया की सुर्खियां बन गई और उसे देखकर लोगों ने मदद के लिए हाथ बढ़ाए। जिला प्रशासन ने भी उसकी मदद के लिए बच्ची और उसके पिता बबलू के नाम से बैंक में खाता खुलवाया। इस खाते में सहयोग राशि जमा होती गई और रकम करीब 18 लाख रुपए तक पहुंच गई। देखरेख के लिए तत्कालीन कलेक्टर ने कमेटी गठित कर दी और बैंक में जमा पैसा दामिनी के बालिग होने तक बैंक में ही जमा रखना तय किया गया ताकी बड़ी होकर दामिनी अपना भविष्य उस राशि से संवार सके। दामिनी के पिता बबलू की भी रहस्यमयी ढंग से मौत हो गई थी।
Published on:
11 May 2019 01:45 pm
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