31 जुलाई 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

Sawan 2026: राजस्थान का अनोखा शिव मंदिर, जहां दिन में 3 बार रंग बदलता है शिवलिंग, सर्प करते हैं महादेव का श्रृंगार

Shamshaneshwar Mahadev Temple: राजस्थान में एक ऐसा मंदिर भी हैं, जहां पर शिवलिंग दिन में तीन बार रंग बदलता है। मंदिर की सुरक्षा में लगभग पांच फीट लंबा काला सर्प भी रहता है जो केवल महाशिवरात्रि के दिन अर्द्धरात्रि के समय भक्तों को बिना नुकसान पहुंचाए महादेव के दर्शन के लिए आता है।
2 min read
Google source verification
Shamshaneshwar Mahadev Temple

श्मशानेश्वर महादेव मंदिर। फोटो: पत्रिका

भरतपुर। यूं तो देश में 12 प्रमुख ज्योतिर्लिंग स्वयंभू शिवलिंग माने जाते है। हालांकि, स्कंद पुराण में लगभग 84 हजार स्वयंभू शिवलिंगों का उल्लेख है। इन्हीं में से एक भरतपुर शहर के काली बगीची स्थित श्मशानेश्वर महादेव मंदिर है। यह स्वयं-भू शिवलिंग पांच मुखी है। इस मंदिर की प्राचीनता को लेकर कोई पुख्ता प्रमाण उपलब्ध नहीं है। कुछ जानकार इसे सदियों पुराना बताते हैं, तो कुछ इसे भरतपुर रियासत की स्थापना से पूर्व का मानते हैं। कहा जाता है कि यहां शिवलिंग दिन में तीन बार रंग बदलता है और सर्प महादेव का श्रृंगार करते हैं।

हिंदू धर्म में सावन का महीना अत्यंत पवित्र माना जाता है और यह भगवान शिव को विशेष रूप से प्रिय है। पूरे माह यहां भगवान शिव की पूजा-अर्चना, जलाभिषेक और शिव भक्ति का विशेष महत्त्व होता है। पुजारी के अनुसार यहां मंदिर के स्थान पर पहले श्मशान हुआ करता था। ये स्वयं-भू शिवलिंग शमशान भूमि में प्रकट हुआ। उस समय शिवलिंग को यहां स्थान दिया गया। समय के साथ आबादी बढ़ी तो श्मशान को कुछ दूरी पर पहुंचाया गया और यहां श्मशानेश्वर मंदिर अस्तित्व विष को भगवान में आया। यहां जो भी भक्त सच्चे मन से अपनी मनोकामना कहता है महादेव उसकी मनोकामना जरूर पूरी करते हैं।

मंदिर के पुजारी उमेश चंद मिश्रा बताते हैं कि समुद्र मंथन से प्रकट हुए हलाहल विष को शिव ने अपने कंठ में धारण किया था। विष की तीव्र जलन को शांत करने के लिए देवताओं ने उन पर पवित्र नदियों का शीतल जल अर्पित किया। यह घटना सावन में होने से श्रद्धालु इस मास में जलाभिषेक कर बेलपत्र चढ़ाते हैं। दूसरी मान्यता है कि सावन में भगवान विष्णु चार महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। इस दौरान सृष्टि के संचालन का दायित्व भगवान शिव संभालते हैं। यह भी कहा जाता है कि सावन में भगवान शिव अपनी ससुराल कनखल (हरिद्वार) में निवास करते हैं। इसलिए इस महीने की पूजा-अर्चना सीधे महादेव तक पहुंचती है।

महाशिवरात्रि पर दर्शन करने आते हैं नाग देवता

पुजारी उमेश चंद मिश्रा बताते है कि यह शिवलिंग दिन में तीन बार अपना रंग बदलता है, जिसका गहराई से देखने पर ही पता लगाया जा सकता है। सुबह के समय शिवलिंग सूर्य की लालिमा जैसा लाल या हल्का सफेद, दोपहर में केसरिया और रात ढलने तक इसका रंग सांवला हो जाता है। इस प्रक्रिया को भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश (त्रिदेव) के त्रिगुण स्वरूप का प्रतीक माना जाता है। शाम के समय श्मशानेश्वर महादेव का फूलों किया जाता है। मंदिर की सुरक्षा में लगभग पांच फीट लंबा काला सर्प भी रहता है जो केवल महाशिवरात्रि के दिन अर्द्धरात्रि के समय भक्तों को बिना नुकसान पहुंचाए महादेव के दर्शन के लिए आता है।

महाशिवरात्रि और गणेश चतुर्थी पर विशेष आयोजन

मंदिर पुजारी उमेश चंद मिश्रा ने बताया कि यहां पूरे साल में महाशिवरात्रि और गणेश चतुर्थी पर विशेष आयोजन होते हैं। इनमें फूल बंगला, बर्फ और सर्प की झांकियां आदि शामिल है।